सत्यपाल मलिक ने क्यों कहा, गिरफ़्तारी का डर नहीं, लड़ने को तैयार हूं - प्रेस रिव्यू

सत्यपाल मलिक

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जम्मू-कश्मीर में कथित इंश्योरेंस घोटाले के संबंध में सीबीआई की ओर से बुलाए जाने की सूचना के एक दिन बाद पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक अपने समर्थकों के साथ शनिवार को दिल्ली के आरके पुरम पुलिस थाने पहुंच गए.

'द हिंदू' की ख़बर के मुताबिक़ मलिक अपने समर्थकों को पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद थाने पहुंचे थे. उनके समर्थक दिल्ली के सोम विहार स्थित उनके घर के सामने पार्क में जमा थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें ये जगह खाली करने को कहा था.

सीबीआई ने मलिक को 28 अप्रैल को बुलाया है. इस ख़बर के बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के किसान और खाप नेता मलिक के घर पर उनका समर्थन करने के लिए पहुंचने लगे हैं.

मलिक ने 'द वायर' के वरिष्ठ पत्रकार करण थापर को दिए इंटरव्यू में मोदी सरकार पर आरोप लगाए थे. इसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है.

विपक्षी नेताओं के हमले के बाद ही सीबीआई ने उन्हें कथित इंश्योरेंस घोटाले के सिलसिले में पूछताछ के लिए आने को कहा था.

'द हिंदू' की ख़बर के मुताबिक़ मलिक ने रिपोर्टरों से कहा कि अलग-अलग खाप के नेता उनके प्रति समर्थन जताने आए थे.

इन नेताओं के लिए भोजन की व्यवस्था थी लेकिन उनके घर में इतनी जगह नहीं थी. लिहाजा सभी लोग सामने के पार्क में पहुंच गए. खाना यहीं परोसा जाना था.

अख़बार लिखता है कि मलिक के मुताबिक़ उसी वक़्त पुलिसवालों ने आकर कहा कि यहां मीटिंग नहीं की जा सकती. इसके बाद बगैर किसी नारे और भाषण के आयोजन खत्म हो गया.

सत्यपाल मलिक मर्जी से थाने आए थे या गिरफ़्तार किया गया था?

अख़बार की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ समर्थकों का कहना था कि मलिक को थाने में हिरासत में ले लिया गया था लेकिन पुलिस ने कहा कि पूर्व राज्यपाल अपनी मर्जी से यहां आए थे.

दिल्ली पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि मलिक के बारे में झूठी ख़बरें फैलाई जा रही है. उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया है.

स्पेशल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) सागर प्रीत हुडा ने कहा कि पुलिस ने आयोजकों और समर्थकों से पार्क से जाने को कहा था लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया. इसके बाद कम से कम 24 लोगों को हिरासत में लिया गया. हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया.

इसके बाद लगभग दोपहर साढ़े बारह बजे मलिक अपने 20 समर्थकों के साथ आरके पुरम पुलिस थाने आए और वहां दो घंटे तक रहे.

थाने से बाहर आने के बाद मलिक ने कहा, "मौजूदा सरकार के तहत कुछ भी हो सकता है. मुझे गिरफ़्तारी का डर नहीं है. मैं लड़ने के लिए तैयार हूं.''

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इमेज कैप्शन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ सत्यपाल मलिक (फाइल फोटो)

इंडियन आर्मी में कर्नल पद पर चयन के लिए जेंडर न्यूट्रल बोर्ड

भारतीय सेना ने कर्नल पद के लिए प्रमोशन के लिए जेंडर न्यूट्रल पॉलिसी अपनाने का फैसला किया है.

'हिन्दुस्तान टाइम्स' की ख़बर में कहा गया है कि नया नियम 2024-25 से लागू हो जाएगा.

अख़बार ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा है कि सेना में लैंगिक समानता के मद्देनजर ये फैसला किया गया है.

अख़बार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2009 बैच के अफसरों के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल से लेकर कर्नल पद के प्रमोशन के लिए जेंडर न्यूट्रल सेलेक्शन बोर्ड बनेगा.

अख़बार ने लिखा है कि ये फैसला ऐसे समय में आया है जब सेना 108 महिला अफसरों को सेलेक्ट ग्रेड कर्नल बनाने और उन्हें चुनिंदा ब्रांच में कमान असाइनमेंट देने के लिए एक स्पेशल सेलेक्शन बोर्ड का संचालन कर रही है. सेना में ऐसा पहली बार हो रहा है.

