ममता बनर्जी की चेतावनी, 'केंद्र सरकार नहीं मानी तो देंगे दिल्ली चलो का नारा': प्रेस रिव्यू

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो वह दिल्ली तक मार्च कर सकती हैं.
द टेलीग्राफ़ में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, ममता बनर्जी ने इस एलान के साथ ही दावा किया कि उन्होंने कोलकाता को लंदन से बेहतर शहर बना दिया है.
ममता बनर्जी ने कहा, "ऐसा लगता है कि अब वो वक़्त आ गया है जब सुभाष चंद्र बोस की ओर से देश को आज़ाद कराने के लिए दिया गया 'दिल्ली चलो' का नारा दोहराते हुए दिल्ली तक मार्च किया जाए.''
''अगर सरकार का मनमानी भरा रवैया नहीं रुका, लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया तो हमें दिल्ली तक एक और मार्च करना होगा.''
''भारत की आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ पर हम नेताजी, गांधीजी, आंबेडकर और मौलाना आज़ाद समेत दूसरे तमाम नेताओं की तस्वीरों के साथ दिल्ली के लिए मार्च करेंगे."

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ममता बनर्जी ने इस एलान के साथ ये भी बताया कि उनकी पार्टी इस मार्च को कैसे आयोजित करेगी.
उन्होंने कहा, "हम ट्रेनों में टिकट लेंगे. ज़रूरत पड़ी तो लोगों से पैसा लेकर दिल्ली पहुंचेंगे. अगर आप हमें ट्रेनों में रिज़र्वेशन नहीं कराने देंगे तो लोग आप पर उंगलियां उठाएंगे.''
''हमने आज तक इंतज़ार किया. मुझे उम्मीद थी कि केंद्र सरकार अपने रुख़ में बदलाव लाते हुए माफ़ी मांगेगी और कहेगी कि उनसे बंगाल ग्रामीण आवास योजना में 100 दिन तक किए गए काम के पैसों को रोक कर ग़लती हो गयी है.''
''और हमें 1.15 लाख करोड़ रुपये देगी जो कि असल में हमारा पैसा है. मैं उम्मीद कर रही थी कि वो जीएसटी से मिले पैसे और ग्रामीण इलाकों की सड़कें बनाने के लिए पैसे देगी. हालांकि, ये सब नहीं हुआ और अब हमें अपना विरोध प्रदर्शन बढ़ाना होगा."
लेकिन जिस दिन ममता बनर्जी केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रही थीं, उसी दिन कोलकाता के हावड़ा इलाके में हिंसा देखने को मिली. इस दौरान पुलिस की कई गाड़ियां जलाई गईं.
और पश्चिम बंगाल पुलिस को हिंसा प्रभावित इलाके में फ़्लैग मार्च करना पड़ा. बीजेपी ने राम नवमी के दिन हिंसा होने पर ममता सरकार को घेरने की कोशिश की है.
बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने इस मामले में ममता बनर्जी को घेरते हुए कहा, "हिंदू भावनाओं को आहत करते हुए, ममता बनर्जी ने राम नवमी पर धरना दिया. फिर हिंदुओं को मुस्लिम क्षेत्रों से बचने की चेतावनी दी क्योंकि रमज़ान चल रहा है, ये भूलकर कि हिंदू भी नवरात्र का उपवास कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल की गृह मंत्री के रूप में वह हावड़ा हिंसा के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं."
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, ममता बनर्जी ने कहा था, "मैं उन लोगों से अनुरोध करना चाहती हूं जो राम नवमी की शोभा यात्रा निकाल रहे हैं, कृपया शांति से यात्रा निकालें, मुस्लिम क्षेत्रों से बचें क्योंकि रमज़ान चल रहा है."

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दिल्ली में फिर दिखे मोदी विरोधी पोस्टर
दिल्ली में एक बार फिर मोदी विरोधी पोस्टर नज़र आए हैं जिनमें पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए गए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़, ये पोस्टर आम आदमी पार्टी के मुख्यालय के बाहर भी नज़र आए हैं जिनमें लिखा है - 'क्या भारत के प्रधानमंत्री पढ़े-लिखे होने चाहिए?'
आम आदमी पार्टी ने पीएम मोदी के ख़िलाफ़ एक देश व्यापी अभियान की शुरुआत की है जिसके तहत इस तरह के पोस्टर तमाम जगहों पर चिपकाए गए हैं.
आम आदमी पार्टी के संयोजक गोपाल राय ने कहा है कि ये अभियान देश के बाइस राज्यों में शुरू किया गया है.
इन राज्यों में पंजाब, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, तेलंगाना और मध्य प्रदेश से लेकर यूपी, बिहार और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि शामिल हैं.
कुछ दिन पहले दिल्ली की दीवारों पर इसी तरह के पोस्टर चिपकाए जाने पर कई दर्जन एफ़आईआर दर्ज की गयी थीं और कई लोगों की गिरफ़्तारियां भी हुई थीं.

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कर्नाटक में मुख्यमंत्री उम्मीदवार बताए बिना चुनाव लड़ सकती है बीजेपी
भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम ज़ाहिर किए बिना चुनाव मैदान में उतर सकती है.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, कर्नाटक में बीजेपी के चुनाव अभियान का नेतृत्व पीएम नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा करेंगे.
कर्नाटक में आगामी 10 मई को मतदान होना है और अब तक सामने आई चुनाव सामग्री में पीएम मोदी, जेपी नड्डा, सीएम बोम्मई, पूर्व सीएम येदियुरप्पा और प्रांतीय बीजेपी प्रमुख नलिन कतील के चेहरे दिख रहे हैं.
पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व पार्टी की प्रांतीय इकाई में कथित तौर पर एकजुटता ना होने और साथ ही कर्नाटक के जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा से बच सकती है.
हालांकि, सूत्रों ने ये भी बताया है कि अगर पार्टी बोम्मई के नेतृत्व में बहुमत हासिल करती है तो वह मुख्यमंत्री के पद पर बने रह सकते हैं.
ये भी पढ़ें - कर्नाटक विधानसभा चुनाव: राज्य से जुड़े सवाल और जवाब

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अमित शाह पहुंचेंगे यूपी, ओबीसी-दलितों को लुभाने की कोशिश?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आगामी सात अप्रैल को उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी ज़िले का दौरा करेंगे. इस दौरे को बीजेपी की ओर से दलितों और ओबीसी समाज को लुभाने से जुड़ी कोशिशों का हिस्सा बताया जा रहा है.
द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, अमित शाह का कौशाम्बी दौरा काफ़ी अहम है क्योंकि ये क्षेत्र अभी भी बीजेपी के लिए एक चुनौती बना हुआ है.
कौशाम्बी एक दलित आरक्षित लोकसभा सीट है जहां साल 2019 के आम चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार विनोद सोनकर ने चालीस हज़ार वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी.
लेकिन साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी इस क्षेत्र की पांचों विधानसभा सीटें हार गयी. इनमें से सपा ने तीन सीटें मांझापुर, चैल, सिराथु पर जीत हासिल की. और रघुराज प्रताप सिंह के जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) ने शेष दो सीटों पर जीत हासिल की.
बीजेपी सांसद विनोद सोनकर के क़रीबी नितिन कुमार ने कहा है कि अमित शाह इस दौरे पर कौशाम्बी महोत्सव में हिस्सा लेते हुए दलित मतदाताओं को भी संबोधित कर सकते हैं.
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