नज़रिया: गुजरात में मोदी को टक्कर दे पाएंगे राहुल गांधी?

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गुजरात में चुनावी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात दौरा ख़त्म हो चुका है और सोमवार को फ़िर से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का गुजरात दौरा शुरू हो रहा है.
इस बार भी कांग्रेस उपाध्यक्ष कई मंदिर जा रहे हैं. कांग्रेस गुजरात में कितनी ताक़तवर है, पटेल और दलित वोट किधर हैं. इन सब सवालों को लेकर हमारे सहयोगी मोहम्मद शाहिद ने गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट से बात की.
अजय उमट के शब्दों में पढ़िये उनका नज़रिया.
पिछले 22 सालों से गुजरात में बीजेपी का राज चल रहा है और ऐसा पहली बार है कि नरेंद्र मोदी इस राज्य और इसकी राजनीति में पूरी तरह शामिल नहीं हैं.
विजय रुपाणी को आनंदीबेन पटेल की जगह लाया गया था क्योंकि बीजेपी को लग रहा था कि चुनौतिपूर्ण चुनाव होने वाला है. लेकिन पिछले तीन महीनों से एक माहौल बन रहा है.
हार्दिक पटेल के अनामत आंदोलन को बीजेपी नियंत्रित करने का सोच रही थी लेकिन वह उसे नहीं कर पाई. इसके अलावा अल्पेश ठाकुर नामक युवा ने ओबीसी मंच बना लिया जिसने बीजेपी के साथ समझौता नहीं किया. इसके बाद दलितों के नेता बनकर उभरे जिग्नेश मेवाणी का आंदोलन भी बीजेपी के ख़िलाफ़ जा रहा है.

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बीजेपी के ख़िलाफ़ कम चुनौतियां नहीं हैं. पिछले दो महीने में बीजेपी के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया में ज़बरदस्त अभियान चला है. 'विकास पागल हो गया है' हैशटैग से बीजेपी परेशान हुई है क्योंकि अब तक इसी सोशल मीडिया की बदौलत उसे वोट मिले थे.
गुजरात में जो विकास हुआ है वो बेरोज़गारी के साथ आया है. युवाओं को रोज़गार का मौका नहीं मिल रहा है. नोटबंदी, जीएसटी और रियल एस्टेट रेगुलेशन डिवेलपमेंट एक्ट (रेरा) उसकी वजह से मैन्युफैक्चरिंग, रियल एस्टेट, टेक्सटाइल, डायमंड क्षेत्र में बढ़ोतरी नहीं हुई है.
इसके कारण मंदी का एक माहौल है. इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी परेशान हैं. गुजरात दौरे के दौरान इसी परेशानी को देखते हुए पहले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी में रियायत की घोषणा की और कहा कि अब की दिवाली वह सुधारने के लिए आए हैं.
वह जानते हैं कि उन्हें माहौल सुधारना है इसके मद्देनज़र वह बार-बार गुजरात आ रहे हैं. दो दिन के अंदर उन्होंने मध्य, दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र और वडनगर के दौरे किए.
कितनी ताक़तवर कांग्रेस?

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इसके मुकाबले कांग्रेस और उसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी को देखें तो उन्होंने पिछली बार सौराष्ट्र का दौरा किया था और अब वह मध्य गुजरात का दौरा कर रहे हैं.
कांग्रेस मुस्लिमों का तुष्टिकरण नहीं कर रही है लेकिन वह सॉफ़्ट हिंदुत्व की ओर ज़रूर बढ़ रही है. इसी का संदेश देने के लिए वह द्वारका, चोटिला मंदिर गए थे. इस बार वह फागवेल के मंदिर भी जाएंगे. यह बेल्ट ओबीसी वोटों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है और राहुल यहां से अपने दौरे की शुरुआत कर रहे हैं.
राहुल गांधी इसलिए हर एक मंदिर में जा रहे हैं क्योंकि कोई न कोई मंदिर किसी न किसी समाज से जुड़ा है. यह एक संदेश देने की तरह है कि वह समाज के हर वर्ग की तरफ़ हैं. वह रास्ते में पड़ने वाले हर मंदिर में जाते हैं.
नरेंद्र मोदी ने 2002 गुजरात दंगों के बाद भी चुनावी यात्रा फागवेल मंदिर से शुरू की थी.
पटेल और दलितों का वोट

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गुजरात में पटेल वोट हमेशा भारतीय जनता पार्टी के साथ रहते थे और वह निर्णायक स्थिति में रहते हैं लेकिन अब यह भूतकाल हो चुका है. लेकिन ऐसा नहीं है कि यह सारा वोट कांग्रेस को जा रहा है.
हार्दिक पटेल के पटेल अनामत आंदोलन के कुछ कार्यकर्ताओं को कांग्रेस टिकट भी दे रही है. हार्दिक का ग्रुप 182 सीटों में से 20 टिकट मांग रहा है जिसमें से 9 टिकट का प्रस्ताव दिया गया है.
पटेलों के कई समुदाय हैं लेकिन वह वर्तमान सत्ता के साथ रहना चाहते हैं. पटेलों का वोट शायद बंटेगा जिसमें से 60-40 के रेशो से बीजेपी और कांग्रेस में वोट जाएंगे और यह समीकरण बदल भी सकते हैं.
दलितों का वोट अधिकतर कांग्रेस का रहा है. उनको उकसाने की कोशिश की जा रही है और उनके ख़िलाफ़ हुए अन्याय ने भी उनमें ग़ुस्सा दिखाया है.
कांग्रेस नेता अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव जीतने से पार्टी को हिम्मत ज़रूर मिली है लेकिन बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है. हालांकि, गुजरात में पूरी तरह चुनावी बिगुल बच चुका है और यह चुनाव मोदी बनाम राहुल गांधी बनता दिख रहा है.
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