वसुंधरा राज में कटारिया नंबर वन

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मंत्रिमंडल के 12 सदस्यों ने शुक्रवार को राजभवन में शपथ ग्रहण किया, तो उसमें गुजरात के सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले के अभियुक्त गुलाबचंद कटारिया भी शामिल थे.
राज्यपाल मारग्रेट अलवा ने जब सबसे पहले मंत्री को शपथ ग्रहण कराने के लिए मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की तरफ इशारा किया तो वसुंधरा राजे को सबसे पहले कटारिया का ही नाम पुकारना पड़ा.
वसुंधरा के पिछले शासन काल में कटारिया पर जमीनों की खरीद में पंजीयन शुल्क की चोरी के आरोप भाजपा नेताओं की ओर से ही लगाए गए थे.
कटारिया को वसुंधरा राजे शुरू से ही नापसंद करती हैं लेकिन राजनीतिक मजबूरियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दबाव के चलते उन्हें यह खून का घूंट पीना पड़ा.
संघ खेमे के भारी दबाव के बावजूद 13 दिसंबर को जब वसुंधरा राजे ने शाही अंदाज से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो कटारिया को शपथ नहीं दिलाई गई.
संघ खेमा कटारिया को वसुंधरा राजे के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है और समय-समय पर दोनों की यह प्रतिद्वंद्विता खुलकर सामने आई है.
कटारिया फिलहाल चुनाव से पहले तक नेता प्रतिपक्ष थे.
वह वसुंधरा राजे के बाद राजस्थान भाजपा में नंबर दो पर माने जाते हैं.
सोहराबुद्दीन प्रकरण में अभियुक्त
वसुंधरा राजे की पिछली सरकार में वह गृह मंत्री थे और गुजरात के सोहराबुद्दीन प्रकरण में सीबीआई ने उन्हें अभियुक्त बनाया हुआ है.
सीबीआई का आरोप है कि सोहराबुद्दीन को फर्जी मुठभेड़ में मारने के षड्यंत्र में कटारिया भी शामिल थे क्योंकि वह राजस्थान के गृह मंत्री थे.
आरोप है कि कटारिया ने एक मार्बल व्यवसायी को सोहराबुद्दीन से मिली धमकी के बाद गुजरात के गृह मंत्री अमित शाह से संपर्क साधा था.
हालांकि कटारिया कहते हैं, उन्हें इस प्रकरण में सीबीआई ने झूठा फंसाया था और उनका सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ से कोई लेना-देना नहीं.
उन्होंने कहा, ''मुझ पर जो मामला बनाया गया था, वह बिलकुल गलत था. मेरे ऊपर कोई आरोप बन ही नहीं रहे हैं. उन्होंने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं, उनको खारिज करवाने के लिए मैंने अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 227 के तहत एक पूरे सबूतों के साथ अर्जी लगाई है.''
इस धारा में किसी भी प्रकरण के तहत चल रही अदालती कार्यवाही से अभियुक्त को मुक्त करने का प्रावधान है.
संघ का आशीर्वाद

कटारिया सातवीं बार विधायक बने हैं और संघ पृष्ठभूमि के नेताओं में उनकी छवि एक बेबाक नेता की मानी जाती हैं.
उन पर पहले कभी आरोप नहीं लगे थे लेकिन पिछली बार जब भाजपा की सरकार थी तो उन पर जमीन खरीद मामले में पंजीयन शुल्क की चोरी के आरोप लगे.
कटारिया के आग्रह पर सरकार ने जांच तो करवाई, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया.
हालांकि इस मामले में कटारिया की पीड़ा खुलकर सामने आती रही है कि जब जांच में शुल्क चोरी के बजाय ज्यादा शुल्क जमा कराने की बात आई तो रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई.
कटारिया के विवाद
वसुंधरा राजे सरकार के हार जाने के बाद दो साल पहले कटारिया ने उदयपुर संभाग में अपनी यात्रा निकालने की घोषणा कर दी थी.
इस यात्रा को वसुंधरा राजे के विरोध के बाद रोका गया तो कटारिया ने राजे सहित पार्टी के कई नेताओं पर निशाना साधा था.
दोनों नेताओं के बीच लंबा विवाद चला लेकिन वसुंधरा राजे इस राजनीतिक संघर्ष में कटारिया और अन्य विरोधियों पर भारी पड़ीं.
आखिर वसुंधरा राजे अपनी मर्जी से अध्यक्ष बनने में सफल रहीं और कटारिया को नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया.
कटारिया को नेता प्रतिपक्ष का पद मिल गया तो वे वसुंधरा राजे की जमकर तारीफ करने लगे और पूरी सुराज संकल्प यात्रा में उनके साथ रहे.
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