गुजरात दंगे: नरसंहार के मामले में 23 दोषी

इमेज स्रोत, AP
गुजरात की एक विशेष अदालत ने ओद नरसंहार के मामले में 23 लोगों को दोषी ठहराया है जबकि 23 लोगों को रिहा कर दिया गया है.
वर्ष 2002 में गुजरात दंगों के दौरान हुए इस नरसंहार के मामले में कुल 47 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था लेकिन एक व्यक्ति की मुक़दमे के दौरान मौत हो गई.
दंगों के दौरान कुल 23 लोगों ने ओद गाँव में एक घर में पनाह ली थी. इस जगह तो दंगाइयों ने घेर कर आग लगा दी थी.
दोषी लोगों को सज़ा बाद में सुनाई जाएगी.
महिलाओं-बच्चों को जला दिया था
अदालत में दिए गए विवरण के अनुसार आणंद ज़िले के ओद के पीरावली भागोल में दंगों के दौरान पहली मार्च को मुसलमानों के एक छोटे समूह ने एक घर में पनाह ली थी.
बताया गया है कि पनाह लेने वाले 23 लोगों में ज़्यादातर महिलाएँ और बच्चे थे.
कोई 2000 लोगों की एक भीड़ ने इस घर में आग लगा दी थी, जिससे इन सभी की मौत हो गई थी.
गुजरात के कई अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी गुजरात पुलिस की जाँच से असंतुष्ट होने के बाद पीड़ित परिवारों के अनुरोध पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा था.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जाँच का जिम्मा भी विशेष जाँच दल (एसआईटी) को सौंप दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने दंगों के दस मामलों की जाँच एसआईटी को सौंपी थी. ओद की घटना इनमें से एक है.
एसआईटी की जाँच के आधार पर विशेष अदालत में 47 लोगों के ख़िलाफ़ हत्या, षडयंत्र, दंगे, ग़ैरक़ानूनी ढंग से भीड़ जमा करने, हत्या के प्रयास और सबूत मिटाने के आरोप लगाए गए थे.
इनमें से एक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी.
इस मामले के अलावा ओद के ही एक और मामले की जाँच एसआईटी ने की है और इस दूसरे मामले में भी जल्द ही फैसला आने की संभावना है.












