'फिर लौटा आंतक, हैदराबाद लहूलुहान'

हैदराबाद, बम धमाके
इमेज कैप्शन, दिल दहला देने वाले इस धमाके में 13 लोग मारे गए हैं जबकि 83 घायल हुए.

देश की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले <link type="page"> <caption> हैदराबाद शहर</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130222_hyderabad_update_pp.shtml" platform="highweb"/> </link> में हुए दोहरे बम धमाके की खबर सभी अखबारों की सुर्खियों में छाई हुई है. शहर के दिलसुखनगर इलाके में हुए इस बम धमाके में <link type="page"> <caption> 14 लोग मारे गए</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130221_blast_witness_sm.shtml" platform="highweb"/> </link> हैं जबकि 119 लोगों के घायल होने की सूचना है.

बम धमाके की खबर देते हुए हिंदी के प्रमुख अखबार दैनिक भाष्कर ने सुर्खी लगाई है,"सात माह बाद फिर लौटा आंतक, हैदराबाद लहूलुहान." अखबार लिखता है कि हैदराबाद गुरुवार शाम दो <link type="page"> <caption> शक्तिशाली धमाकों</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130221_hyderabad_dilsukh_blast_ms.shtml" platform="highweb"/> </link> से दहल उठा. घटना के बाद सरकार ने देश भर में एलर्ट जारी कर दिया है.

वहीं अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इडिया लिखता है,"टेरर रिटर्न्स, अगेन ऑन साइकिल." अखबार कहता है कि शहर के भीड़ भरे मध्य वर्गीय इलाके में हुई इस <link type="page"> <caption> घटना की जिम्मेदारी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/02/130221_hyderabad_blast_pix_ml.shtml" platform="highweb"/> </link> अभी तक किसी व्यक्ति या गुट ने नहीं ली है.

जबकि दैनिक जागरण लिखता है कि प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपए और राज्य सरकार ने छह लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है. आंध्र प्रदेश सरकार सभी घायलों का इलाज कराएगी.

पहले से थी खबर

हिंदी दैनिक जनसत्ता ने सुर्खी लगाई है,"साइकलों में रखे गए थे विस्फोटक, राजधानी समेत पूरे देश में सुरक्षा कड़ी."

हिंदी के प्रमुख दैनिक हिंदुस्तान ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के हवाले से लिखा है,"खुफिया एजेंसियों की तरफ से दो दिन पूर्व ऐसी सूचना मिली थी कि आंतकी किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं. सभी राज्यों से इस सूचना को साझा कर सतर्क रहने को कहा गया था."

अंग्रेजी अखबार दि हिंदू दिल्ली पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखता है कि पिछले साल एक चरमपंथी संगठन के गिरफ्तार किए गए दो संदिग्ध लोगों ने विशेष शाखा को बताया था कि जुलाई 2012 में ही हैदराबाद के इस विस्फोट स्थल की रेकी की गई थी.

हिंदी अखबार अमर उजाला लिखता है कि जिस वक्त धमाके हुए उस वक्त दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक चल रही थी.

वहीं हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है,"भारत के दुश्मनों ने हैदराबाद पर धावा बोला."

अखबार लिखता है हैदराबाद शहर के पूर्वी इलाके दिलसुख नगर में हुए धमाकों में शहर के प्रमुख कारोबारी और भीड़ भाड़ भरे इलाके को निशाना बनाया गया है.