दिल्ली के मंत्री राजेंद्र गौतम का इस्तीफ़ा, क्या गुजरात चुनाव के दबाव में आए केजरीवाल?

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- दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने दिया इस्तीफ़ा
- 5 अक्टूबर को हुए एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर विवादों में घिरे थे राजेंद्र पाल गौतम
- भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया था कि कार्यक्रम में हिंदू देवी देवताओं का अपमान किया गया.
- राजेंद्र पाल गौतम ने बीजेपी के आरोपों को ख़ारिज करते हुए उन्हें ग़लत बताया
- राजेंद्र पाल ने कहा कि इस मामले में अरविंद केजरीवाल को घसीटे जाने से आहत हो कर उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है

दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने रविवार को इस्तीफ़ा दे दिया है. अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण मंत्री रहे राजेंद्र पाल गौतम के बीते दिनों बौद्ध धर्म के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर काफ़ी विवाद हो रहा था.
राजेंद्र पाल गौतम जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे, उसका आयोजन इसी हफ़्ते (बुधवार, 5 अक्टूबर) को दिल्ली के डॉक्टर अंबेडकर भवन में किया गया था.
कार्यक्रम में शिरकत करने वाले करीब 10 हज़ार लोगों के साथ मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने वहां कुछ प्रतिज्ञाएं दोहराई थीं. कथित तौर पर इनमें 'हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने' की शपथ शामिल थी.
इसे लेकर विवाद छिड़ गया. विपक्ष उनके साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी घेरने लगा. ख़ासकर भारतीय जनता पार्टी उन पर बहुत हमलावर हो गई.
इस विवाद का असर दिल्ली से लेकर गुजरात तक नज़र आया. गुजरात बीजेपी के नेताओं ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल 'हिंदू विरोधी' है. इसे लेकर कई ट्वीट भी किए गए. वहीं अरविंद केजरीवाल ने भी भारतीय जनता पार्टी पर पलटवार किया.
केजरीवाल ने एक बयान में कहा, "जिस दिन मेरा जन्म हुआ उस दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी थी. और मैं... मुझे भगवान ने एक स्पेशल काम देकर भेजा है. वो है इन 'कंस की औलादों' का नाश करने के लिए."
कई लोगों ने केजरीवाल के इस बयान को भी विवाद से ही जोड़कर देखा. इस बयान पर भी विवाद शुरू हो गया और बीजेपी नेता केजरीवाल को घेरने लगे.

आज बंधन मुक़्त: राजेंद्र पाल
इसी बीच राजेंद्र पाल गौतम आरोप लगाते रहे कि बीजेपी 'अफ़वाह' फैला रही है. हालांकि, राजेंद्र पाल गौतम ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
उन्होंने अपना इस्तीफ़ा ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा, "आज महर्षि वाल्मीकि जी का प्रकटोत्सव दिवस है एवं दूसरी ओर मान्यवर कांशीराम साहेब की पुण्यतिथि भी है. ऐसे संयोग में आज मैं कई बंधनों से मुक्त हुआ और आज मेरा नया जन्म हुआ है. अब मैं और अधिक मज़बूती से समाज पर होने वाले अत्याचारों व अधिकारों की लड़ाई को बिना किसी बंधन के जारी रखूँगा."
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गुजरात चुनाव के दबाव में इस्तीफ़ा?
राजेंद्र पाल गौतम के इस्तीफ़े के बाद सवाल उठा कि क्या आम आमदी पार्टी ने उन्हें 'डैमेज कंट्रोल' करने के लिए इस्तीफ़ा देने को कहा? दरअसल, बीजेपी की दिल्ली इकाई के साथ गुजरात इकाई भी इस मुद्दे को ज़ोरशोर से उठा रही थी.
कई विश्लेषकों की राय थी कि इस मामले से गुजरात में आम आदमी पार्टी को नुक़सान हो सकता है.
गौतम के इस्तीफ़े पर बीजेपी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने गुजरात चुनाव के दबाव में राजेंद्र गौतम से इस्तीफ़ा लिया है.
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल का दबाव में आकर राजेंद्र गौतम से इस्तीफ़ा लेना निश्चित तौर पर बीजेपी की जीत है. उन्होंने कहा, "केजरीवाल ने राजेंद्र पाल गौतम से इस्तीफ़ा गुजरात चुनाव की वजह से लिया है."
उन्होंने ये भी कहा कि "गुजरात की जनता के सामने अरविंद केजरीवाल का हिंदू विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है."
आदेश गुप्ता ने कहा कि राजेंद्र पाल गौतम का इस्तीफ़ा 'निश्चित ही बीजेपी की जीत है लेकिन उन्होंने हिंदुओं से माफ़ी नहीं मांगी है. उन्हें और केजरीवाल, दोनों को माफ़ी मांगनी चाहिए.'
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'धूल झोंक रही है आप'

