राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा कैसे मिलता है और क्या फ़ायदा होता है?

अरविंद केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी को अब राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया है.

जबकि शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (सीपीआई) का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा ख़त्म हो गया है.

सोमवार को चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय पार्टियों की नई लिस्ट जारी की जिसमें यह फेरबदल देखने को मिले.

आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर किसी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा किस तरह मिलता है.

चुनाव आयोग की लिस्ट

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राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा कैसे मिलता है?

दरअसल इसके लिए केंद्रीय चुनाव आयोग के नियम 1968 का पालन किया जाता है.

जिसके मुताबिक किसी पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा हासिल करने के लिए चार या उससे ज़्यादा राज्यों में लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव लड़ना होता है.

इसके साथ ही इन चुनावों में उस पार्टी को कम से कम छह प्रतिशत वोट हासिल करने होते हैं.

इसके अलावा उस पार्टी के कम से कम चार उम्मीदवार किसी राज्य या राज्यों से सांसद चुने जाएं.

या

वह पार्टी कम से कम चार राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी होने का दर्जा हासिल कर ले.

या

वह पार्टी लोकसभा की कुल सीटों में से कम से कम दो प्रतिशत सीटें जीत जाए. वह जीते हुए उम्मीदवार तीन राज्यों से होने चाहिए.

चुनावी पार्टियां

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राष्ट्रीय पार्टी को क्या फ़ायदे मिलते हैं?

चुनाव चिह्न

राष्ट्रीय पार्टी को पूरे देश में एक चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने का मौका मिलता है. वह चुनाव चिह्न किसी भी दूसरे दल को नहीं दिया जाता.

अगर किसी राज्य में राष्ट्रीय पार्टी चुनाव लड़ रही है और वहां कोई क्षेत्रीय दल उसी पार्टी के चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरता है तो, ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय पार्टी को वरीयता दी जाती है.

इस बात को एक उदाहरण के तौर पर समझिए. समाजवादी पार्टी का चुनाव चिह्न साइकिल है. वहीं आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी का चुनाव चिह्न भी साइकिल है.

ऐसे में अगर दोनों राज्यों को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलता है, तो उस पार्टी को वरीयता मिलेगी जिसे पहले राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था.

दूरदर्शन पर मुफ़्त में विज्ञापन का समय

चुनाव के वक़्त राष्ट्रीय पार्टियों को पब्लिक ब्रॉडकास्टर यानी दूरदर्शन के टीवी चैनल पर मुफ्त में चुनाव प्रचार करने का समय दिया जाता है.

अलग-अलग पार्टियों को अलग-अलग समय दिया जाता है. स्टेट पार्टियों को भी चुनाव प्रचार का समय दिया जाता है, लेकिन राष्ट्रीय पार्टियों को इसमें वरीयता मिलती है.

स्टार प्रचारक के खर्च

चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव में खर्च की एक सीमा तय की जाती है. सभी उम्मीदवारों को अपने खर्चो की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है.

सभी पार्टियों में चुनाव प्रचार के लिए कुछ स्टार प्रचारक भी होते हैं. जब वो किसी क्षेत्र में प्रचार के लिए जाते हैं तो वहां का चुनावी खर्च निश्चितरूप से बढ़ जाता है.

ऐसे में इस बढ़े हुए खर्च को राष्ट्रीय पार्टी चुनावी खर्च से अलग कर सकती है.

हर राष्ट्रीय पार्टी 40 स्टार प्रचारक तय कर सकती है.

इसके साथ ही राष्ट्रीय पार्टियों को सरकार की तरफ से दफ़्तर बनाने के लिए ज़मीन मुहैया करवाई जाती है

चुनावी पार्टी
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देश में अब कितनी राष्ट्रीय पार्टियां हैं?

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • भारतीय जनता पार्टी
  • बहुजन समाज पार्टी
  • कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी)- सीपीएम
  • नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी- उत्तरपूर्वी राज्यों से)
  • आम आदमी पार्टी

इस लिस्ट में शामिल हुई आम आदमी पार्टी की बात करें तो इस पार्टी की दिल्ली और पंजाब में सरकार है.

इस के साथ ही आम आदमी पार्टी गुजरात और गोवा के विधानसभा चुनाव लड़ी और वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

देश में इस वक़्त कुल 6 राष्ट्रीय पार्टियां हैं. इसके साथ ही 56 स्टेट पार्टियां हैं. जबकि सैकड़ों पार्टियों को सिर्फ राजनीतिक पार्टियों के तौर पर रजिस्टर किया गया है.

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