दिल्ली में लगे मोदी विरोधी पोस्टर, दर्जनों एफ़आईआर दर्ज, चार लोग गिरफ़्तार: प्रेस रिव्यू

पीएम नरेंद्र मोदी

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दिल्ली पुलिस ने पीएम मोदी के विरोध में लगाए गए पोस्टरों के मामले में अब तक पचास से ज़्यादा एफ़आईआर दर्ज की हैं. इसके साथ ही चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, अब तक गिरफ़्तार हुए चार लोगों में से दो प्रिंटिंग प्रेस के मालिक हैं.

बता दें कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में दीवारों और खंभों पर पीएम मोदी का विरोध करते हुए पोस्टर नज़र आए थे जिनमें लिखा था - 'मोदी हटाओ, देश बचाओ'

अब तक कम से कम दो हज़ार पोस्टर हटाए गए हैं और दो हज़ार से ज़्यादा पोस्टरों को एक वैन से बरामद किया गया है.

स्पेशल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस दीपेंद्र पाठक ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार को बताया है कि पुलिस ने आईपी एस्टेट में एक वैन को बरामद किया है जो कि डीडीयू मार्ग पर स्थित आम आदमी मुख्यालय से आ रही थी.

पाठक ने कहा, "इस मामले में गिरफ़्तार किए गए शख़्स ने बताया है कि उसे उसके नियोक्ता ने आम आदमी पार्टी मुख्यालय में पोस्टर डिलीवर करने के लिए कहा था और उसने एक दिन पहले भी ये पोस्टर डिलिवर किए थे. हमने दो अन्य लोगों को भी गिरफ़्तार किया है और आगे की जांच जारी है."

इस मामले में अब तक आम आदमी पार्टी की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है.

पुलिस के मुताबिक़, दो प्रिंटिंग प्रेस कंपनियों को ऐसे पचास-पचास हज़ार पोस्टर छापने का ऑर्डर दिया था. इन कंपनियों से जुड़े लोगों ने रविवार रात से सोमवार सुबह तक ऐसे तमाम पोस्टर चिपकाए. इन प्रेस मालिकों को पोस्टरों पर प्रेस का नाम नहीं छापने की वजह से गिरफ़्तार किया गया है.

इससे दो साल पहले भी कोविड के दौरान ऐसे ही मोदी विरोधी पोस्टर छापे जाने के मामले में पुलिस ने तीस लोगों को गिरफ़्तार किया था और 25 एफ़आईआर दर्ज की थीं.

अमृतपाल सिंह

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अमृतपाल सिंह मामले में अब तक क्या-क्या पता है?

पंजाब पुलिस बीते चार दिनों से जारी तलाशी अभियान के बाद भी 'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह को पकड़ने में कामयाब नहीं हुई है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, पुलिस ने अमृतपाल सिंह की सात तस्वीरें जारी की हैं जिनमें वह अलग-अलग पोशाकों में नज़र आ रहे हैं.

इनमें से एक तस्वीर में अमृतपाल सिंह के चेहरे पर दाढ़ी नहीं है. पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वह अमृतपाल सिंह को पकड़ने में उनकी मदद करे.

बीते शनिवार हुई पुलिस कार्रवाई के बाद से अमृतपाल सिंह से जुड़े कुछ वीडियोज़ सामने आए हैं. इनमें से एक वीडियो में अमृतपाल सिंह ब्रीज़ा गाड़ी में बैठे दिख रहे हैं.

पंजाब के जालंधर ज़िले के नंगल अंबियां गांव में गुरुद्वारा के ग्रंथी रंजीत सिंह ने बताया है कि 18 मार्च को दोपहर एक बजे अमृतपाल सिंह उनके गुरुद्वारे पर पहुंचे थे जहां उन्होंने कपड़े बदले और खाना खाया.

चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल ने रंजीत सिंह के बयान की पुष्टि की है.

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने अमृतपाल सिंह के मामले में पंजाब पुलिस को आड़े हाथों लिया है.

उच्च न्यायालय ने कहा है कि पंजाब में 80 हज़ार पुलिसकर्मी हैं, अगर वह इसके बाद भी भागने में सफल हो गया है तो ये एक गंभीर इंटेलीजेंस फ़ेल्योर है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़, इस मामले की जांच कर रही एजेंसियों को वारिस पंजाब दे संगठन से जुड़े पांच लोगों को 40 करोड़ से ज़्यादा रुपये मिलने की बात सामने आई है.

एक उच्चस्थ सूत्र के मुताबिक़, "कुछ मामलों में पैसा किसान आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों की आर्थिक मदद के नाम पर आया था. वहीं, एक दूसरे मामले में पैसा धार्मिक गतिविधियों को चलाने के लिए आया था."

इसमें से 35 करोड़ से ज़्यादा रुपये वारिस पंजाब दे संगठन के फ़ाइनेंसर बताए जा रहे दलजीत सिंह कल्सी के अकाउंट में आए हैं.

अब तक जिन लोगों के खातों की जांच की गयी है, उनमें से कुछ लोगों को हाल ही में पैसे मिलना शुरू हुए थे और कुछ लोगों को काफ़ी वक़्त से पैसे मिल रहे थे.

बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री के एस ईश्वरप्पा

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कर्नाटक में गौ-मूत्र से 'पवित्र' की अज़ान की जगह

कर्नाटक के शिमोगा ज़िले में बीते सोमवार बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने उस जगह पर गौ मूत्र छिड़का है जहां हाल ही में अज़ान पढ़ी गयी थी.

द टेलीग्राफ़ में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री के एस ईश्वरप्पा ने हाल ही में लाउड स्पीकर पर अज़ान पढ़ने को लेकर विरोध दर्ज कराया था.

इसके विरोध में मोहसिन अहमद नामक शख़्स ने शिमोगा ज़िले के डिप्टी कमिश्नर दफ़्तर में जाकर अज़ान पढ़ी थी.

पुलिस ने इस मामले में मोहसिन अहमद के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

बजरंग दल के स्थानीय नेता राजेश गौड़ा ने मीडिया से कहा है कि सरकारी दफ़्तरों में जाकर अज़ान पढ़ना धार्मिक कट्टरता जैसा है.

उन्होंने कहा, "हर शख़्स को विरोध करने का अधिकार है. लेकिन डिप्टी कमिश्नर के दफ़्तर में जाकर अज़ान पढ़ना पूरी तरह से धार्मिक कट्टरता थी. हमने उस जगह को पवित्र कर दिया है क्योंकि वह अज़ान के लिए तय जगह नहीं है."

केएस ईश्वरप्पा ने बीते रविवार दक्षिण कन्नड़ ज़िले में बीजेपी की विजय संकल्प यात्रा को संबोधित करते हुए अज़ान के दौरान लाउड स्पीकर के इस्तेमाल का विरोध किया था.

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