'पति की विरासत को बचाने की कोशिश करूंगी'

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता,छत्तीसगढ़ से
सालों से गृहस्थी संभाल रही देवती कर्मा अब एक नए रूप में नजर आ रही हैं. उनकी आवाज़ में भले ही अपने पति की तरह गरज न हो और न ही तज़ुर्बा लेकिन वे अपने पति के रास्ते पर चलने की कोशिश ज़रूर कर रही हैं.
देवती छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हैं.
देवती के पति और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के बड़े नेता महेंद्र कर्मा की मई के आखिर में माओवादियों ने हत्या कर दी थी.
अपने पति महेंद्र कर्मा की हत्या के छह महीने के भीतर ही उन्हें चुनावी समर में कूदना पड़ा है.
कांग्रेस की तरफ से दंतेवाड़ा सीट पर महेंद्र कर्मा विधायक रहे थे लेकिन साल 2008 में वो चुनाव हार गए जिसका असर राज्य में उनके राजनीतिक क़द पर पड़ा.
अब देवती कर्मा के सामने उनके परिवार के अस्तित्व का सवाल है, उनकी सुरक्षा का सवाल है. ऐसे में चुनाव भी लड़ना उनके लिए कोई आसान काम नहीं है क्योंकि माओवादियों के निशाने पर उनका परिवार है.
सैकड़ों संगीनों के साए में देवती प्रचार कर रहीं हैं लेकिन उनका प्रचार एक सीमित इलाके तक ही है. वो सुबह घर से निकलती हैं और शाम ढलने से पहले ही उन्हें दंतेवाड़ा लौटना पड़ता है.
हर गतिविधि पर नजर

उनके प्रचार की कमान संभाल रहे नेता कहते हैं कि माओवादी देवती कर्मा की हर गतिविधि पर नज़र रख रहे हैं. इसलिए उनके कार्यक्रम को समय की पाबंदी के साथ अमली जामा पहनाना पड़ता है जिसमें किसी भी तरह की किसी चूक की गुंजाइश नहीं है.
दंतेवाड़ा में शहरी इलाकों को छोड़, बाक़ी के सभी मतदान केंद्र अति संवेदनशील हैं. कई ऐसे इलाके हैं जहाँ देवती को प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से जाने से मना कर दिया है.
राज्य पुलिस और अर्ध सैनिक बलों के जवानों के घेरे में प्रचार करती हुई देवती कर्मा से बीबीसी की मुलाक़ात दंतेवाड़ा के बचेली में हुई.
वे बड़े आत्मविश्वास के साथ कहती हैं, "क्या है, अब मेरे पति नहीं हैं. पति की जगह तो मुझे खड़ा होना ही पड़ेगा न.''
सलवा जुडूम शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा की हत्या के बाद कांग्रेस को उम्मीद है कि सहानुभूति की लहर का लाभ उनकी विधवा को ज़रूर मिलेगा.

साड़ी और ऊपर से एक शाल लपेटे देवती निकल पड़ती है शहरों की गलियों में वोट मांगने के लिए.
शायद हालात ने 6 महीनों के अंदर ही उन्हें राजनीतिक रूप से परिपक्व बना दिया है. वो कहती हैं, "पति की हत्या के बाद उनके समर्थक बिखर गए थे. मैं उनको एक बार फिर इकठ्ठा करने का काम कर रही हूँ. उनके कहने पर ही मैं चुनाव भी लड़ रही हूँ.''
देवती का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा विधायक भीमा मंडावी और सीपीआई के प्रत्याशी बोमड़ाराम कोवासी से है.
वो कहती हैं कि हालांकि वो राजनीति में नहीं रही हैं लेकिन पति के साथ रहते हुए उन्हें राजनीतिक समझ ज़रूर आ गयी थी.
वे कहती हैं, "मैं वही सब करूंगी जो मेरे पति किया करते थे."
ये पूछे जाने पर कि जिस तरह सब राजनीतिक दलों ने सलवा जुडूम से पल्ला झाड़ा तो अब उन कार्यकर्ताओं का क्या होगा? देवती कहती हैं कि वो सलवा जुडूम के कार्यकर्ताओं के बीच ही रहना पसंद करेंगी.
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