बिहार: मिड डे मील खाने से बच्चे कर रहे हैं इनकार

बिहार के छपरा ज़िले में विषाक्त भोजन से 23 बच्चों की मौत के बाद कई ज़िलों में स्कूली बच्चे खाना खाने से इनकार कर रहे हैं.
राज्य में मध्याह्न भोजन योजना कार्यक्रम के निदेशक लक्ष्मणन ने बीबीसी को बताया, “हमारे पास सूचना आई है कि लगभग चार या पाँच जिलों के कुछ स्कूलों में बच्चों ने दोपहर का भोजन खाने से इनकार कर दिया है. हम इसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.”
मंगलवार को छपरा में मिड डे मील खाने से अब तक 23 बच्चों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है, जिससे न सिर्फ बच्चों के परिजनों, बल्कि क्षेत्र के आम लोगों में भी भारी रोष है.
बिहार के शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव अमरजीत सिन्हा ने बताया है, "ये मौतें खाने में ज़हर के चलते हुई हैं."
एक प्रेंस कांफ्रेस में उन्होंने कहा कि इस बारे में फॉरेन्सिक रिपोर्ट का इंतज़ार है.
बच्चों को दफ़नाया
उन्होंने बताया, "मध्याह्न भोजन योजना को लागू करने में इस स्कूल ने नियमों का उल्लंघन किया है. तेल के साथ कीटनाशक कहां से आया. नियम के मुताबिक़ खाना पहले रसोइया या हेडमास्टर को चखना होता है, तो बच्चों ने पहले खाना कैसे खा लिया."
विषाक्त भोजन खाने से जिन 23 बच्चों की मौत हुई थी उनमें से तीन बच्चों के परिवारों ने उन्हें स्कूल परिसर में ही दफ़ना दिया है.

सोलह बच्चों को या तो स्कूल की दीवार के पास या सड़क के दूसरी तरफ़ दफानाने की जगह ढ़ूंढी गई है.
पटना से स्थानीय पत्रकार अमरनाथ तिवारी का कहना है कि स्कूल परिसर में अंतिम संस्कार कर ये परिवार अपना विरोध दर्ज करवाना चाह रहे हैं.
मशरख ब्लॉक में हुई घटना को लेकर लोगों में बहुत रोष है.
गुस्साए लोगों ने छपरा में पुलिस और दूसरे वाहनों को आग लगा दी. कुछ लोगों ने सरकार के विरूद्ध नारे भी लगाए, जिन्हें पुलिस ने बाद में वहां से खदेड़ दिया.
जांच दल
राज्य सरकार ने मशरख ब्लॉक में हुई घटना की जांच के लिए एक दल का गठन किया है लेकिन इस बीच स्कूल की प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ पुलिस में मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है.
बिहार के शिक्षा मंत्री पीके साही ने बीबीसी से एक बातचीत में आरोप लगाया है कि 'ये ज़हर दिए जाने का मामला है. भोजन के विषाक्त हो जाने का नहीं.'
उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है लेकिन किसी भी तरह की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है.
वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकार जिस तरह से षड्यंत्र का आरोप लगा कर मामले को नया मोड़ देने की कोशिश कर रही है वो उससे दुखी हैं.
मानवधिकार आयोग
बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के मुताबिक़ पूरे मामले का राजनीति रंग पकड़ते देख लोगों का गुस्सा और बढ़ता जा रहा है.
बीबीसी संवाददाता के अनुसार लोग पहले से ही इस बात को लेकर नाराज़ हैं कि बीमार बच्चों को समय पर इलाज नहीं मिल पाया वरना उनमें से कइयों को बचाया जा सकता था.
इस बीच समाचार एजेंसी पीटीआई ने कहा है कि मानवाधिकार आयोग ने बिहार प्रशासन को इस मामले में नोटिस भेजा है.
आयोग ने बिहार शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और सारन ज़िला पुलिस अधीक्षक से कहा है कि वो इस मामले में चार सप्ताह के भीतर उसे जवाब दें.
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