गुजरात में आम आदमी पार्टी की कमान संभाल रहे गोपाल इटालिया को जानिए

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- Author, दीपल शाह
- पदनाम, बीबीसी गुजराती सेवा
गुरुवार को आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया को दिल्ली पुलिस की एक टीम ने राष्ट्रीय महिला आयोग के दफ़्तर के हिरासत में लिया था. उसी दिन शाम को उन्हें छोड़ भी दिया गया.
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके संबंध में महिला आयोग ने गोपाल इटालिया को नोटिस जारी किया था.
वीडियो में कथित तौर पर गोपाल इटालिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 'आपत्तिजनक भाषा' का इस्तेमाल किया था.
इसका संज्ञान लेते हुए महिला आयोग ने गोपाल इटालिया को नोटिस भेजा था. इसके अनुसार, वीडियो में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया था उसमें 'जाति को लकर भेदभाव, महिलाओं के प्रति द्वेष की भावना है और ये आपत्तिजनक' है
गुरुवार को गोपाल इटालिया ने ट्वीट पर कहा कि उन्हें 'गिरफ्तार करने' की धमकी दी जा रही है.
गोपाल इटालिया को हिरासत में लिए जाने के कुछ देर बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया. बाद में इटालिया ने इसे राजनीति से प्रेरित क़दम बताया और बीजेपी का पाटीदार विरोधी रुख़ क़रार दिया.
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इटालिया को हिरासत में लिए जाने के विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय महिला आयोग के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया. इस विवाद के बाद गोपाल इटालिया का नाम एक बार फिर प्रदेश में राजनीतिक चर्चाओं में सुनाई दे रहा है.
स्थानीय स्तर पर म्युनिसिपल चुनावों के कुछ सीटें जीतने के साथ अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने गुजरात की राजनीति में क़दम रखा. इन चुनावों से ठीक कुछ सप्ताह पहले आम आदमी पार्टी ने गोपाल इटालिया को गुजरात में पार्टी का अध्यक्ष बनाया था.

- गुजरात विधानसभा का कार्यकाल 18 फ़रवरी 2023 को ख़त्म होने वाला है
- यहाँ विधानसभा की 182 सीटों के लिए चुनाव आगामी महीनों में होने हैं
- बीते विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 99, कांग्रेस को 79 और अन्य को 4 सीटें मिली थीं
- यहाँ की विधानसभा में 13 सीटें अनुसूचित जाति और 27 सीटें अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित हैं
- बीते साल हुए म्युनिसिपल चुनावों में कुल 8,470 सीटों में से 6,236 बीजेपी के खाते में गई थीं. कांग्रेस को 1,805 सीटें मिली थीं और 42 सीटें आम आदमी पार्टी के हिस्से आई थीं


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गोपाल इटालिया को सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने के लिए जाना जाता है. वो कई तरह के मुद्दों पर सोशल मीडिया कैंपेन चलाते रहे हैं.
23 फ़रवरी 2022 को गुजरात के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों के नतीजों की घोषणा हुई. अधिकतर सीटें बीजेपी के खाते में गईं लेकिन सूरत में आम आदमी पार्टी की सफलता ने कइयों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा.
ये बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका था, ख़ासकर इसलिए क्योंकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल दरअसल सूरत से ही हैं. बीते विधानसभा चुनावों में यहाँ से बीजेपी के प्रत्याशी को जीत मिली थी.
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चुनाव नतीजों के बारे में कहा गया कि आम आदमी पार्टी ने बीजेपी और कांग्रेस के वोट में सेंध लगाई है.
उस वक़्त स्थानीय निवासी धर्मेश अमीन ने बीबीसी से कहा था, "सूरत के लोगों को चुनने के लिए एक तीसरा विकल्प मिला. आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के वोट शेयर में बड़ी सेंधमारी की है. कांग्रेस ही नहीं बीजेपी के हिस्से के वोट भी उसे मिले हैं."
इससे पहले आम आदमी पार्टी ने गुजरात में जाने माने गांधीवादी नेता कनुभाई कलासरिया के नेतृत्व में आगे बढ़ने की कोशिश की थी लेकिन उसे इसमें सफलता नहीं मिल पाई थी.
देश के इस प्रदेश में राजनीति कांग्रेस और बीजेपी के इर्द-गिर्द ही रही है. कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान जन लोकपाल की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ, इससे से आम आदमी पार्टी की उत्पत्ति हुई.
सिविल सोसायटी के कई नेताओं और बुद्धिजीवियों ने इस आंदोलन में शिरकत की थी. इसके बाद दिल्ली में जो विधानसभा चुनाव हुए उनमें आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को हरा कर जीत हासिल की.
अब गोपाल इटालिया जैसे एक युवा चेहरे को प्रदेश का पार्टी अध्यक्ष बनाकर पार्टी गुजरात में तीसरा मोर्चा बनकर उभरने की कोशिश में है.

