पीएम मोदी 2014 से लेकर 2022 के बीच कितने पॉपुलर हुए? - प्रेस रिव्यू

नरेंद्र मोदी

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दैनिक जनसत्ता ने गुजरात चुनाव को लेकर ख़ास रिपोर्ट छापी है, जिसमें 2009 से लेकर 2022 तक गुजरात और देश में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का के बारे में बताया गया है.

अख़बार ने सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ डेवेलपिंग सोसायटीज़ (सीएसडीएस) द्वारा जारी किए आंकड़ों का हवाला देकर लिखा है कि साल 2009 में नरेंद्र मोदी देश में 2 फीसदी और गुजरात में 17 फीसदी लोकप्रिय थे.

वहीं साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की लोकप्रियता में इजाफ़ा हुआ. इस साल नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता गुजरात में 49 फीसदी तो देश में 35 फीसदी रही.

साल 2019 में इसमें और भी बढ़ोतरी हुई. इस साल उनकी लोकप्रियता देश में 47 और गुजरात में 68 फीसदी तक तक पहुंची. हालांकि, साल 2022 में इसमें थोड़ी गिरावट देखने को मिली. हालांकि ये गिरावट गुजरात में भी देखी गई और देशभर में भी.

साल 2022 में मोदी की लोकप्रियता देश में 44 फीसदी और गुजरात में 53 फीसदी रही.

साल 2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने जिसके बाद से उनकी लोकप्रियता बढ़ी है. इससे पहले वो गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे.

गुजरात

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इमेज कैप्शन, गुजरात में बीजेपी का घोषणापत्र जारी करते हुए पार्टी के नेता

गुजरात में बीजेपी का घोषणापत्र जारी, ओलंपिक के लिए मिशन शुरू करने का वादा

बीजेपी ने गुजरात में अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है. शनिवार को जारी अपने घोषणापत्र में बीजेपी ने 'गुजरात मिशन ओलंपिक' शुरू करने का वादा किया है ताकि गुजरात 2036 में ओलंपिक खेलों का आयोजन कर सके.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ बीजेपी के घोषणापत्र में 'गुजरात मिशन ओलंपिक' शुरू करने के साथ ही राज्य में 20 लाख नौकरियां और इलेक्ट्रिक स्कूटर और महिलाओं को साइकिल बांटने जैसे वादे किए गए हैं.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने घोषणापत्र जारी करते हुए राज्य में एंटी रेकिलाइजेशन सेल बनाने और "चरमपंथी संगठनों के स्लीपर सेल, भारत विरोधी ताक़तों" की पहचान करने और उन्हें खत्म करने समेत कई वादे किए.

गांधीनगर में आयोजित एक समारोह में जारी किए गए घोषणापत्र में कहा गया है कि वक्फ़ बोर्ड की संपत्तियों और उनके पैसे जुटाने के तरीक़ों की जांच की जाएगी. इसके साथ ही मदरसों में क्या पढ़ाया जा रहा है इसका भी सर्वे होगा.

घोषणापत्र में ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन के मामलों पर भी नकेल कसने की बात की गई है. इसके लिए गुजरात फ्रीडम ऑफ़ रिलीजन (संशोधित) एक्ट 2021 के तहत सश्रम कारावास और जुर्माना लगाने की बात की गई है.

पार्टी ने गुजरात रिकवरी ऑफ डैमेजेज़ ऑफ़ पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टीज एक्ट भी लागू करने का वादा किया है. इसके तहत सांप्रदायिक दंगों, हिंसक विरोध और अशांति के दौरान लोगों की ओर से संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का हर्जाना उन्हीं से वसूला जाएगा.

पार्टी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए बनी कमेटी की सिफारिशें लागू करने का वादा किया है.

घोषणापत्र में लोगों को कई चीजें मुफ़्त देने का वादा किया गया है. इनमें गरीब परिवारों की मेधावी कॉलेज छात्राओं को ई-स्कूटर देने का वादा शामिल है. साथ ही क्लास नौ से बारह तक की सभी छात्राओं को भी साइकिल दी जाएगी.

भारतीय जनता पार्टी ने पीडीएस के तहत एक लीटर खाने का तेल साल में चार बार देने का वादा किया है. एक किलो चना भी हर महीने दिया जाएगा.

बीजेपी ने घोषणापत्र में गुजरात को एफडीआई के मामले में सबसे बड़ा राज्य बनाने का वादा किया है. अगले पांच साल में राज्य में पांच लाख करोड़ का एफडीआई लाने का वादा किया गया है.

