You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
मैंगलौर पब हमले में श्रीराम सेना के प्रमोद मुतालिक बरी
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
मैंगलौर पब अटैक मामले में दक्षिणपंथी संगठन श्रीराम सेना के नेता प्रमोद मुतालिक को कोर्ट ने बरी कर दिया है, जिससे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और लोगों को चौंका दिया है.
जनवरी 2009 को हुई इस घटना के वीडियो फुटेज न्यूज़ चैनलों पर कई बार दिखाए जा चुके हैं, इस फुटेज में महिलाओं को उनके बालों से खींचकर पब के बाहर फेंक दिया गया था.
लेकिन इन वीडियो फुटेज को कोर्ट में सबूत के रूप में नहीं रखा गया.
इस मुकदमे का पूरा फैसला अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन मजिस्ट्रेट ने फैसले के मुताबिक प्रमोद मुतालिक समेत 26 लोग बरी कर दिए गए हैं.
अभियुक्त पक्ष की वकील आशा नायक ने बरी किए जाने के मुमकिन कारणों को लेकर बीबीसी हिंदी से बात की.
मुतालिक कैसे हुए बरी?
आशा नायक ने बताया,"कोर्ट में 12 गवाहों को पेश किया गया था. उनमें से 8 तो अधिकारी ही थे. अन्य 4 स्वतंत्र गवाह थे जिनमें शिकायतकर्ता भी शामिल हैं जिन्होंने अभियोजन पक्ष के बनाए केस का समर्थन नहीं किया. ये ज़रूर एक वजह हो सकती है."
आशा नायक के मुताबिक पब के मालिक ने कोर्ट से कहा कि वो अपनी शिकायत का समर्थन नहीं करते और ये शिकायत पुलिस ने लिखी है. उन्होंने किसी अभियुक्त की पहचान भी नहीं की.
एक शिकायत ये थी कि इस हमले के दौरान महिलाओं को साथ छेड़छाड़ की गई. वकील आशा नायक ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 354 यहां लागू नहीं हो सकती थी क्योंकि वे महिलाएं जांच एजेंसी के सामने कभी आईं ही नहीं.
लेकिन वीडियो में साफ़ नज़र आता है कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ, इस सवाल पर आशा कहती हैं कि उन्हें सबूत पेश करना चाहिए था.
"क्या हम उनसे भीख मांगे और कहें कि जांच एजेंसी के सामने आओ."
'दस साल में भी नहीं हुआ न्याय'
इस घटना के बाद महिलाओं के एक छोटे से ग्रुप ने 'पिंक चड्ढी' कैंपेन शुरू किया था जिसे काफ़ी समर्थन मिला था. ये कैंपेन इसलिए शुरू किया गया था क्योंकि प्रमोद मुतालिक और उनके संगठन ने धमकी दी थी कि जो लड़का-लड़की वैलेंटाइन डे पर साथ नज़र आएंगें उनकी शादी करवा दी जाएगी.
लेकिन इस कैंपेन को चलाने वाले लोगों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
कर्नाटक में भाजपा के एक पूर्व मंत्री ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि उस वक्त पार्टी ने मुताल्लिक और श्री राम सेने संगठन को हिंदुत्व आंदोलन से परे कर दिया क्योंकि तब की भाजपा सरकार को उनकी वजह से शर्मिंदगी उठानी पड़ रही थी.
मैंगलौर के सिटीज़न फोरम फॉर मैंगलोर डेवलपमेंट का कहना है, "ये देख कर दुख होता है कि इतने सारे वीडियो और तस्वीरों के सबूत होने और तकरीबन 10 साल के ट्रायल के बाद भी अभियोजन पक्ष अपराधियों को सज़ा नहीं दिलवा सका."
फोरम की विद्या दिनकर कहती हैं कि वो कानूनी सलाह ले रही हैं ताकि बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ़ हाई कोर्ट में जाएं. ये फैसला चौंकाने वाला है."
कर्नाटक के गृहमंत्री रामालिंगा रेड्डी ने भी कहा कि अभियोजन पक्ष को अपील करने को कहा जाएगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)