दिल्ली बीजेपी के पूर्व प्रमुख विजेंदर गुप्ता ने ट्वीट किया, "मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम का इस्तीफ़ा देना लोगों की आँख में मात्र धूल झोंकना है,क्योंकि अभी तक हिंदू देवी देवताओं को कहे गये अपशब्द ना तो वापस लिए गए हैं और न ही @ArvindKejriwal जी ने अभी तक माफ़ी माँगी."
विजेंदर गुप्ता ने दो दिन पहले अपने ट्वीटिर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया था और लिखा था कि, "AAP सरकार के मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम हिंदुओं के विरूद्ध घृणा फैला रहे थे, पकड़े गये तो पूरी @AamAadmiParty बिल में घुस गई. CM केजरीवाल सहित सभी नेताओं को साँप सूँघ गया है."
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कांग्रेस ने कहा- आप बीजेपी की 'बी' टीम
उधर पंजाब कांग्रेस के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा ने राजेंद्र पाल गौतम के इस्तीफ़े पर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों को घेरे में लिया.
उन्होंने ट्वीट किया, "बीजेपी ने प्रस्ताव का आप ने अनुमोदन किया. आम आदमी पार्टी अपनी मदर पार्टी बीजेपी के दबाव में आ कर दिल्ली के अपने मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को बर्खास्त कर दिया. क्या आम आदमी पार्टी बीजेपी की 'बी' टीम है इसे लेकर आपको कोई और सबूत चाहिए?"

इस्तीफ़े में क्या लिखा राजेंद्र पाल ने?

