अध्यादेश पर बैठक से पहले बयानबाज़ी तेज़

अपराधी ठहराए गए सांसदों को बचाने वाले विवादास्पद अध्यादेश को लेकर कांग्रेस कोर समिति की बैठक के बीच सरकार के सहयोगी और विपक्षी दलों के बीच भी मामले पर बयानबाज़ी तेज़ हो गई है.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और नेशनल कांफ़्रेंस ने जहाँ सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए की बैठक में इस पर चर्चा की माँग की है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी ने सरकार की आलोचना की है.
नेशनल कांफ़्रेंस के नेता और केंद्रीय मंत्री फ़ारुक़ अब्दुल्लाह ने कहा है कि बुधवार शाम को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में इस अध्यादेश को लेकर चर्चा होगी. मगर साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी के 'सलाहकारों' की भी आलोचना की.
अब्दुल्लाह ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा, "इस बारे में किसी ने उन्हें सलाह दी होगी और मुझे लगता है कि उन्हें ग़लत सलाह दी गई. उन्हें प्रधानमंत्री के लौटने का इंतज़ार करना चाहिए था और उसके बाद वह सीधे प्रधानमंत्री से मिलकर अपनी बात रख सकते थे. मगर ऐसा नहीं हुआ. अब तो पानी बह चुका है. अब मुझे उम्मीद है कि उन्हें भविष्य में सही लोग सलाह देंगे."
बुधवार सुबह लगभग राहुल गाँधी और के बीच लगभग आधे घंटे तक बातचीत भी हुई. कुछ दिनों पहले राहुल गाँधी ने दिल्ली के प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि 'ये अध्यादेश बकवास है और इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए'.
उसके बाद से ही केन्द्र की यूपीए सरकार चौतरफ़ा हमले झेल रही है.
इधर मुख्य विपक्षी दल भाजपा का कहना है कि उनके विरोध के बाद ही सरकार इस विवादास्पद अध्यादेश को लेकर झुकती दिख रही है.
भाजपा-कांग्रेस में खींचतान
राज्य सभा में भारतीय जनता पार्टी के उप नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल गाँधी के रुख़ की आलोचना करते हुए कहा, "क्या राहुल गाँधी और उनकी सरकार अलग है? राहुल गाँधी कोयला घोटाले, टूजी और राष्ट्रमंडल घोटाले पर कुछ नहीं बोले."
प्रसाद के अनुसार, "ये जो अपने को सरकार से अलग दिखाने की कोशिश है मैं इसे नाटक मानता हूँ. ये (अध्यादेश वापस लेने की चर्चा) जनता के दबाव, बीजेपी के प्रयास की वजह से हुआ है."
मगर संसदीय कार्यमंत्री कमल नाथ ने भाजपा पर रुख़ बदलने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा, "पहले सभी पार्टियाँ इस अध्यादेश के पक्ष में थीं, जिनमें भाजपा भी शामिल थी. जब से राहुल गाँधी ने कहा है कि इसकी समीक्षा की जानी चाहिए तब से भाजपा ने भी अपना रुख़ बदल लिया है. ये उनका पुराना तरीक़ा रहा है कि वे एक जगह एक बात करते हैं फिर दूसरी ओर दूसरी बात."
वहीं आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का कहना था, "ये तमाशा है, पहले वे अध्यादेश लाते हैं और फिर लोगों का गुस्सा देखने के बाद इसकी आलोचना करते हैं, लेकिन इस देश के लोग मूर्ख नहीं हैं."
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी अध्यादेश वापस लेने की हिमायत की है.
पार्टी नेता सीताराम येचुरी के अनुसार, "हम खुश हैं कि ऐसा लग रहा है कि इसे वापस लिया जाएगा. ये अध्यादेश लाया ही नहीं जाना चाहिए. हम पहले ही कह चुके हैं कि ये मामला संसद के विचाराधीन है. बिल का एक मसौदा स्थाई समिति को गया है. उसे आने दीजिए. उस पर बहस होने दीजिए. इतनी जल्दी क्या है."
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