'आडवाणी आदरणीय पर गठबंधन बना बोझ'

एनडीए को टूटने से बचाए रखने की <link type="page"><caption> बीजेपी की कोशिशों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130612_bihar_bjp_ap.shtml" platform="highweb"/></link> के बीच जेडीयू ने अभी <link type="page"><caption> दबाव</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130612_jdu_bjp_stand_ra.shtml" platform="highweb"/></link> बनाए रखा है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद गुरुवार को जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने भी कहा कि इस मामले में अंतिम फ़ैसला पार्टी की बैठक में किया जाएगा.
दिल्ली में पत्रकारों के प्रश्न का जवाब देते हुए शरद यादव ने कहा कि बैठक की तारीख़ गुरुवार शाम तक तय की जाएगी.
हालांकि शरद यादव ने माना कि <link type="page"><caption> परिस्थितियां बिगड़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130418_bihar_nitish_bjp_vr.shtml" platform="highweb"/></link> गई हैं और उन्हें सुधारने की कोशिश की जा रही है.
(<link type="page"><caption> जद-यू भाजपा के बीच फ़ोन लाइनें व्यस्त</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130613_bjp_jdu_mkt_ml.shtml" platform="highweb"/></link>)
उन्होंने यह मानने से इनकार कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की स्थिति पार्टी में कमज़ोर हुई है.
उन्होंने कहा कि उनके मन में आडवाणी के लिए वही आदर है जो पहले था.
'बोझ बना गठबंधन'
इससे पहले नीतीश कुमार ने पटना में गुरुवार सुबह कहा कि आडवाणी ने बीती रात उन्हें और जनता दल यूनाइटेड अध्यक्ष शरद यादव को फ़ोन किया था.
नीतीश ने कहा, "उन्होंने कुछ बातें कही हैं, जब हम चर्चा करेंगे तो इन बातों का संज्ञान लेंगे."
नीतीश कुमार ने बताया कि बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का फ़ोन भी उन्हें आया था.
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद शिवानन्द तिवारी ने बीबीसी को बताया कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद ने इस मुद्दे पर निर्णय के लिए शरद यादव और नीतीश कुमार को अधिकृत कर दिया है.
उनके अनुसार शुक्रवार, 14 जून को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव पटना आ जाएंगे और तब इसकी ज़रूरी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.
शिवानंद तिवारी ने कहा, ''ताल्लुक़ बोझ बन जाए तो उस को तोड़ देना ही अच्छा होता है. सत्रह साल पुराने इस गठबंधन को कुछ भाजपा नेताओं की कट्टर सोच ने बोझिल कर दिया था. इसलिए अपने बुनियादी उसूलों से समझौता करके गठबंधन क़ायम रखना अब हमारी पार्टी को मंज़ूर नहीं है.''
सरकार को ख़तरा नहीं
भाजपा से अलग होने की स्थिति में बिहार की मौजूदा नीतीश सरकार का स्वरूप बदलने जा रहा है, यानी भाजपा के बिना भी जेडीयू की सरकार यहाँ नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल सकती है.

कारण है कि 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में जद-यू के 118 सदस्य हैं. सरकार बनाने के लिए कम-से-कम 122 सदस्य चाहिए और जेडीयू ने चार सदस्यों की कमी निर्दलीय सदस्यों से पूरी कर लेने का दावा किया है.
ज़ाहिर है कि ऐसी सूरत में 91 विधायकों वाली भाजपा इस सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेगी और तब नीतीश सरकार को सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार 14 जून के बाद वाले अपने निर्धारित सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं. जून के तीसरे हफ्ते से बिहार की राजनीति का एक नया दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.
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