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कौन हैं गोपाल इटालिया?
गुजरात के भावनगर के ताल्लकु रखने वाले गोपाल इटालिया ने अहमदाबाद से राजनीति शास्त्र में ग्रैजुएशन किया है.
मौजूदा वक़्त में वह सूरत में रहते हैं और राजनीति में सक्रीय हैं. सूरत के कई निवासी और युवा इटालिया को एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर जानते हैं. सूरत के वारछा-करटगाम इलाक़े में युवाओं पर उनका प्रभाव स्पष्ट दिखता है.
सोशल मीडिया पर भी उनके काफ़ी फॉलोअर्स हैं. सोशल मीडिया पर वो अक्सर सत्ताधारी बीजेपी की राजनीति के विरोध में या फिर कांग्रेस पर हमला करते दिखते हैं.
गुजरात में एलआरडी परीक्षा (लोकरक्षक रीक्रूटमेंट बोर्ड) को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं को उन्होंने समर्थन भी दिया था.
राजनीति में क़दम रखने से पहले गोपाल इटालिया सरकारी कर्मचारी थे, बाद में वो सामाजिक कार्यकर्ता बन गए.

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काम करते हुए पूरी की शिक्षा
बीबीसी से बातचीत में गोपाल इटालिया ने अपने जीवन के सफर के बारे में बताया.
उन्होंने कहा, "राजनीति और सामाजिक जीवन में प्रवेश करने से पहले मेरी ज़िंदगी आज से काफ़ी अलग थी. मैं बारहवीं कक्षा से आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर सका था क्योंकि मेरे कंधों को कई ज़िम्मेदारियां थीं. मैंने कई सेक्टर में अलग-अलग तरह की नौकरियां कीं."
"उसके बाद मैंने लोकरक्षक दल जॉइन किया. यहीं काम करते हुए मेरे मन में खयाल आया कि मैं इससे कहीं बेहतर काम कर सकता हूँ लेकिन मेरे सामने मुश्किल ये थी कि मैं अधिक पढ़ा-लिखा नहीं हूँ. इस बीच मैंने गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर समझ बनानी शुरू की. इसलिए मैंने राजनीति शास्त्र में ग्रैजुएशन किया."
वो कहते हैं, "मुझे अहमदाबाद में कलेक्टर के दफ़्तर में क्लर्क की नौकरी मिली. उसके बाद मेरा तबादला धानदुका हो गया. ये मेरी आख़िरी नौकरी थी."

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जब इटालिया ने मंत्री के ऊपर जूता फेंका
साल 2017 में गोपाल इटालिया ने गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री नितिन पटेल को फ़ोन किया और उनसे शरारबंदी क़ानून के कमज़ोर कार्यान्वयन को लेकर शिकायत की. इस बातचीत का ऑडिया वायरल हो गया. हालांकि इसका एक नतीजा ये भी हुआ कि इसके बाद गोपाल इटालिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई.
लेकिन इस विवाद के बाद गोपाल इटालिया का नाम घर-घर पहुँच गया. उन्हें सामान्य जीवन से लेकर सोशल मीडिया पर लोग जानने पहचानने लगे.
उन्होंने गुजरात विधानसभा के बाहर गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा के ऊपर जूता भी फेंका. इटालिया का कहना था कि राज्य में बढ़ रहे भ्रष्टाचार को लेकर विरोध जताने के लिए उन्होंने ऐसा किया.
इसके बाद उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ, लेकिन एक अहम बात ये हुई कि वो लोगों के बीच चर्चा विषय बन गए.

