नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर हुआ था अमरावती हत्याकांड: एनआईए - प्रेस रिव्यू

एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने महाराष्ट्र के अमरावती में मारे गए वेटरनरी केमिस्ट उमेश प्रह्लादराव कोल्हे के मामले में चार्जशीट फाइल की है.
'टाइम्स ऑफ इंडिया' लिखता है, एनआईए के मुताबिक उमेश प्रह्लादराव ने पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा की ओर से पैगंबर मोहम्मद पर विवादास्पद टिप्पणी का सोशल मीडिया पर समर्थन किया था. इसी का बदला लेने के लिए इस साल जून में उनकी हत्या की गई थी.
एनआईए की चार्जशीट में 11 अभियुक्तों को नामज़द किया गया है. ये हैं- मुदस्सर अहमद, शाहरुख़ ख़ान, अब्दुल तौफ़ीक शेख, मोहम्मद शोएब, आतिब रशीद, यूसुफ ख़ान, इरफ़ान ख़ान, अब्दुल अरबाज़, मुस्तफ़ीक अहमद, शेख शकील और शाहिम अहमद.
ये सभी अमरावती के रहने वाले हैं.
अख़बार के मुताबिक एनआईए ने बताया कि आरोपियों ने हमले को अंजाम देने के लिए एक चरमपंथी गिरोह बनाया था.
एनआईए के प्रवक्ता का कहना है कि अभियुक्तों का मकसद प्रह्लादराव को सरेआम रास्ते में रोक कर उनकी हत्या करना था ताकि लोगों में दहशत फैले. सभी अभियुक्तों को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत नामज़द किया गया है.
शुक्रवार को एनआईए ने कहा था कि प्रह्लादराव की हत्या का पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया या इस्लामिक स्टेट जैसे किसी प्रतिबंधित संगठन से कोई संबंध नहीं है.

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जांच एजेंसी के मुताबिक़ सभी अभियुक्तों ने खुद ही प्रह्लादराव की हत्या का फैसला किया था. उन्हें रैडिकलाइज़ नहीं किया गया था. उनका मानना था कि नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखना ईशनिंदा है.
नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने के बाद पहले उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल की हत्या हुई थी. उसके बाद अमरावती में प्रह्लादराव कोल्हे को मार डाला गया.
प्रह्लादराव कोल्हे की हत्या का मामला पहले सिटी कोतवाली में दर्ज हुआ था. इसके बाद इस साल 2 जुलाई को एनआईए ने इस माामले को दोबारा दर्ज किया.
अमरावती पुलिस को पहले शक था कि हत्या डकैती की कोशिश में हुई है. लेकिन उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या और फिर प्रह्लादराव की हत्या के बाद इसे नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर लिखे गए पोस्ट से जोड़ा जाने लगा था. बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई ने इस मामले में एनआईए से जांच की थी .
इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोल्हे हत्याकांड की जांच एनआईए को सौंप दी थी. इस हत्याकांड के दस अभियुक्तों को इस साल अगस्त तक गिरफ़्तार कर लिया गया था. इस साल सितंबर में शाहिम अहमद को गिरफ़्तार किया गया है. अहमद पर दो लाख रुपये का ईनाम था.

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पूर्वी कमान के प्रमुख ने कहा, सीमा पर हालात भारत के नियंत्रण में
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प के बाद पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आरपी कलिता ने कहा है कि उत्तरी क्षेत्र के सीमाई इलाकों में स्थिरता है हालात पूरी तरह भारतीय सेना के नियंत्रण में है. झड़प के बाद किसी आला सैन्य अफसर का यह पहला बयान है.
'इकोनॉमिक टाइम्स' के मुताबिक उन्होंने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अतिक्रमण और गश्त को भारतीय सेना ने दृढ़ता से रोक दिया है.
कोलकाता में विजय दिवस की 51वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में उन्होंने कहा, ''एलएसी में एक जगह जहां इसे लेकर भारत और चीन के बीच अलग-अलग धारणा है वहां पीएलए का गश्ती दल घुस आया था. भारतीय सेना ने इसका मज़बूती से मुकाबला किया और चीनी सेना को वापस लौटना पड़ा. उत्तरी क्षेत्र के सीमाई इलाकों में हालात स्थिर हैं और भारतीय सेना के नियंत्रण में हैं.''
उन्होंने कहा, ''आप लोगों को मालूम होगा कि सीमा पार एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर अलग-अलग धारणाएं हैं. आठ विवादित क्षेत्र हैं. जिन्हें लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग धारणाएं हैं. उन क्षेत्रों में से एक में पीएलए के गश्ती दल ने उल्लंघन किया और जिसका हमारे सैनिकों ने बहुत मज़बूती से मुकाबला किया."
उन्होंने कहा, ''डोकलाम में अभी कोई ताज़ा गतिविधि सामने नहीं आई है."
डोकलाम में 2017 के दौरान भारत और चीन के सैनिक तब आमने-सामने आ गए थे, जब चीनी सेना ने यहां एक सड़क बनाने की कोशिश की थी. इस इलाके में 73 दिनों तक दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने तैनात थे. इसके बाद बातचीत से मामला सुलझा लिया गया था.

