बेटे को खोने की सच्चाई कौन कबूल करेगा....

धमाके के बाद लोग अस्पतालों में अपने परिजनों का हाल लेने के लिए परेशान हैं
इमेज कैप्शन, धमाके के बाद लोग अस्पतालों में अपने परिजनों का हाल लेने के लिए परेशान हैं

हैदराबाद में गुरुवार शाम हुए दो धमाकों के बाद शहर के उस्मानिया अस्पताल के शवदाह गृह के आस-पास मातम पसरा हुआ है. मृतकों के परिजन बुरी तरह से बिलख रहे हैं और माहौल बेहद गमगीन है.

अस्पताल में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी है जो अपने परिजनों का हाल जानने के लिए बेहाल नज़र आ रहे हैं.

हैदराबाद के शहरी इकबाल अहमद का 17 साल का बेटा एजाज़ हुसैन पढ़कर घर लौट रहा था और तभी धमाके की चपेट में आ गया. अपने बेटे को खोने की सच्चाई को इकबाल अहमद क़बूल नहीं कर पा रहे हैं और रो-रोकर उनका बुरा हाल है.

बिखर गए सपने

वहीं हरीश कार्तिक नाम के एक एमबीए के छात्र की बस से उतरते ही धमाके में मौत हो गई. हरीश कार्तिक बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और हैदराबाद एक इंटरव्यू के सिलसिले में आए थे.

उनके परिवार वालों का कहना है कि घटना से पांच मिनट पहले ही उन्होंने फोन किया था कि मैं पहुंच गया हूं, लेकिन क़िस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर था.

हैदराबाद के एक अन्य शहरी रफीउद्दीन की दिलसुखपुर इलाके में ही बैग की दुकान थी. धमाके में उनकी भी मौत हो गई है. बेटे की असमय मौत की ख़बर सुनकर दिल के मरीज उनके पिता के आंसू थम नहीं रहे.

सपना नाम की एक अन्य महिला अपने भाई सुधाकर रेड्डी के साथ लौट रही थीं. धमाके में उनकी भी मौत हो गई. रोते-बिलखते सुधाकर रेड्डी कहते हैं कि बहन के घर वालों को मैं क्या जवाब दूंगा.

धमाके

गुरुवार को देर शाम हैदराबाद के दिलसुख नगर इलाक़े में दो जगहों पर बम विस्फोट हुआ जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई है जबकि 119 लोग घायल हैं.

विस्फोट वहाँ एक बस स्टैंड और एक थियेटर के बाहर हुए हैं और अधिकारियों का कहना है कि बम साइकिल पर रखे गए थे. सरकार ने इसे 'आतंकी हमले' क़रार दिया है.

घायलों को पास के अस्पतालों में ले जाया गया है. विस्फोट शाम के समय हुआ है और उस व्यस्त इलाक़े में उस समय भीड़-भाड़ थी.