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'लोग मानते हैं कि राजनीति गंदी होती है'
अपने सफ़र और अपनी राजनीतिक विचारधारा के बारे में गोपाल इटालिया कहते हैं कि "ये बात सच है कि लोगों के बीच आम धारणा यही है कि राजनीति गंदी चीज़ है और विवादों से भरी है. लेकिन मेरा मानना है कि अगर अच्छे लोग सामने नहीं आएंगे तो बुरे लोग हालात का फ़ायदा उठाना जारी रखेंगे."
"इसलिए मैं लोगों के बीच जागरूकता फैला रहा हूँ और उनसे अपील कर रहा हूँ कि वो सिस्टम का हिस्सा बनें. अब जब पार्टी ने मेरे कंधों पर बड़ी ज़िम्मेदारी डाल दी है तो मैं भी अपना कर्तव्य पूरा करूंगा."
गोपाल 'कायदा कथा' नाम के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी जाने जाते हैं. इस कार्यक्रमों के ज़रिए वो लोगों को क़ानून और संविधान के बारे में जागरूक करने की कोशिश करते हैं.
इटालिया के ख़िलाफ़ कई मामले दर्ज हैं. इटालिया कहते हैं कि उनके ख़िलाफ़ ये सभी मामले राजनीति से प्रेरित हैं.
पाटीदार आरक्षण आंदोलन और ऊना दलित आंदोलन के बाद प्रदेश में कई ऐसे युवा चेहरे सामने आए जिन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की. इनमें पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी और गोपाल इटालिया शामिल हैं.
जिस वक़्त पाटीदार आंदोलन अपने हूजूम पर था उस वक्त एक तरफ़ युवाओं के बीच हार्दिक पटेल लोकप्रिय हो रहे थे, तो दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया पर गोपाल इटालिया युवाओं के दिलों को छू रहे थे.
हालांकि सोशल मीडिया पर कई युवा ये आरोप लगा रहे हैं कि आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद गोपाल इटालिया जिस तरह से धार्मिक जगहों पर जा रहे हैं और बयान दे रहे हैं वो उनके पहले के व्यवहार से अलग है.
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गुजरात में क्या नया राजनीतिक विकल्प मौजूद है?
अपनी राजनीति और राजनीतिक विचारधारा के बारे में गोपाल इटालिया कहते हैं, "अगर सरकार में बैठे लोग वो काम न करें जो उन्हें करना चाहिए और उनकी प्राथमिकताएं अलग हों, तो समस्या यहीं से पैदा होती है. अगर आप अच्छे उद्देश के लिए राजनीति में कदम रखते हैं तो इससे सिस्टम बेहतर होता है."
"और फिर आपका उद्देश्य अच्छा होता है तो लोग ख़ुद ही आपका समर्थन करते हैं. राजनीतिक पार्टीयां और नेता को आते-जाते रहेंगे, लेकिन प्रशासनिक ढांचा और लोग हमेशा रहेंगे."
कुछ लोगों का कहना है कि गोपाल इटालिया उन इलाक़ों में लोकप्रिय हैं जिन इलाक़ों में गुजरात के सौराष्ट्र के लोग अधिक संख्या में हैं.
इस पर गोपाल इटालिया का कहना है, "किसी के लिए भी ये सामान्य है कि वो जहाँ रहते हैं, उस जगह की समस्या के बारे में बात करें. व्यक्ति अपने आसपास की समस्याओं को नज़रअंदाज़ तो नहीं कर सकता."

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गुजरात में केजरीवाल ने गोपाल इटालिया को क्यों चुना?
जानकार कहते हैं कि राज्य में तीसरा विकल्प बन कर उभरने के लिए आम आदमी पार्टी को ज़मीनी स्तर पर काफ़ी काम करने की ज़रूरत है. वो मानते हैं कि प्रदेश में गोपाल इटालिया पार्टी के लिए अहम साबित हो सकते हैं.
राजनीतिक हलकों में गोपाल इटालिया के बढ़ती लोकप्रियता को लेकर चर्चा पहले ही हो रही थी. साथ ही ये चर्चा भी हो रही थी कि राजनीति के उनके तरीक़े से केजरीवाल को उम्मीद जगी और उन्होंने प्रदेश में उन्हें बड़ी ज़िम्मेदारी दी.
गोपाल इटालिया प्रदेश में पार्टी के लिए युवा चेहरा भी हैं और जाना-माना नाम भी. इसलिए शायद इस बार पार्टी ने प्रदेश में ज़मीन तैयार करने के लिए एक युवा नेता को चुनना पसंद किया.
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