अयोध्या यात्रा से एकनाथ शिंदे को क्या हासिल होने वाला है?

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- Author, प्राजक्ता पोल
- पदनाम, बीबीसी मराठी
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अयोध्या के दौरे पर हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद एकनाथ शिंदे बतौर मुख्यमंत्री पहली बार अयोध्या आए हैं.
वे शिवसेना के सभी विधायकों, सांसदों और क़रीब तीन हज़ार कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या का दौरा कर रहे हैं.
उनके साथ उप-मुख्यमंत्री देवेंन्द फडनवीस भी इस दौरे में शामिल हैं. इस दौरे में सरकार में शामिल बीजेपी के चार मंत्री भी शामिल हैं.
चुनाव आयोग के नतीजे आने के बाद शिंदे को 'धनुष बाण' चुनाव चिन्ह मिला है, इसलिए भी इस यात्रा को 'धनुष बाण यात्रा' कहा जा रहा है. एकनाथ शिंदे के चुनाव चिन्ह के प्रतीक राम की जन्मभूमि अयोध्या में महंत द्वारा नमन किया जाएगा.
इस दौरे के बाद दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के समाधि स्थल पर धनुष बाण ले जाया जाएगा और धनुष और बाण के प्रतीक चिन्ह को पूरे राज्य में प्रचारित किया जाएगा.
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एकनाथ शिंदे ने महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान आदित्य ठाकरे के साथ अयोध्या का दौरा किया था.
उस वक्त पार्टी के कई विधायकों से राज्यसभा चुनाव के लिए अचानक अयोध्या दौरा रद्द करने को कहा गया था.
पार्टी के विधायकों में नाराज़गी थी. कुछ महीने बाद शिंदे ने बगावत कर नई सरकार बनाई. उसके बाद शिंदे ने ऐलान किया था कि वह अयोध्या के दौरे पर जाएंगे.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस दौरे से एकनाथ शिंदे को क्या हासिल होगा?
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दौरे को लेकर अयोध्या में काफ़ी तैयारियां की गई हैं. शहरभर में क़रीब दो हज़ार बैनर पोस्टर लगाए गए हैं.
ठाणे और नासिक से चलने वाली ट्रेनों से बड़ी संख्या में शिंदे समर्थक अयोध्या पहुंच चुके हैं. माना जा रहा है कि एकनाथ शिंदे अपनी अयोध्या यात्रा के ज़रिए अपनी ताक़त का प्रदर्शन कर रहे हैं.

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शिंदे की अयोध्या यात्रा की अहम बातें
- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे 8 अप्रैल की रात लखनऊ पहुंचे.
- 9 अप्रैल को सुबह 10 बजे वो अयोध्या के लिए रवाना हुए. वो हेलीकॉप्टर से अयोध्या पहुंचेंगे.
- दोपहर 12 बजे वो राम मंदिर स्थल पर महाआरती करेंगे. उसके बाद वह उस जगह का निरीक्षण करेंगे जहां राम मंदिर का काम चल रहा है.
- दोपहर क़रीब 2.30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. लक्ष्मण महंत के कार्यक्रम में धनुष बाण स्वीकृति कार्यक्रम होगा.
- शाम 6 बजे सरयू नदी की आरती की जाएगी. उसके बाद एकनाथ शिंदे वापिस लखनऊ के लिए रवाना होंगे.
- एकनाथ शिंदे रात 9 बजे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास में उनसे मुलाक़ात करेंगे.
- इसके बाद वो रात 10 बजे मुंबई के लिए रवाना होंगे.

दौरे के पीछे हिंदू राजनीति?

