बागेश्वर बाबा पर बिहार में क्यों तेज़ हुई राजनीति

- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
बिहार की राजधानी पटना के नौबतपुर इलाक़े में आजकल मेले जैसा माहौल है. बागेश्वर बाबा के नाम से मशहूर पंडित धीरेंद्र शास्त्री इसी नौबतपुर में 13 मई से 17 मई तक दरबार लगाने वाले हैं. इस दौरान यहां पांच दिनों तक उनका हनुमंत पाठ भी होगा.
पिछले कुछ समय से अचानक चर्चा में आए मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम मंदिर के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की यह पहली बिहार यात्रा है.
लोगों से बात करने पर पता चलता है कि सोशल मीडिया पर प्रचार की वजह से बिहार में भी बड़ी संख्या में लोग बागेश्वर बाबा के नाम से परिचित हैं.
पटना के दक्षिण-पश्चिम में बसा नौबतपुर, साल 1947 में स्थापित हुए राघवेंद्र संस्कृत विद्यालय की वजह से ही जाना जाता रहा है.
यहां वेद, ज्योतिष, व्याकरण और कर्मकांड की शिक्षा के लिए दूसरे शहरों और राज्यों के छात्र पहुंचते हैं.
लाखों लोगों के जुटने का दावा
ऐसा पहली बार है कि नौबतपुर में किसी बाबा का इस तरह का कार्यक्रम होने जा रहा है. बागेश्वर बाबा के समर्थकों का दावा है कि यहां पांच दिनों तक लगातार ढाई से तीन लाख लोग जुट सकते हैं.
इनमें बिहार के अलावा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड जैसे राज्यों के लोग होंगे.
बागेश्वर बाबा के कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे 'बागेश्वर बिहार फ़ाउंडेशन' का दावा है कि इसमें पड़ोसी देश नेपाल के भी क़रीब पचास हज़ार श्रद्धालु आ सकते हैं.
लोगों की इसी भीड़ की उम्मीद में छोटे-बड़े हिन्दू संगठन और नेताओं के बैनर और होर्डिंग यहां आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत और अपने प्रचार में नज़र आ रहे हैं.
इसी भीड़ के अनुमान से बिहार की सियासत में बागेश्वर बाबा आजकल चर्चा का विषय बने हुए हैं.
बीजेपी बागेश्वर बाबा के स्वागत में खड़ी है. जबकि सांप्रदायिकता और अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाकर कई पार्टियों के नेता उनका विरोध कर रहें हैं.
नौबतपुर में तैयारियां

नौबतपुर में मौजूद राघवेंद्र मंदिर के परिसर में दूसरे शहरों से कई लोग पहुंचे हुए हैं. हमें बताया गया कि बागेश्वर बाबा इसी मंदिर में रुकेंगे और इसके लिए मंदिर में रंग रोग़न और मरम्मत का काम चल रहा है.
इस मंदिर में हमारी मुलाक़ात अनीता देवी से हुई, जो बिहार के पूर्णिया और नेपाल के अपने रिश्तेदारों के साथ यहां आई हैं. अनीता देवी बागेश्वर बाबा से चमत्कार की उम्मीद में यहां आई हैं.
वे कहती हैं, "मैं यू-ट्यूब देखकर यहां पहुंची हूं. मैं उनको बहुत दिन से देखती हूं. मेरे नाती की तबीयत ख़राब रहती है. बड़े-बड़े शहरों में 5-7 लाख रुपये ख़र्च हो गए. अब बाबा से ही उम्मीद है, वो हमारे भगवान हैं. वो हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात भी करते हैं."
यही हाल रानी देवी का है जो गोपालगंज ज़िले से आई हैं. उनके साथ परिवार के और भी सदस्य हैं.
मुझे यू-ट्यूब से पता चला कि बाबा यहां आ रहे हैं. हम लोग यू-ट्यूब पर उनको सुनते रहते हैं. उनके बारे में सब जानते हैं. वो तो भगवान हैं.
दरअसल बागेश्वर बाबा पर इस तरह के अंधविश्वास फैलाने का आरोप भी लगता है कि वो कई तरह के चमत्कार और ईश्वर का अवतार होने जैसे दावे करते हैं.
स्थानीय निवासी अमरेंद्र कुमार शर्मा कहते हैं, "यह हिन्दू बहुल इलाक़ा है. आसपास के गांवों में बागेश्वर बाबा का बड़ा समर्थन है. उनके समर्थकों ने यहां बड़ी तैयारी की है."

