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टीवी चैनल के एंकरों और हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कुछ कहा – प्रेस रिव्यू
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हेट स्पीच और हेट क्राइम को लेकर कहा कि 'यह सरकार ही रोक सकती है' क्योंकि यह अपराध समाज के साथ किए जा रहे हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' लिखता है कि सरकार इस बात पर सहमत है कि नफ़रत किसी भी धर्म के रंग के पीछे छिप नहीं सकती है.
जस्टिस बीवी नागरत्ना वाली खंडपीठ में जस्टिस के.एम. जॉसेफ़ ने कहा, "हम सरकार के सामने किसी भी मामले में आना पसंद नहीं करते लेकिन कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जब धार्मिक स्वतंत्रता, सौहार्द और व्यवस्थित प्रगति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हो तो दख़ल देना होता है. आज हम किस लिए लड़ रहे हैं? हमें एक राष्ट्र के रूप में बहुत कुछ हासिल करना है, लोग बिना नौकरी के भूखे मर रहे हैं."
खंडपीठ की ये टिप्पणी उत्तर प्रदेश सरकार की उस सूचना के बाद आई जिसमें उसने कोर्ट को जानकारी दी है कि उसने साल 2021-2022 में हेट स्पीच के 580 मामले दर्ज किए गए. इनमें से 160 मामले स्वतः संज्ञान के थे. उत्तराखंड सरकार ने बताया कि उसने 118 मामले दर्ज किए थे.
जस्टिस जोसेफ़ ने कहा कि यह (हेट स्पीच) पूरी तरह से संकट के अलावा कुछ भी नहीं है.
'एजेंडा बेचा जा रहा'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टीवी पर हेट स्पीच की समस्या की ओर ध्यान दिलाया.
इस दौरान कहा गया कि टीवी चैनल और उसके एंकर्स शक्तिशाली विज़ुअल मीडियम के ज़रिए, अपनी टीआरपी के लिए समाज में विभाजनकारी और हिंसक प्रवृत्ति पैदा करने के लिए कुछ ख़ास 'एजेंडा' को बेचने का औज़ार बन गए हैं.
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "हमें भारत में एक स्वतंत्र और संतुलित मीडिया की आवश्यकता है. लेकिन वे संतुलित नहीं है. हमें टीवी मिले दशकों हो गए हैं लेकिन आपने (सरकार) टीवी के लिए कुछ भी नहीं सोचा और इसी वजह से वो आज सभी के लिए मुफ़्त बन गया है."
कोर्ट ने यह भी पूछा कि बढ़ती नफ़रत या टीवी पर पूर्वाग्रह के ख़िलाफ़ संदेश देने के लिए क्या किसी एंकर को 'ऑफ़ एयर' करने का फ़ैसला लिया गया.
कोर्ट ने कहा कि 'अगर स्वतंत्रता के साथ एजेंडा का इस्तेमाल किया जाए या एजेंडा को बढ़ावा दिया जाए तो आप लोगों की सेवा नहीं कर रहे हैं बल्कि इसकी कुछ और वजहें हैं. इसलिए आपको उससे निपटना होगा.'
कोर्ट ने कहा कि एंकर्स और चैनल के संपादकीय प्रमुखों को कंटेंट पर फ़ैसला करना चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि चैनल के पीछे लगे 'पैसे' से वो सब तय होता है.
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'किताब की नहीं तलवार की पूजा करनी चाहिए'
कर्नाटक के चर्चित हिंदू नेता और श्रीराम सेने के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद मुतालिक ने हिंदुओं से कहा है कि वो तलवारों की पूजा करें और उसे अपनी महिलाओं की सुरक्षा के लिए घर में रखें.
हाल ही में बीजेपी की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भी हिंदुओं से अपील की थी कि वो अपने घरों के 'चाकू की धार' को तेज़ रखें.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द टेलीग्राफ़' के मुताबिक़, मुतालिक ने कहा है कि किताबों या उपकरण की पूजा करने से अच्छा है तलवार की पूजा की जाए.
कर्नाटक के यादरावी में स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मुतालिक ने कहा, "हमें ट्रैक्टर्स, किताबों या पेन की जगह तलवार की पूजा करनी चाहिए. हमारी महिलाओं की सुरक्षा के लिए तलवारें हमें अपने घरों में रखनी चाहिए."
शुक्रवार शाम तक इस मामले में पुलिस ने कोई भी एफ़आईआर दर्ज नहीं की थी.
ग़ौरतलब है कि बीजेपी शासित कर्नाटक राज्य में प्रज्ञा सिंह ठाकुर के ख़िलाफ़ हेट स्पीच के मामले में एफ़आईआर दर्ज हुई है.
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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 1.268 अरब डॉलर की गिरावट
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि 6 जनवरी को ख़त्म हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.268 अरब डॉलर से घटकर 561.583 अरब डॉलर ही रह गया है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द इकोनॉमिक टाइम्स' के मुताबिक़, इससे पहले लगातार दो सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में 4.4 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी और यह 562.851 अरब डॉलर पहुंच गया था.
अक्तूबर 2021 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा था और 645 अरब डॉलर तक गया था.
आरबीआई के वीकली स्टैटिस्किटल सप्लिमेंट के अनुसार, भारत की विदेशी मुद्रा संपत्ति में भी गिरावट आई है जो कि विदेशी मुद्रा भंडार का मुख्य घटक है.
यह 1.747 अरब डॉलर घट गई है और विदेशी मुद्रा संपत्ति अब 496.441 अरब डॉलर ही रह गई है.
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मंजूनाथ की हत्या के दोषी को रिहा किया गया
पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के सेल्स मैनेजर एस. मंजूनाथ की हत्या के दोषी एक 43 वर्षीय शख़्स को बीते रविवार को जेल से रिहा कर दिया गया.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के बाद दोषी को समय से पहले रिहा कर दिया गया.
आईआईएम लखनऊ से पासआउट 27 साल के मंजूनाथ की साल 2005 में हत्या कर दी गई थी. वो लखीमपुर खीरी में पोस्टेड थे जहां पर वो भ्रष्टाचार और तेल में मिलावट करने वाले रैकेट के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे थे.
लखीमपुर खीरी डिस्ट्रिक्ट जेल के सुप्रीटेंडेंट विपिन मिश्रा ने कहा कि एक साल पहले दोषी शिवकेष गिरि उर्फ़ लल्ला गिरि और विवेक शर्मा (44) को समय से पहले रिहा करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था.
उन्होंने बताया कि क़ानूनी प्रक्रिया के बाद सरकार ने लल्ला गिरि को समय से पहले रिहा करने का फ़ैसला किया, वहीं विवेक शर्मा की रिहाई का फ़ैसला अभी लंबित है.
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