मिड-डे मील: कई जाँच, लेकिन सवाल क़ायम

बिहार के सारण ज़िले के एक स्कूल में मध्याह्न भोजन के बाद 23 बच्चों की मौत का मामला अभी थमा नहीं है. अब बिहार सरकार की ओर से गठित विशेष कार्य दल (एसआईटी) ने जाँच का काम शुरू किया है.
वैसे पुलिस भी इस मामले की जाँच में जुटी है. लेकिन अभी तक मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है.
कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट की सलाहकार समिति ने भी व्यवस्था के स्तर पर जाँच की और कई गंभीर सवाल खड़े किए.
न्यायालय के आयुक्तों के राज्य सलाहकारों ने कहा है कि राज्य सरकार इस काम के लिए के लिए केंद्र से मिलने वाले कुल फंड का अधिक से अधिक 60 फ़ीसदी धन ही ख़र्च कर पाता है.
अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि ब्लॉक में पहले से ही एक मध्य विद्यालय मौजूद था लेकिन उसके बाद भी नया स्कूल क्यों खोला गया.
ये भी कहा गया है कि स्कूल में दुर्घटना के समय सिर्फ़ एक शिक्षिका मौजूद थीं, जिसे पढ़ाने से लेकर, भोजन सामग्री की ढुलाई से लेकर बच्चों की देख-रेख और उन्हें खाना खिलवाने तक की ज़िम्मेदारी थी.
बिहार के सारण ज़िले के स्कूल में मिलने वाले भोजन को खाने के बाद बच्चे बीमार हो गए, और उनमें से 23 की मौत हो गई जबकि कइयों का इलाज अभी भी अस्पताल में जारी है.
सर्वोच्च न्यायालय आयुक्तों के राज्य सलाहकारों, कई अन्य संस्थाओं के सदस्यों और शोधकर्ताओं की टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है.
इस टीम ने सारण ज़िले के उस गांव का दौरा किया है जहां यह हादसा कुछ दिन पहले हुआ.
इस रिपोर्ट के मुताबिक उस स्कूल में मिड डे मील, ज़िला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा अधिकारी या राज्य सरकार की निगरानी टीम से जुड़े कोई भी अधिकारी उस स्कूल का निरीक्षण करने कभी नहीं पहुंचे.
इस टीम ने पाया कि उस स्कूल में मिड डे मील का खाना पकाने या सामान तक रखने की कोई सुविधा तक नहीं थी और पर्याप्त शिक्षकों का अभाव था.
विद्यालय समिति प्रबंधन ने भी स्कूल का समुचित ढांचा न होने के बावजूद कोई सक्रियता नहीं दिखाई.
सलाहकारों की इस टीम ने कहा कि इस आपात स्थिति से निपटने और इलाज के लिए प्राथमिक चिकित्सा केंद्र के पास भी कोई सुविधा नहीं थी.
इस टीम ने यह कहा है कि राज्य में इस योजना के लिए रसोई घर बनाने के लिए दी जाने वाली राशि का 50 फ़ीसदी ही ख़र्च होता है.
गुणवत्ता की जांच

जांच में पाया कि राज्य सरकार इस योजना के लिए आबंटित राशि का केवल 55 से 60 फीसदी हिस्सा ही इस्तेमाल कर पाती है.
इस टीम ने कहा है कि पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से कराई जानी चाहिए.
इस टीम ने मिड डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि भोजन बंटने से पहले स्कूल के प्रिसिंपल द्वारा इसे चखने के नियम को सख़्ती से लागू कराना चाहिए.
हम महीने बच्चोंके नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए भी इस टीम ने अपनी अपील की है.
इसके साथ ही इस टीम ने अगले छह महीने के भीतर बिहार के सभी स्कूलों का बुनियादी ढांचा दुरुस्त करने की अनुशंसा की है.
इस टीम ने कहा है कि मिड डे मील की जिम्मेदारियों से शिक्षकों को मुक्त कर इसके लिए सामुदायिक भागीदारी के साथ एक अलग व्यवस्था की जानी चाहिए.
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