आनंद मोहन: बाहुबली की रिहाई के आदेश पर विपक्ष ने नीतीश को घेरा

जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह के साथ आनंद मोहन

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बिहार के सांसद रहे बाहुबली नेता और आईएएस जी कृष्णैया हत्याकांड के दोषी आनंद मोहन सिंह की संभावित रिहाई को लेकर बिहार सरकार की काफ़ी आलोचना हो रही है.

क़ानून में बदलाव कर आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ़ किए जाने को लेकर बीजेपी ने नीतीश कुमार की सरकार को घेरा है.

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए नीतीश कुमार ने क़ानून में बदलाव किया है.

समाचार एजेंसी एएनआई से उन्होंने कहा, "2016 में आपने (सीएम नीतीश कुमार) क़ानून बदला और इसमें प्रावधान जोड़ा कि सरकारी अधिकारी की हत्या करने में दोषी पाए जाने वालों को कभी भी माफ़ी नहीं दी जाएगी. अब आपने अपने फ़ायदे के लिए फिर से क़ानून बदला ताकि आप चुनाव जीत सकें."

उन्होंने कहा कि 'राजद के साथ मिलकर नीतीश कुमार सरकार चला रहे हैं. उन्हें लग रहा है कि उनकी बदौलत वे देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे. इसीलिए वो तेजस्वी यादव को साथ साथ लेकर घूम रहे हैं. राष्ट्रीय जनता दल में अपराधी भरे हुए हैं. उन्हें संरक्षण देने का काम नीतीश कुमार कर रहे हैं.'

बिहार सरकार की ओर से जेल नियमों में संशोधन के बाद आनंद मोहन समेत 27 क़ैदियों के रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है.

यूपी बीजेपी प्रभारी राधा मोहन सिंह (बाएं) के साथ आनंद मोहन

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मायावती ने क्यों कहा-'फ़ैसले पर पुनर्विचार हो'

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने नीतीश सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की है और इस पर 'पुनर्विचार' करने को कहा है.

मायावती ने ट्वीट किया है, "आनन्द मोहन बिहार में कई सरकारों की मजबूरी रहे हैं, लेकिन गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की हत्या मामले को लेकर नीतीश सरकार का यह दलित विरोधी व अपराध समर्थक कार्य से देश भर के दलित समाज में काफी रोष है. चाहे कुछ मजबूरी हो किन्तु बिहार सरकार इस पर जरूर पुनर्विचार करे."

मायावती का ट्वीट

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इस समय आनंद मोहन अपने बेटे की शादी के लिए जेल से 15 दिनों के पैरोल पर बाहर हैं.

विवाह समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी शामिल हुए.

इससे ठीक पहले ही बिहार सरकार ने 27 कैदियों की रिहाई के लिए क़ानून में बदलाव की अधिसूचना जारी की थी.

अपने घर पर इकट्ठा पत्रकारों से आनंद मोहन ने कहा कि 'बुधवार को वो जेल वापस चले जाएंगे और रिहाई का आदेश मिलेगा तो वो पत्रकारों को बुलाएंगे.'

आनंद मोहन

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जब मायावती के बयान पर आनंद मोहन की प्रतिक्रिया पूछी गई तो उन्होंने कहा कि वो मायावती को नहीं जानते, ''कौन मायावती, हम किसी मायावती को नहीं जानते.''

जी कृष्णैया हत्याकांड के मामले में आनंद मोहन ने कहा, ''मेरी उनके परिवार से पूरी सहानुभूति है. इसने दो परिवारों को बर्बाद कर दिया. एक लवली आनंद के परिवार को दूसरा उमा कृष्णैया के परिवार को.''

जी कृष्णैया की पत्नी ने जताई नाराज़गी

हैदारबाद में मौजूद जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने कहा कि अपने फ़ायदे के लिए किया गया बिहार सरकार का ये फ़ैसला सही नहीं है.

उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार ने ये ग़लत उदाहरण पेश किया है. आनंद मोहन को ताउम्र जेल में रहना चाहिए. इस फ़ैसले से अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे."

डीएम जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने कहा कि बिहार सरकार के फैसले उन्हें दुख पहुंचा है.

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उमा कृष्णैया ने कहा कि उनके साथ 'नाइंसाफ़ी' हुई है, पहले आनंद मोहन को मौत की सज़ा हुई थी फिर उसे बदल कर आजीवन कारावास किया गया और अब उन्हें छोड़ा जा रहा है. ये सब चुनाव के लिए किया गया है ताकि राजपूत समुदाय का वोट मिल सके.

जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह क्या बोले?

सोमवार को जेडीयू के अध्यक्ष ललन सिंह आनंद मोहन के साथ गाड़ी में बैठे दिखे थे. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य है 2024 में बीजेपी को हराना.

आनंद मोहन की रिहाई को लेकर बीजेपी के हमलों का जवाब देते हुए उन्होंने ट्वीट किया, "आनंद मोहन की रिहाई पर अब भाजपा खुलकर आई है, पहले तो यूपी की अपनी बी टीम से विरोध करवा रही थी."

उन्होंने लिखा, "आनंद मोहन ने अपनी पूरी सज़ा काट ली है और उन्हें वही छूट दी जा रही है जो किसी सज़ायाफ़्ता को मिलती है. आनंद मोहन को वो छूट नहीं मिल पा रही थी क्योंकि ख़ास लोगों के लिए नियम में प्रावधान किया गया था."

जीतन राम मांझी

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आनंद मोहन के लिए क़ानून में बदलाव को लेकर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस क़ानून के बदलाव का क्या असर होता है ये भविष्य में पता चलेगा.

हालांकि उन्होंने कहा कि वो आनंद मोहन को 'अच्छा व्यक्ति' मानते हैं और उन्होंने कई किताबें लिखी हैं.

उन्होंने कहा, "आनंद मोहन के छूट जाने से ग़रीबों का सर्वनाश होगा, उनपर अत्याचार होगा, ऐसा मैं नहीं मानता हूं."

चेतन आनंद ने अमित मालवीय को दिया जवाब

आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट पर बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय के पोस्ट का स्क्रीन शॉट लगाते हुए लिखा है, "पापा की रिहाई एक ही पार्टी ने रोकी थी और आज वह खुल कर उनकी रिहाई का विरोध कर रही है! जब तक वह सरकार में थी पापा का निकलने का रास्ता थामे बैठी थी! मालवीय जी के बयान ने सब साफ़ कर दिया."

नीतीश सरकार के फ़ैसले के तुरंत बाद अमित मालवीय ने ट्वीट करते हुए लिखा था, "आरजेडी की कुटिल चालबाज़ियों के सामने झुकने के लिए नीतीश कुमार को शर्म आनी चाहिए."

उन्होंने लिखा, "बिहार सरकार ने बिहार प्रिज़न मैनुअल 2012 में बदलाव करके एक सरकारी सेवक की ऑन ड्यूटी हत्या करने वाले को कैदी की श्रेणी से चुपचाप निकाल दिया और बाहुबली राजद नेता आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ़ कर दिया. "

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आनंद मोहन की रिहाई का मामला जैसे जैसे तूल पकड़ रहा है सोशल मीडिया पर भी लोग टिप्पणी कर रहे हैं.

एक ट्विटर यूज़ ज्ञानेश्वर ने लिखा है, "आनंद मोहन की रिहाई का विरोध बीजेपी वाले भी नहीं कर रहे. सवाल लोकसभा चुनाव 2024 का है. बीजेपी ने खुद गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले 11 क़ातिलों की सज़ा माफ़ की थी. यूपी में सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने भी मुकदमे बंद कराए थे."

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एक अन्य यूज़र ने सुशील मोदी की आनंद मोहन के साथ फोटो साझा करते हुए पूछा, "सुशील मोदी जी सबसे पहले आपको आनंद मोहन के साथ अपने रिश्ते के बारे में सफाई देनी चाहिए."

एक अन्य यूज़र ब्रिजेश शेलादिया ने लिखा है, "केवल आनंद मोहन ही नहीं, टोटल 27 अपराधियों को छोड़ रही है बिहार सरकार."

यूपी बीजेपी प्रभारी राधा मोहन सिंह (बाएं) के साथ आनंद मोहन

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कौन हैं आनंद मोहन?

1994 में आनंद मोहन बिहार पीपुल्स पार्टी के प्रमुख हुआ करते थे. उन पर भीड़ के साथ मिलकर पांच दिसंबर 1994 को गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैय्या की हत्या का आरोप लगा था.

इसी आरोप में वो फ़िलहाल सहरसा जेल में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं. आनंद मोहन ख़ुद शिवहर से सांसद रहे हैं.

उनकी पत्नी लवली आनंद भी सांसद रही हैं, जबकि उनके बेटे चेतन आनंद फ़िलहाल शिवहर से आरजेडी के विधायक हैं.

बेटी की सगाई के मौक़े पर भी आनंद मोहन पैरोल पर जेल से बाहर आए थे.

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