स्कूली छात्र

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अब हर काम के लिए ज़रूरी होगा बर्थ सर्टिफिकेट?

सरकार अब लगभग हर काम के लिए बर्थ सर्टिफिकेट को अनिवार्य बना सकती है.

'द हिंदू' के मुताबिक़ स्कूल-कॉलेज में दाखिले से लेकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और राज्य-केंद्र सरकार की नौकरियों में भी इसे अनिवार्य बनाया जा सकता है. ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट ज़ारी करने के लिए अब इसे जमा करना ज़रूरी होगा.

'द हिंदू' के मुताबिक़ सरकार इन बदलावों को लागू करने की तैयारी में जुट गई है. इन बदलावों को अंजाम देने के लिए उसने रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ (आरबीडी) एक्ट 1969 को संशोधित करने के लिए ड्राफ्ट बिल तैयार किया है.

बिल में प्रस्तावित बदलावों के मुताबिक़ अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के लिए मौत के सभी मामलों में डेथ सर्टिफिकेट की एक नकल देना अनिवार्य होगा, जिसमें इसमें मौत की वजह बताना होगा. मौत की वजह रिश्तेदारों के साथ स्थानीय रजिस्ट्रार को भी बताना ज़रूरी होगा.

हालांकि आरबीडी एक्ट के तहत जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है और इसके उल्लंघन पर सज़ा हो सकती है. लेकिन सरकार अब अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पर और जोर देगी. स्कूलों में दाखिले और शादियों के रजिस्ट्रेशन जैसी बेसिक सेवाओं के लिए जन्म प्रमाणपत्र को अनिवार्य बनाने पर सरकार ज़्यादा ज़ोर डालेगी.

गृह मंत्रालय की ओर से सुझाए गए संशोधनों के तहत इन बदलावों को लागू किया जाएगा.

बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है. यह सत्र 7 दिसंबर से शुरू होगा.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि ड्राफ्ट बिल पिछले साल पब्लिक डोमेन में रखा गया था. इस पर राय और बदलावों के सुझाव के बाद बिल तैयार किया गया है. विधि मंत्रालय इस बिल की समीक्षा कर रहे है. इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे सदन में पेश किया जाएगा.

आरबीडी एक्ट में संशोधन के बाद जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को फिलहाल राज्य और नगरपालिका स्तर पर संरक्षित किया जाता है. लेकिन अब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया भी इनके डेटाबेस रखेगा.

दिल्ली

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पीएम मोदी 18 घंटे मेरा काम रोकने के बारे में सोचते हैं: केजरीवाल

दिल्ली एक्साइज़ पॉलिसी केस की चार्जशीट में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम न होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र के ख़िलाफ़ हमले और तेज़ कर दिए हैं.

'इंडियन एक्सप्रेस' ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए अरविंद केजरीवाल के बयानों को प्रमुखता से छापा है.

अख़बार के मुताबिक़ अरविंद केजरीवाल ने कहा, "कहा जा रहा है कि इस केस में अतिरिक्त सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाख़िल की जा सकती है लेकिन हमारी जांच तो प्रधानमंत्री जी ज़िंदगी भर कराएंगे. जब तक हम ज़िंदा हैं जांच चलती रहेगी."

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 2015 जब से उन्होंने सरकार बनाई है तब से केंद्र सरकार उनके ख़िलाफ़ जांच करा रही है.

उन्होंने कहा, "मेरे सूत्रों ने बताया कि पीएम इस केस पर खुद निगरानी रख रहे हैं. वो सीबीआई-आईडी से नियमित मिलते हैं और कहते हैं कि सिसोदिया के ख़िलाफ़ जो भी सुबूत हो जुटाओ. लेकिन वे सुबूत नहीं जुटा पाए."

उन्होंने कहा, "आज हम देश के सामने गर्व से कह सकते हैं कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार है. हमारी पार्टी कट्टर ईमानदार है."

केजरीवाल ने मोदी पर हमला करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री जी, आप कहते हैं कि आप अठारह घंटे काम करते हैं. अठारह के अठारह घंटे आप यही सोचते हैं मैं किस तरह से केजरीवाल को रोकूं काम करने से? किस तरह से केजरीवाल के मंत्रियों को गिरफ़्तार करूं, किस तरह से कीचड़ फेंकूं."

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