रूस-यूक्रेन जंग ख़त्म करने के लिए भारत क्या भूमिका लेगा, पीएम मोदी ने बताया - प्रेस रिव्यू

यूक्रेन

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यूक्रेन-रूस जंग के एक साल पूरे होने के ठीक एक दिन भारतीय बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत इस संकट को सुलझाने के लिए किसी भी 'शांति प्रक्रिया' का हिस्सा बनना चाहेगा.

'द हिंदू' ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी ने जर्मन चासंलर ओलाफ़ शॉल्त्स का स्वागत करते हुए यूक्रेन शांति वार्ता में भारत की दिलचस्पी का जिक्र किया है.

इसके साथ ही उन्होंने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार की अपील की और सीमापार आतंकवाद को भी ख़त्म करने पर जोर दिया.

अख़बार लिखता है कि मोदी से मुलाक़ात के बाद ओलाफ़ शॉल्त्स की ओर से जारी किया गया बयान यूक्रेन संकट पर केंद्रित था.

उन्होंने कहा कि यह बताना ज़रूरी है कि यूक्रेन संकट पर यूएन के सदस्य देशों का क्या रुख़ है. उन्होंने कहा कि वो 'व्यक्तिगत रूप से ये पक्का' करना चाहेंगे कि यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते से जुड़ी बातचीत जल्दी पूरी हो जाए.

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "यूक्रेन और कोविड महामारी ने पूरी दुनिया पर असर डाला है, ख़ास कर विकासशील देशों को इससे नुक़सान हुआ है. हम दोनों इस बात पर सहमत हैं ये संकट मिलजुल कर ख़त्म किया जा सकता है. जी-20 में हम इसी पर फोकस कर रहे हैं."

"भारत यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही बातचीत और कूटनीति के ज़रिये संकट सुलझाने की बात कर रहा है. अगर इसे सुलझाने के लिए कोई शांति प्रक्रिया बनती है तो भारत इसमें शामिल होना चाहेगा."

शॉल्त्स ने कहा कि उन्होंने हैमबर्ग के मेयर के तौर पर 2012 में भारत का दौरा किया था. तब से भारत का 'जबरदस्त उदय' हुआ है. उन्होंने भारत को जी-20 की अध्यक्षता के लिए बधाई दी.

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शॉल्त्स ने भारत के बारे में क्या कहा?

'द हिंदू' ने लिखा है कि शॉल्त्स ने यूक्रेन युद्ध पर यूएन के सदस्य देशों के रुख़ साफ़ करने की बात ऐसे वक्त में की है, जब दो दिन पहले ही यूएन जनरल असेंबली में यूक्रेन से जुड़े प्रस्ताव पर भारत ने वोटिंग से इनकार कर दिया था.

ये इस बात का संकेत है पश्चिमी देशों के दबाव के बढ़ते दबाव के बावजूद भारत रूस और यूक्रेन के मामले पर निष्पक्ष बना हुआ है.

यूक्रेन-रूस जंग पर पश्चिमी देशों और दूसरे देशों के बीच रुख़ के अंतर बेंगलुरू में जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में भी दिखा, जब अमेरिका और यूरोप ने रूस पर युद्धापराध का आरोप लगाया.

दूसरी ओर फ्रांस के वित्त मंत्री ले मायर ने इस बात के संकेत दिए कि वो रूस के ख़िलाफ़ भारत के शब्दों के चयन को लेकर संतुष्ट नहीं हैं.

'द हिंदू' ने पीटीआई की एक ख़बर हवाला देते हुए कहा है कि फ्रांसीसी वित्त मंत्री का मानना है कि रूस के प्रति भारत का रुख़ नरम रहा है. उसने यूक्रेन पर हमले का संदर्भ देते हुए 'आक्रमण' की जगह 'संकट' शब्द का इस्तेमाल किया.

जी-20

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टॉप संस्थानों में दलित, आदिवासी छात्रों की खुदकुशी पर चीफ़ जस्टिस ने जताई चिंता

भारत के चीफ़ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने देश के टॉप शिक्षण संस्थाओं में दलित, आदिवासी छात्रों की खुदकुशी की घटनाओं पर चिंता जताई है.

'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' ने चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ के उस बयान को अपने पहले पन्ने पर छापा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि देश के शीर्ष संस्थानों में जिस तरह से समाज के हाशिये के वर्गों के छात्र-छात्राएं खुदकुशी कर रहे हैं उससे वो परेशान हैं और इसमें एक पैटर्न दिखता है. लिहाज़ा इस पर सवाल उठाने की ज़रूरत है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि समय आ गया है कि हम शिक्षा का एक ऐसा मॉडल पेश करें जिसके मूल में संवेदना हो.

आईआईटी बॉम्बे में एक दलित और ओडिशा के एनएलयू में एक आदिवासी स्टूडेंट की खुदकुशी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं. ये कभी-कभी सदियों के संघर्ष की कहानियां होती हैं. मेरा मानना है कि अगर हम इस मुद्दे को हल करना चाहते हैं तो हमें इस समस्या को मानना होगा."

नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "देश एक शीर्ष शिक्षाविद सुखदेव थोराट का कहना है कि अगर किसी ख़ास परिस्थिति में खुदकुशी करने वाले सभी छात्र-छात्राएं दलित या आदिवासी हैं तो ये साफ तौर पर एक पैटर्न को दिखाता है. जिस पर हमें सवाल करना चाहिए."

उन्होंने कहा कि जब छात्र-छात्राएं घर छोड़ कर आते हैं तो यह शिक्षा संस्थानों की ज़िम्मेदारी होती है कि संस्थान में उनके साथ मित्रता के भाव को मज़बूत करें, बग़ैर संवेदना के आप बेहतरी की उम्मीद नहीं कर सकते.

उन्होंने जजों से अपील की कि वे उन्होंने समाज से संवाद करना चाहिए.

उन्होंने कहा, "अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद वहां ब्लैक लाइव मैटर्स आंदोलन मज़बूत हुआ. वॉशिंगटन सुप्रीम कोर्ट के सभी नौ जजों ने न्यायपालिका और क़ानून की दुनिया से जुड़े लोगों को एक बयान जारी कर अमेरिका में ब्लैक लोगों की ख़राब स्थिति और उनकी ज़िंगदगी के बढ़ते अवमूल्यन की ओर याद दिलाया."

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "इसी तरह चीफ़ जस्टिस के तौर पर अपने मूल काम को अंजाम देने के अलावा मेरी ये कोशिश है कि मैं अपने समाज को प्रभावित करने वाले बुनियादी मुद्दों की ओर ध्यान दिलाऊं."

डी वाई चंद्रचूड़

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ऑस्ट्रेलिया के दो विश्वविद्यालय भारत में अपना स्वतंत्र कैंपस खोलने की तैयारी में

'इंडियन एक्सप्रेस' की एक ख़बर के मुताबिक़ दुनिया की टॉप 300 यूनिवर्सिटीज में शामिल ऑस्ट्रेलिया की दो यूनिवर्सिटीज़ भारत में जल्द ही अपने स्वतंत्र विदेशी कैंपस खोल सकती हैं.

इन दोनों विश्वविद्यालयों ने इस संबंध में अपने प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे हैं. दोनों विश्वविद्यालय इस संबंध में इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर अथॉरिटी से बात कर रहे हैं ताकि गुजरात के गांधीनगर के के नज़दीक गिफ्ट सिटी में 'स्वतंत्र इंटरनेशनल ब्रांच कैंपस' खोल सकें.

'इंडियन एक्सप्रेस' ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी एलबनीज़ अपनी भारत यात्रा के दौरान इनमें से एक विश्वविद्यालय की ओर से कैंपस खोलने का ऐलान कर सकते हैं.

ऑस्ट्रेलियाई पीएम अगले महीने भारत दौरे के दौरान गांधीनगर और अहमदाबाद की यात्रा करेंगे.

अख़बार लिखता है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने पिछले साल के बजट में गिफ्ट सिटी में विश्व स्तरीय विदेशी विश्वविद्यालयों को फाइनेंशियल मैनेजमेंट, फिनटेक, साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित में कोर्स शुरू करने की इजाज़त देने की बात की थी. इन विश्वविद्यालयों पर घरेलू नियम लागू नहीं होंगे.

कॉलेज

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निजी कंपनियों में अब आईवीपीएफ ट्रीटमेंट और पेट्स केयर समेत कई छुट्टियां

'इकोनॉमिक टाइम्स' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को पुरानी सुविधाएं देने से आगे जाकर नए तरह के बेनिफिट्स देने की ओर बढ़ रही हैं.

इनमें फर्टिलिटी, आईवीपीएफ़ ट्रीटमेंट सुविधा, पेट्स केयर छुट्टी, किसी रिश्तेदार की मौत पर शोक के लिए छुट्टी, मासिक धर्म के दौरान छुट्टी, मेंटल हेल्थ कोच तक पहुंच से लेकर काम छोड़ कर छुट्टी पर जाने की सहूलियत शामिल हैं.

फैमिली केयर छुट्टी या बच्चा गोद लेने के लिए छुट्टी दी जा रही है. ट्यूशन कवरेज, रिमोट ऑफिस बनाने में मदद जैसी कई सुविधाएं हैं, जिन पर कंपनियां विचार कर रही हैं.

अख़बार के मुताबिक़ प्रॉक्टर एंड गैंबल (पीएंडजी) ने कर्मचारियों के लिए एक स्कीम शुरू की है, जिसमें उन कर्मचारियों को सहूलियतें दी जा रही हैं जो स्पेशल नीड्स वाले अपने बच्चों की देखभाल करते हैं.

एसेंचर के मेडिकल इंश्योरेंस में एलजीबीटीआईक्यू प्लस के पार्टनर के जेंडर री-असाइनमेंट सर्जरी की कवरेज भी शामिल है.

स्टार्ट-अप भी इस दिशा में पहल कर रहे हैं. पिछले महीने विंगिफ़ाई ने एक बड़ा मेंटल वेलनेस प्रोग्राम लॉन्च किया. सिंपल मासिक धर्म के दौरान छुट्टी और पेट केयर और एडॉप्शन लीव जैसी सुविधा दे रही है.

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