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मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके विधायकों ने उद्धव ठाकरे से अलग होने की वजह को लेकर बार-बार कहा है कि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल होकर हिंदुत्व को छोड़ दिया था.
एकनाथ शिंदे अक्सर यह भी कहते रहे हैं कि वे बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व के उन विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिन्हें उद्धव ठाकरे छोड़ गए थे.
माना जा रहा है ति अयोध्या दौरे के जरिए हिंदुत्व नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर उभारने का वो प्रयास करेंगे.
एकनाथ शिंदे की अयोध्या यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले महंत मैथिली चरण से हमने इस बारे में चर्चा की. लक्ष्मण गढ़ में महंत मैथिली चरण एकनाथ शिंदे को धनुष बाण से आशीर्वाद देंगे.
बीबीसी से बात करते हुए, मैथिली चरण कहते हैं, "बालासाहेब ठाकरे एकमात्र ऐसे नेता थे जिनके नाम के पहले 'हिन्दूहयस्मृत' लगा था. उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ चले गए और धर्म के मुद्दे को टाल गए. धनुष्य बाण बालासाहेब ठाकरे का प्रतीक है. हम एकनाथ शिंदे को उनके हिंदुत्व विचारों को आगे बढ़ाने के लिए धनुष और बाण से आशीर्वाद देने जा रहे हैं."
शिंदे की शिवसेना को ठाकरे गुट ने विश्वासघाती और भ्रष्टाचार में लिप्त बताया है. उद्धव ठाकरे लगातार कह रहे हैं कि उनकी सरकार में अहम पद दिए जाने के बावजूद शिंदे ने उन्हें और शिवसेना को धोखा दिया.
शिंदे के अयोध्या दौरे के बारे में आदित्य ठाकरे ने कहा, "क्या कलियुग आ गया है, रावण राज्य के शासक अयोध्या दौरे पर गए हैं, लेकिन हम जल्द ही राज्य में राम राज्य लाएंगे."
ठाकरे जिस तरह से लगातार शिंदे पर विश्वासघात के आरोप लगा रहे हैं, उससे आगामी चुनावों में शिंदे के ख़िलाफ़ भावनात्मक माहौल बन सकता है.

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लोकमत के सहायक संपादक संदीप प्रधान कहते हैं, "ठाकरे समूह एकनाथ शिंदे और उनके विधायकों को देशद्रोही और विश्वासघाती बताकर उनकी छवि ख़राब करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन एकनाथ शिंदे अयोध्या दौरा और सावरकर जैसे मुद्दों को लेकर आलोचना को हिंदुत्व का लेप देने की कोशिश कर रहे हैं."
"शिंदे का दौरा हिंदुत्व के मुद्दे को केंद्र में रखने की कोशिश हो सकती है. यदि हिंदुत्व का मुद्दा केंद्र में आता है, तो अन्य भावनात्मक मुद्दे पीछे हट जाएंगे और शिंदे की शिवसेना को आगामी चुनावों में लाभ होगा."
संदीप प्रधान के मुताबिक़, "अगर एकनाथ शिंदे की छवि विश्वासघाती, भ्रष्टचार में लिप्त और बाला साहेब की शिवसेना को तोड़ने वाले नेता के तौर पर बन गई तो एकनाथ शिंदे को भविष्य में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए इसके इस दौरे पर बहुत कुछ निर्भर करेगा. दोनों पक्षों के चल रहे प्रयासों में किसका प्रयास बेहतर है."

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भाजपा के मंत्री भी शिरकत करेंगे
बीजेपी के चार मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, गिरीश महाजन, सुरेश खाड़े और रवींद्र चव्हाण अयोध्या दौरे में शामिल होंगे. विपक्ष इस बात की आलोचना कर रहा है कि वह एकनाथ शिंदे पर नज़र रखेंगे या उन्हें ताक़त देंगे.
मीडिया से बात करते हुए राज्य के मंत्री गिरीश महाजन ने कहा, "हम रामलला के दर्शन करने जा रहे हैं. हम अपने बीजेपी शासित राज्य में मुख्यमंत्री का स्वागत करने जा रहे हैं. साथ ही हम दो पार्टियां एक साथ हैं. इसलिए हम उनके साथ जा रहे हैं. इसको लेकर राजनीति करने की ज़रूरत नहीं है."
इससे पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद एकनाथ शिंदे कामाख्या देवी के दर्शन करने गुवाहाटी गए थे. तब भी मंत्री रवींद्र चव्हाण, बीजेपी के मोहित कांबोज उनके साथ दौरे में शामिल हुए थे.
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