भक्तों का दावा
क़रीब 50 लोग पंडाल बनाने में लगे थे. कार्यक्रम की तैयारी में जुटे बागेश्वर बाबा के अनुयायी मनीष शर्मा ने हमें बताया कि यहां तीन लाख वर्ग फ़ुट का मुख्य पंडाल बनाया जा रहा है.
इसके अलावा बाबा के लिए मंच और महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है.
मनीष शर्मा के मुताबिक़, "यहां बाबा का दिव्य दरबार 15 मई को लगेगा और उस दिन क़रीब 10 लाख लोग आ सकते हैं."
कुछ लोगों में इस बात को लेकर बहस हो रही थी कि कार्यक्रम में जो लोग गाड़ियों से पहुंचेंगे, उनसे पार्किंग का शुल्क लिया जाए या नहीं.
यहां एक ठेले पर ककड़ी बेचने वाले धर्मेंद्र ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से यहां भीड़ दिखी तो उन्होंने दुकान खोल ली. उनके मुताबिक़ यहां अगले कुछ दिनों में बहुत सारे लोग आ सकते हैं.
नौबतपुर में जिस ज़मीन पर बागेश्वर बाबा के कार्यक्रम की तैयारी चल रही है, वह राघवेंद्र मंदिर की ज़मीन है. इसी मंदिर से जुड़े संस्कृत कॉलेज के प्रभारी श्रीमन नारायण ने हमें बताया कि लोगों ने कार्यक्रम के लिए ज़मीन मांगी थी.

विवाद
बागेश्वर बाबा कभी धर्म पर, कभी राजनीति पर तो कभी फ़िल्मों पर भी बयान देते हैं. इसलिए उनकी बिहार यात्रा को लेकर राज्य में राजनीति भी गर्म है और इसपर लगातार बयानबाज़ी चल रही है.
बागेश्वर बाबा कभी 'हिन्दू राष्ट्र' की वकालत करते नज़र आते हैं तो कभी ख़ुद के भगवान के अवतार होने का दावा करते हैं.
उनकी राजनीतिक बयानबाज़ी भी बीजेपी जैसी पार्टी को रास आती है.
बागेश्वर बाबा मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले के गढ़ा गांव के बागेश्वर धाम के पुजारी हैं. पिछले साल नागपुर में एक कार्यक्रम में अंधविश्वास फैलाने के आरोप में पहली बार बागेश्वर बाबा का नाम सुर्ख़ियों में आया था.
बागेश्वर बाबा अब बड़े-बड़े नेताओं के साथ नज़र आते हैं. हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ भी उन्होंने अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की है.
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वहीं बागेश्वर बाबा के साथ जुड़े कई विवादों की ख़बरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं.
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एक तरफ़ जहां बिहार बीजेपी बागेश्वर बाबा के समर्थन में खड़ी है, वहीं सत्ताधारी राष्ट्रीय जनता दल के नेता उनका विरोध कर रहे हैं.
इस मुद्दे पर पहला विवाद तब शुरू हुआ, जब पिछले हफ़्ते बागेश्वर बाबा की पटना यात्रा पर आरजेडी नेता और बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव ने बयान दिया.

तेज प्रताप यादव ने बागेश्वर बाबा को देशद्रोही क़रार देते हुए कहा कि वो हिन्दू और मुसलमान को आपस में लड़वा रहे हैं.
बागेश्वर बाबा को लेकर चल रहे विवादों पर मनीष शर्मा का कहना है, "जिन लोगों को कोई महत्व नहीं देता है वही चर्चा में रहने के लिए ऐसे विवाद या विरोध करते हैं. आप देखेंगे कि उनके (तेज प्रताप यादव) पिताजी ख़ुद यहां आ सकते हैं."
तेज प्रताप के बयान के बाद बिहार में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के कई नेता बागेश्वर बाबा के समर्थन में कूद गए हैं. सोशल मीडिया पर इस तरह के भी कई पोस्टर वायरल किए जा रहे हैं जिसमें लिखा है, 'रोक सको तो रोक लो'.
ऐसा ही बयान केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने भी दिया है. गिरिराज सिंह ने भी बिहार सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि बिहार सरकार में ताक़त है तो रोककर दिखाए.
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हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने इस मुद्दे से ख़ुद को किनारे रखा है.
जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं, "कोई बाबा कार्यक्रम करने आते हैं तो आएं और कार्यक्रम करके जाएं. इसका राजनीतिक संदर्भ कुछ भी नहीं है."
नीरज कुमार का कहना है कि अगर बागेश्वर बाबा कोई विवादास्पद राजनीतिक और धार्मिक बयान देते हैं तो हम उसपर अपनी प्रतिक्रिया देंगे.