राजेंद्र गौतम ने ट्विटर पर उस बौद्ध दीक्षा समारोह के बारे में बताया है जिसकी वजह से उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है.
राजेंद्र पाल गौतम ने अपने इस्तीफ़े में लिखा कि वो एक अंबेडकरवादी हैं.
उन्होंने अपने इस्तीफ़े में लिखा, "वो आयोजन दीक्षा दिवस पर पूरे देश में हज़ारों जगहों पर होता है और उसमें करोड़ों लोग शामिल होते हैं. जिस तरह 14 अक्टूबर 1956 को जिस तरह डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर ने इस जातिगत उत्पीड़न और छुआछूत के ख़िलाफ़ जो दीक्षा ली थी बुद्ध के धर्म की, वहां 22 प्रतिज्ञाएं अपने अनुयायियों की दी थी. 14 अक्टूबर 1956 से लेकर आज तक पूरे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हर साल हज़ारों जगह आयोजन होता है जहां करोड़ों लोग ये दीक्षा लेते वक़्त उन 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराते हैं."
राजेंद्र पाल गौतम ने लिखा, "बाबासाहेब द्वारा दिलाई वो 22 प्रतिज्ञाएं जिन्हें भाजपा सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग श्री थावर चंद गहलोत ने 'डॉ. बाबासाहेब अंबेडकरः राइटिंग्स एंड स्पीचेज़, वॉल्यूम-17' में भी छपवाया था. ये प्रतिज्ञाएं हर साल देश के कोने-कोने में आयोजित हज़ारों स्थान पर करोड़ों लोगों द्वारा दोहराई जाती हैं."
"बाबासाहेब एवं उनके द्वारा दिलाई गई इन 22 प्रतिज्ञाओं से भाजपा को आपत्ति है, जिसका इस्तेमाल करके भाजपा गंदी राजनीति कर रही है. और इससे आहत होकर मैं अपने मंत्री पद से त्यागपत्र दे रहा हूं."
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क्या है मामला, क्यों हुआ बवाल?
5 अक्टूबर यानी विजयदशमी के दिन राजधानी दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में राजेंद्र पाल गौतम के शामिल होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. राजेंद्र पाल गौतम ने इस बारे में ट्वीट करके जानकारी दी थी.
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, "चलो बुद्ध की ओर मिशन जय भीम बुलाता है. आज 'मिशन जय भीम' के तत्वाधान में अशोका विजयदशमी पर डॉ. आंबेडकर भवन रानी झांसी रोड पर 10,000 से ज़्यादा बुद्धिजीवियों ने तथागत गौतम बुद्ध के धम्म में घर वापसी कर जातिविहीन व छुआछूत मुक्त भारत बनाने की शपथ ली. नमो बुद्धाय, जय भीम!"
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लेकिन बीजेपी ने आरोप लगाया था कि इस कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के नेता राजेंद्र पाल गौतम ने 'हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया था.'
बीजेपी ने आम आदमी पार्टी को 'हिंदू विरोधी' बताया था. हालांकि राजेंद्र पाल गौतम ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया था.
इस बाबत वायरल एक वीडियो में दिख रहा है कि भीड़ में मंच से भगवा कपड़ों में एक शख़्स कुछ बोल रहे हैं, वे जो बोल रहे हैं उसे लोग हाथ उठाकर दोहरा रहे हैं.
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दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने इस बारे में कहा था, "अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री का बहुत ही नफ़रत फैलाने वाला बयान है. जिस तरह उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के प्रति अपमान का भाव दिखाया है और जिस तरह से नफरत फैलाने वाला काम किया है वो सिर्फ निंदा योग्य ही नहीं बल्कि उन्हें इसके लिए सज़ा मिलनी चाहिए."
बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में राजेंद्र पाल गौतम को मंत्री पद से बर्ख़ास्त करने की मांग की. उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इसके लिए माफ़ी मांगें.
उन्होंने कहा कि हिंदू देवताओं और धर्म के ख़िलाफ़ कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी का शपथ लेना मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अनुमति पर हुआ है.
दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी.
उनका कहना था कि "यह कोई एक अलग घटना नहीं है. आप के चरित्र में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करना है. हमारी मांग है कि केजरीवाल को गौतम को तुरंत बर्ख़ास्त करना चाहिए."
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इस्तीफ़े के बाद क्या बोले राजेंद्र पाल गौतम?

राजेंद्र पाल गौतम ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में ये भी बताया कि इस तरह के दीक्षा समारोह में नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस जैसे बीजेपी के शीर्ष नेता भी शामिल होते रहे हैं. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि इस साल के समारोह के दौरान दो केंद्रीय मंत्री भी शामिल हुए.
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा, "उन 22 प्रतिज्ञाओं को मोदी जी की सरकार ने 2017 में इन प्रतिज्ञाओं को छपवाया भी है. नागपुर की दीक्षा भूमि में शिलापट्ट पर वो 22 प्रतिज्ञाएं लिखवा कर लगवाई हुई हैं. उसमें गडकरी जी भी जाते हैं, उसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर देवेंद्र फडणवीस जी भी गए हैं. उसमें आज की तारीख़ में भारत सरकार में दो केंद्रीय मंत्री वो इस बार के आयोजन में गए हैं."
"मेरे नेता अरविंद केजरीवाल जी ने मुझे इतना सम्मान दिया और सहयोग दिया (अच्छी योजनाएं बनाने में), उनको जिस तरह घसीटा गया इस मामले में, जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी उनका इस मामले से कुछ लेना देना ही नहीं है, मेरी पार्टी का दीक्षा दिवस समारोह से लेना देना ही नहीं है.
जिस तरह भारतीय जनता पार्टी ने इसे मुद्दा बना कर इसमें अरविंद केजरीवाल जी को घसीटा गया और इतना बवाल मचाया गया, इससे आहत हो कर मैंने इस्तीफ़ा दिया है."
दिल्ली सरकार में राजेंद्र पाल गौतम गुरुद्वारा चुनाव मंत्री भी थे.
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