मोदी पर फैसले का कल तक इंतज़ार करें: भाजपा

आडवाणी
इमेज कैप्शन, आडवाणी आज गोवा में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ले सकते हैं हिस्सा

गोवा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को शुरू हो गईलेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गोवा नहीं पहुंचे. पार्टी नेता यशवंत सिन्हा भी गोवा नहीं आए. पत्रकारों से बात करते हुए य़शवंत सिन्हा ने कहा, "मुझे नमोनिया नहीं हुआ है और मैं बिल्कुल स्वस्थ हूँ."

वहीं भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर से जब पत्रकारों ने बार-बार पूछा कि क्या मोदी को नया रोल दिया जाएगा तो उन्होंने सवाल को टालते हुए कहा कि कल तक का इंतज़ार करें.

इससे पहले पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि आडवाणी की तबीयत ख़राब है और डॉक्टरों ने उन्हें कम से कम तीन-चार दिनों तक आराम करने की सलाह दी है.

जावड़ेकर ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आडवाणी से फ़ोन पर बात की है और उन्हें अपने स्वास्थ का ध्यान रखने की सलाह दी है.

इसका मतलब साफ़ है कि आडवाणी अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं होंगे.

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को भाजपा पदाधिकारियों की बैठक में भी आडवाणी शामिल नहीं हुए थे, तभी से ये चर्चा का विषय था कि आडवाणी शनिवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होंगे या नहीं.

हालांकि प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने शुक्रवार को कहा था कि है कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आडवाणी से बात की है और वह शनिवार को बैठक में हिस्सा लेंगे.

दो दिनों तक चलने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शनिवार को सुबह 11 बजे शुरू हुई. उसके बाद राजनाथ सिंह ने अपना अध्यक्षीय भाषण दिया.

शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में भी आडवाणी ख़राब स्वास्थ का हवाला देकर शामिल नहीं हुए थे.

लेकिन शायद ही कोई ऐसा हो जो ये मानने के लिए तैयार हो कि उनकी ग़ैरमौजूदगी की वजह सिर्फ़ उनका अस्वस्थ होना है.

1980 में भाजपा के गठन के बाद ये पहला मौक़ा है जब आडवाणी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं हो रहे.

उनके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह और उमा भारती भी शुक्रवार की बैठक में शामिल नहीं हुईं.

ये कहना ग़लत नहीं होगा कि नरेंद्र मोदी के मुद्दे पर इस समय भाजपा पूरी तरह से बंटी हुई है.

मोदी को 'कमान'

दर असल सारा मामला नरेंद्र मोदी को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कोई बड़ी ज़िम्मेदारी दिए जाने की है.

मोदी, आडवाणी
इमेज कैप्शन, ये भी एक विडंबना है कि 2002 के गोवा कार्यकारिणी में आडवाणी ने ही मोदी की मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाई थी.

मोदी चाहते हैं कि उन्हें भाजपा की तरफ़ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाए.

भाजपा के बहुत सारे कार्यकर्ता भी मोदी को बहुत पसंद करते हैं लेकिन पार्टी का एक बड़ा गुट नहीं चाहता कि मोदी को ये ज़िम्मेदारी दी जाए.

भाजपा पर नज़र रखने वालों का कहना है कि फ़िलहाल ये तय किया गया था कि मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तो नहीं लेकिन उन्हें चुनाव प्रचार समिति की कमान सौप दी जाए.

गोवा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नरेंद्र मोदीको ये ज़िम्मेदारी सौंपी जा सकती है. प्रचार समिति का प्रमुख बनाए जाने का मतलब साफ़ है कि वो 2014 चुनाव में भाजपा के चेहरे होंगे जो कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का सबसे बड़ा दावेदार होगा.

और यही बात आडवाणी और उनके कुछ क़रीबी नेताओं को पसंद नहीं.

ऐसा माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह मोदी को प्रचार समिति का प्रमुख बनाए जाने के पक्ष में हैं लेकिन वो चाहते हैं कि इस पर कोई भी फ़ैसला पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सहमति से हो.

नीतीश, मोदी
इमेज कैप्शन, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मोदी के कड़े विरोधी हैं.

लोकसभा में विपक्ष की नेता <link type="page"><caption> सुषमा स्वराज</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130124_bjp_sushma_rajnath_protest_vk.shtml" platform="highweb"/></link> भी शुक्रवार की बैठक में देर से पहुंची थीं. ऐसा माना जा रहा है कि वह भी मोदी की पदोन्नति से ज़्यादा खुश नहीं हैं.

मोदी के समर्थकों का मानना है कि मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में पेश करने से पार्टी को चुनाव में काफ़ी फ़ायदा होगा और पार्टी सत्ता के बहुत क़रीब पहुंच सकती है लेकिन आडवाणी और दिल्ली के कुछ दूसरे नेताओं की राय है कि मोदी का व्यक्तित्व ऐसा है कि उनके प्रति लोगों की राय पूरी तरह से बंटी हुई है.

अगर एक तरफ़ मोदी के प्रशंसक हैं तो दूसरी तरफ़ मतदाताओं का एक ऐसा गुट भी है जो मोदी को किसी भी हालत में पसंद नहीं करेगा.

आडवाणी ख़ेमे का सोचना है कि जैसे ही मोदी का नाम आधिकारिक रूप से पेश किया जाएगा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए एनडीए में बना रहना मुश्किल हो जाएगा. उसके अलावा मोदी के नाम पर एनडीए को नए साथी की तलाश में भी परेशानी होगी.

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