एक दूसरे अफसर के हवाले से अख़बार लिखता है कि 2024-25 से एक समान सेलेक्शन बोर्ड होने से एक ही वैकेंसी के लिए महिला और पुरुष अफसर प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे.

अख़बार ने लिखा है कि महिला अफसरों को ब्रिगेडियर के पद के लिए भी पुरुषों के बराबर ही वरीयता मिलेगी. उन्हें उनकी योग्यता और तुलनात्मक प्रोफाइल के मुताबिक़ ही ग्रेड मिलेगी.

सेना की एक पूर्व अफसर शालिनी सिंह ने अख़बार से कहा कि महिलाओं के प्रमोशन के लिए जेंडर न्यूट्रल सेलेक्शन बोर्ड बनाना एक प्रगतिशील कदम है. सेना में अब महिला और पुरुष बराबर होंगे.

भारतीय सेना

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गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आएंगे चीन के रक्षा मंत्री

चीन के रक्षा मंत्री ली शांगफू और रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने की पुष्टि कर दी है.

चीन के रक्षा मंत्री गलवान घाटी में हुई भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प के बाद पहली बार भारत आ रहे हैं.

'इंडियन एक्सप्रेस' की ख़बर में कहा गया है कि एससीओ के रक्षा मंत्री की बैठक भारत में 27 और 28 अप्रैल को होगी. एससीओ में भारत, रूस, चीन, किर्गिस रिपब्लिक, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और पाकिस्तान शामिल हैं.

भारत के रक्षा मंत्री इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. इसमें आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा हो सकती है.

भारत ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को बैठक के लिए बुलाया था लेकिन अभी तक उनके आने की पुष्टि नहीं हुई है.

एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद होगी. इसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने शामिल होने की भी पुष्टि की है.

अख़बार लिखता है कि जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में हुए चरमपंथी हमले की जांच में अगर पाकिस्तान स्थित चरमपंथी समूहों के शामिल होने के संकेत मिलते हैं तो इस बैठक पर इसकी छाया पड़ सकती है.

ये पहली बार है जब 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प के बाद चीन के रक्षा मंत्री भारत का दौरा करेंगे.

अख़बार लिखता है कि चीन और पाकिस्तान से भारत के रिश्ते पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं. एससीओ बैठक इन देशों के नेताओं को आपस में मिलने का मौका देगी. इस तरह की बैठकों से पड़ोसी देशों को जटिल मुद्दे सुलझाने में आसानी होती है.

चीन

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सिद्धारमैया के बयान से गरमाई कर्नाटक की राजनीति, बीजेपी ने कहा- लिंगायतों का अपमान

''अमर उजाला'' ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जोर पकड़ चुके प्रचार पर ख़बर दी है. अख़बार लिखता है कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर है. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक ऐसा बयान दिया है, जिससे कर्नाटक की राजनीति गरमा गई है.

दरअसल सिद्धारमैया ने लिंगायतों को लेकर ऐसा कुछ कहा है, जिस पर विवाद हो गया है. भाजपा ने इसे पूरे लिंगायत समुदाय से जोड़ दिया है और इसे पूरे समुदाय का अपमान बताया है.

अख़बार लिखता है, दरअसल एक निजी टीवी चैनल के पत्रकार ने सिद्धारमैया से पूछा था कि क्या लिंगायत समुदाय के नेता को मुख्यमंत्री बनना चाहिए. इस पर सिद्धारमैया ने कहा कि 'पहले से ही लिंगायत मुख्यमंत्री है....लेकिन वह सारे भ्रष्टाचार की जड़ है.'

सिद्धारमैया

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सिद्धारमैया के इस बयान पर कर्नाटक भाजपा ने उन्हें घेर लिया. भाजपा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर सिद्धारमैया के उस बयान की वीडियो क्लिप शेयर की है.

भाजपा ने लिखा, 'यह अक्षम्य है कि एक व्यक्ति जो समुदाय को बांटने की कोशिश कर रहा है, अब वह कह रहा है कि समुदाय भ्रष्ट है!'

भाजपा नेताओं ने इसे पूरे लिंगायत समुदाय का अपमान बता दिया है.

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