'कोहिनूर जहाँ है वहीं रहेगा'

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कोहिनूर हीरे को भारत को लौटाए जाने की माँग को ख़ारिज कर दिया है.
कोहिनूर पिछले डेढ़ सौ वर्षों से ब्रिटेन के शाही रत्न भंडार में रखा हुआ है.
भारत की किसी खदान से निकले कोहिनूर हीरे को ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1849 में अपने कब्ज़े में लेने के बाद उसे उपहार के तौर पर महारानी विक्टोरिया को दे दिया था .
भारतीय राजनेता लंबे समय से 105 कैरेट के इस हीरे को वापस किए जाने की माँग करते रहे हैं.
महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने पिछले साल कहा था कि ब्रिटेन को अपने औपनिवेशिक अतीत के पश्चाताप के तौर पर कोहिनूर को लौटा देना चाहिए.
इस समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री के भारत दौरे के दौरान लेबर पार्टी के भारतीय मूल के एक सांसद कीथ वाज़ ने भी कोहिनूर की वापसी की माँग उठाई.
लेकिन कैमरन ने ऐसी किसी वापसी को अव्यावहारिक बताते हुए कह दिया है कि कोहिनूर जहाँ है वहीं रहेगा.
डेविड कैमरन ने भारतीय टीवी चैनल एनडीटीवी से एक बातचीत में इस बारे में अपनी राय स्पष्ट कर दी,”अगर आपने एक बात के लिए हाँ कह दिया तो आप पाएँगे कि ब्रिटिश म्यूज़िय़म ही ख़ाली हो गया, मुझे आपके दर्शकों को निराश करते हुए ये कहना होगा कि ये जहाँ है, वहीं रहेगा."
कोहिनूर हीरे को अंतिम बार महारानी एलिज़बेथ की माँ – क्वीन मदर – ने पहना था.
2002 में क्वीन मदर का देहांत होने के बाद कोहिनूर को उनके ताज़ के साथ उनके ताबूत पर रखा गया था.
शाही रत्नों की विशेषज्ञ इतिहासकार डॉक्टर ऐना का कहना है कि 18वीं शताब्दी के मध्य से पहले मिले सभी हीरों का संबंध भारत से ही है क्योंकि उस समय हीरे की खुदाई और कहीं नहीं होती थी.
उन्होंने साथ ही बीबीसी को बताया कि कोहिनूर कई लोगों के हाथों में आता-जाता रहा जिनमें ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और भारतीय शासक भी रहे.
डॉक्टर ऐना की ने कहा,"कोहिनूर 16वीं शताब्दी के आरंभ से ही विभिन्न लोगों के हाथों में जाता रहा जब कई शासकों ने इसे अपने पास रखा.
"सवाल ये है कि समय के किस मुक़ाम से इसकी वापसी की बात हो."
उन्होंने भारत से इसके ऐतिहासिक जुड़ाव के आधार पर इसे भारत को वापस किए जाने के सुझाव को बहुत समझदारी वाली बात मानने से असमर्थता जताई.
उन्होंने कहा,"या तो आप ये बात मान लें कि जो चीज़ जहाँ से निकली है, उसे वहीं होनी चाहिए, या फिर आप ये मान लें कि समय और परिस्थितियों के अनुसार चीज़ों का आदान-प्रदान होता रहता है जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान है.
"और इस आधार पर इस तर्क को बिल्कुल अकाट्य मान लेना मुश्किल है कि कोहिनूर को भारत लौटा दिया जाए जहाँ कि वो 1730 के बाद से कभी रहा ही नहीं."
इस तरह के अन्य दूसरे विवादों में ग्रीस से जुड़ी एक धरोहर का विवाद शामिल है जो एल्गिन संगमरमरों को लौटाने की माँग कर रहा है.
अंग्रेज़ों ने कोई दो सौ साल पहले पार्थेनॉन से लूटी गई इस धरोहर को अर्ल ऑफ़ एल्गिन को सौंप दिया था.