इमेज स्रोत, FB/BAGESHWARDHAMSARKAROFFICIA
सियासी ललकार
वरिष्ठ पत्रकार नचिकेता नारायण का मानना है कि बागेश्वर बाबा हिन्दू राष्ट्र जैसी बात करते हैं, इसलिए स्वाभाविक तौर पर बीजेपी को वो ख़ुद के ज़्यादा क़रीब दिखते हैं.
नचिकेता नारायण कहते हैं, "बिहार में बागेश्वर बाबा पर चल रही राजनीति पर किसी गंभीर नेता ने कोई बयान नहीं दिया है. मेरा मानना है कि तेज प्रताप यादव भी जो कुछ कह रहे हैं, अंतिम समय में बिहार सरकार उनको भी मना लेगी और शायद ही इसपर कोई बहुत बड़ा विवाद हो."
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद आरके सिंह की बात करें तो नचिकेता नारायण की बात सही दिखती है. बागेश्वर बाबा पर सवाल करने पर आरके सिंह ने तो बागेश्वर बाबा को पहचानने से ही इनकार कर दिया है.
बिहार दौरे पर आए आरके सिंह ने कहा, "ये सब कोई पूछने की बात है. बागेश्वर बाबा को कभी हमने देखा ही नहीं है. क्या हैं वो हम नहीं जानते. ये कौन हैं बाबा बागेश्वर?"
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हालांकि छतरपुर में बागेश्वर बाबा के परिवार को क़रीब से जानने वाले स्थानीय पत्रकार अरविंद तिवारी कहते हैं, "अगर कोई यह सोचता है कि बागेश्वर बाबा उसके क़रीबी हैं तो वह ग़लत है. बागेश्वर बाबा उसी के हैं जिसकी सत्ता है."
बिहार में एलजेपी नेता चिराग़ पासवान कहते हैं, "यह व्यक्तिगत विश्वास की चीज़ है. सबकी अपनी-अपनी आस्था होती है. सरकार का काम किसी की व्यक्तिगत आस्था पर टिप्पणी करना नहीं हैं, सरकार का काम लोगों की ज़रूरतें पूरी करना है."
पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव ने भी बागेश्वर बाबा पर गंभीर आरोप लगाए हैं और मीडिया से बातचीत में कहा है कि बागेश्वर बाबा अंधविश्वास फैलाते हैं और वह सनातनी हिन्दू को कलंकित कर रहे हैं.
वहीं बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने तो बागेश्वर बाबा की तुलना आसाराम बापू और राम रहीम जैसे बाबाओं से कर दी है.
आसाराम बाबू का क्या हुआ, राम रहीम का क्या हुआ. मैं कोई जांच अधिकारी नहीं हूं जो बता सकूं कि उनके आश्रम में क्या होता है. ये लोग छद्म लोग हैं, धर्म के नाम पर अपनी दुकान चलाते हैं.
बिहार में विकासशील इंसान पार्टी यानी वीआईपी ने भी बागेश्वर बाबा से बड़ी उम्मीदें की हैं और एक तरह का दबाव भी बनाने की कोशिश की है. वीआईपी नेता मुकेश सहनी का कहना है कि बागेश्वर बाबा को बिहार आने से कोई नहीं रोक रहा है.
मुकेश सहनी का कहना है, "सुना है बागेश्वर बाबा के पास दिव्यशक्ति है. इससे बिहार में कुछ चमत्कार हो सकता है. बिहार की जनता का कल्याण हो सकता है. बाबा से यही आग्रह है कि बिहार के युवा बेरोज़गारों की नौकरी कैसे हो."

बागेश्वर बाबा किसके साथ
धीरेंद्र शास्त्री उर्फ़ बागेश्वर बाबा पिछले साल नागपुर में एक विवाद के बाद चर्चा में आए थे. उनपर वहां अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगा था. बागेश्वर बाबा दावा करते हैं कि वो जो कहते हैं असल में वो बालाजी (हिन्दू देवता हनुमान) कहते हैं.
छतरपुर के पत्रकार अरविंद तिवारी बताते हैं, "हमने देखा है कि बागेश्वर धाम में एक पेड़ और एक मूर्ति के अलावा कुछ नहीं था. वो काफ़ी ग़रीब थे. फिर अचानक साल 2016 में बागेश्वर बाबा कहीं चले गए और साल 2019 में वापस आकर दावा किया कि वो छत्तीसगढ़ के जंगलों में सिद्धि हासिल करने गए थे."
अरविंद तिवारी के मुताबिक़ बागेश्वर बाबा दरअसल लोगों के दिमाग़ को पढ़ते हैं और उनके बारे में बताते हैं, लेकिन एक बात सच है कि बागेश्वर बाबा ने कभी किसी से पैसे मांगे नहीं, उनको लोगों ने जो दिया, ख़ुद दिया.
अरविंद तिवारी दावा करते हैं कि साल 2020 के बाद बागेश्वर बाबा की कई बातें लोगों को सच लगीं और उनके धाम में भक्तों की भीड़ धीरे-धीरे बढ़ती चली गई.
तिवारी के अनुसार इसका फ़ायदा लेने के लिए सबसे पहले कांग्रेस के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ उनके पास पहुंचे थे.
अरविंद कहते हैं कि उसके बाद शिवराज सिंह चौहान समेत कई नेता बागेश्वर बाबा के दरबार में आते रहे हैं. इस तरह से मीडिया और राजनीति ने बागेश्वर बाबा को मशहूर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
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