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कोई केस छोटा नहीं, व्यक्तिगत आज़ादी के मामलों को प्राथमिकता देनी होगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी केस बहुत छोटा नहीं है.
चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा, ''अगर हम निजी आज़ादी के मामले में कार्यवाही ना करें और लोगों को राहत नहीं देंगे तो फिर हम यहां क्यों बैठे हैं.''
दरअसल बुधवार को कानून मंत्री किरन रिजिजू ने संसद में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के सामने जब लंबित मामलों का अंबार लगा हो तो उसे ज़मानत याचिका और छोटी-मोटी जनहित याचिकाओं को निपटाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए.
'द टेलीग्राफ' के मुताबिक रिजिजू ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को इसके बजाय संवैधानिक मामलों की सुनवाई करनाी चाहिए.

रिजिजू का ये सुझाव बाद में सार्वजनिक हो गया था. सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच पिछले कुछ समय से कोलेजियम को लेकर बयानबाज़ी जारी है.
रिजिजू की ओर से छोटे-मोटे जनहित याचिकाओं को निपटाने पर ध्यान न देने के सुझाव के बाद चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट के लिए कोई केस न तो बहुत छोटा है और न बहुत बड़ा है क्योंकि हमें अपनी अंतरात्मा और अपने नागरिकों की आज़ादी की मांग सुननी पड़ती है. इसलिए हम यहां हैं. हम किसी इक्का-दुक्का के मामले के लिए यहां नहीं बैठे हैं. अगर हम व्यक्तिगत आज़ादी के मसले पर विचार न करें और लोगों को राहत न दें तो हम फिर यहां क्या कर रहे हैं.''
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में बिजली चोरी के मामले में इकराम की रिहाई का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की. यूपी के इकराम को बिजली चोरी के मामले में 18 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी. कोर्ट ने कहा कि इस अपराध को हत्या के अपराध के स्तर के बराबर नहीं किया जा सकता है. इकराम तीन साल जेल की सज़ा काट चुके थे. कोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया.
चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जब भी न्याय को रोकने की कोशिश होगी सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करेगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम संविधान के अनुच्छेद में 21 के तहत दी गई आज़ादी की गारंटी की रक्षा नहीं कर पाएंगे.

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बिहार में शराबबंदी लागू करने में ढिलाई, सिर्फ एक फीसदी पर आरोप साबित
बिहार के सारण ज़िले में ज़हरीली शराब से 38 लोगों की मौत के बाद 87 लोग को गिरफ्तार किया गया है. मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है. लेकिन ज़मीनी स्तर पर देखें तो बिहार में शराबबंदी को मुस्तैदी से लागू करने में ढिलाई दिखती है.
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में बिहार प्रॉव्हिशन एंड एक्साइज़ एक्ट के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि इस मामले में लोगों पर आरोप सिद्ध होने के मामले काफी कम है. इसके साथ ही लंबित मामलों की संख्या भी बढ़ती जा रही है.
अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक शराबबंदी के लिए बिहार प्रॉव्हिशन एंड एक्साइज़ एक्ट 2016 में आया था. तब से लेकर अब तक बिहार पुलिस और एक्साइज़ डिपार्टमेंट में शराबबंदी के उल्लंघन के मामले में चार लाख केस दर्ज किए हैं.

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इस मामले में साढ़े चार लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इनमें से 1.4 लाख लोगों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में केस चले. जिन लोगों पर मुकदमे चले उनमें से सिर्फ 1300 लोगों को सज़ा सुनाई गई. यानी सिर्फ एक फीसदी लोग दोषी साबित हुए. इनमें से 900 लोग सुबूत के अभाव में बरी हो गए.
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इसने 2018 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें ये बताया गया था कि बिहार में शराबबंदी लागू करने के लिए की जा रही सख्ती से समाज में हाशिये पर रह रहे लोग प्रभावित हुए हैं.
बिहार में जेलों में ज़रूरत से बहुत ज्यादा कैदी होने की समस्या को देखते हुए बिहार सरकार ने पिछले साल अप्रैल में एक आदेश लागू किया गया था. इसके तहत पहली बार शराब पीने वालों को दो से पांच हजार रुपये का जुर्माना वसूल कर छोड़ने को कहा गया था.
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