अध्यादेश वापस, पर यूपीए के कई साथी नाखुश

केंद्र सरकार ने अपराधी ठहराए गए सांसदों और विधायकों को बचाने वाले विवादास्पद अध्यादेश को वापस ले लिया है.
सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, "आज शाम छह बजे कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि जनप्रतिनिधि कानून को लेकर जो अध्यादेश है और विधेयक है, सरकार दोनों को वापस लेती है."
उन्होंने माना कि सरकार के कई मंत्रियों ने पहले इस अध्यादेश का समर्थन किया था. लेकिन ‘जनमानस की भावनाओं के अनुरूप’ इस बारे में फिर से विचार किया गया और ये फैसला लिया गया है.
नेशनल कांफ्रेस के नेता और केंद्रीय मंत्री फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि वो मंत्रिमंडल के फैसले से खुश नहीं हैं. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “ये खत्म हो चुका है और इसे भूल जाना चाहिए.”
केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. उन्होंने कहा, "जो हमें कहना था, हमने बैठक में कह दिया है."
'देर से आए दुरुस्त आए'
यूपीए सरकार का बाहर से समर्थन कर रही समाजवादी पार्टी ने भी इस बारे में अपनी नाखुशी जताई है.
दूसरी तरफ विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को 'तमाशा' बताया और कहा है कि केंद्र सरकार के कई मंत्री पहले इस अध्यादेश का समर्थन कर रहे थे.
पार्टी नेता रविशंकर प्रसाद ने गांधी परिवार की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री और कैबिनेट अहम नहीं हैं, वंशवाद अहम है’.
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "कांग्रेस देर से आई दुरुस्त आई." उन्होंने कांग्रेस के इस रुख को गलत बताया कि भाजपा पहले इस अध्यादेश पर सहमत थी.
उन्होंने कहा कि ये कैसे हो सकता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पता नहीं था कि कांग्रेस क्या अध्यादेश लाने जा रही है.
विवादास्पद अध्यादेश

इस अध्यादेश को वापस लिए जाने के बाद ये तय हो गया है कि कांग्रेस सांसद रशीद मसूद और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की संसद सदस्यता खत्म हो जाएगी.
इन दोनों नेताओं को पिछले दिनों सीबीआई की अदालतों ने भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी करार दिया था. मसूद को जहां चार साल की सजा सुनाई गई है, वहीं चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव को गुरुवार को सजा होगी.
10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा था कि जिन जनप्रतिनिधियों को आपराधिक मामलों में दोषी करार दिया गया है और दो साल या उससे ज्यादा की सजा मिली है, उन्हें अयोग्य करार दिया जाए.
इस फैसले के बाद सरकार एक अध्यादेश लाई जिसके अनुसार दोषी ठहराए जाने के बावजूद सांसद और विधायक अपील करने पर अपने पदों पर रह सकते हैं.
विपक्ष की आलोचना के बीच पिछले दिनों कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ही इस अध्यादेश को बकवास करार दिया. इसके बाद इस अध्यादेश को वापस लिए जाने को लेकर अटकलें लग रही थीं.
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी इस अध्यादेश पर दस्तख़्त नहीं किए थे.
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