करकरे की मौत पर सवाल

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि मालेगाँव बम घमाकों की जाँच कर रहे आतंकवादी निरोधी दस्ते (एटीएस) के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे ने उन्हें मुंबई हमलों के कुछ घंटे पहले फ़ोन पर कहा था कि 'वे लगातार मिलने वाली धमकियों से परेशान हैं'.
दिग्विजय सिंह के अनुसार हेमंत करकरे का कहना था कि उन्हें ये धमकियाँ उन लोगों से मिल रही हैं जो मालेगाँव धमाकों की जाँच का विरोध कर रहे हैं.
हेमंत करकरे अपने अन्य साथियों समेत मुंबई हमलों के दौरान मारे गए थे.कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि ये दिग्विजय सिंह की निजी राय है और पार्टी की नहीं.
मालेगाँव धमाकों की जाँच के दौरान ये सामने आया था कि इन धमाकों की योजना बनानेवाले और अंजाम देनेवाले लोगों का संबंध हिंदूत्व विचारधारा से जुड़ी संस्थाओं से था.
एटीएस ने इस सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें हिंदू धार्मिक गुरु साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, अभिनव भारत नाम का संगठन चलाने वाले समीर कुलकर्णी और भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी शामिल थे.
साक्षात्कार
सितंबर 2008 में महाराष्ट्र के मालेगाँव की एक मस्जिद के बाहर हुए धमाके में चार लोग मारे गए थे और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे.
मालेगाँव मामले में एटीएस की जाँच के बाद से भारत में हो रहे चरमपंथी हमलों के संबंध में एक नया पहलू सामने आया.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए साक्षात्कार में कही गई इन बातों को कांग्रेस महासचिव ने फिर से दोहराया है और कहा है कि हेमंत करकरे अपनी ईमानदारी और विश्वसनीयता पर उठाए गए सवालों को लेकर हतोत्साहित थे.
दिग्विजय सिंह ने कहा, "आपको याद होगा कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं नें हेमंत करकरे की ईमानदारी, विश्वसनीयता और निष्ठा पर कई सवाल उठाए थे."
उन्होंने कहा कि हेमंत करकरे को बार-बार गुमनाम फ़ोन के ज़रिए धमकी दी जा रही थी कि उन्होंने ये गिरफ्तारियाँ क्यों की हैं?
भाजपा ने दिग्विजय सिंह के इस बयान को घोटालों के आरोप झेल रही कांग्रेस सरकार द्वारा ध्यान बटाने की कोशिश बताया है.
पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि दिग्विजय सिंह का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है और उन्हें सुर्खियों में आने के लिए देश की सुरक्षा से ख़िलवाड़ नहीं करना चाहिए.












