केजरीवाल बोले- मनीष सिसोदिया को मिले भारत रत्न, पर क्या कहते हैं नियम?

इमेज स्रोत, Hindustan Times
- Author, अनंत प्रकाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीते सोमवार गुजरात में कहा है कि उनके डिप्टी मनीष सिसोदिया को शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम के लिए भारत रत्न मिलना चाहिए.
केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये बात कही है.
उन्होंने कहा, "जिस व्यक्ति को पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था सौंप देनी चाहिए. जिस व्यक्ति ने पांच साल के अंदर करिश्मा करके दिखा दिया. मौजूदा रवायती पार्टियां सत्तर साल में जो काम नहीं कर पाईं, इस व्यक्ति ने वो काम करके दिखा दिया. सरकारी स्कूलों को शानदार बना दिया, देश के ग़रीब बच्चों को भविष्य दे दिया. "
"उस व्यक्ति पर सीबीआई के छापे पड़वाते हो तुम लोग...और फिर ये अनर्गल बातें कर रहे हो. ऐसे व्यक्ति को तो भारत रत्न मिलना चाहिए. प्रधानमंत्री जी को बुलाकर कहना चाहिए कि मनीष जी हमें बताइए कि कैसे शिक्षा व्यवस्था ठीक करें."
भारतीय जनता पार्टी के महासचिव बीएल संतोष ने केजरीवाल के इस बयान पर तीखा कटाक्ष किया है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, "सत्येंद्र जैन को पद्म विभूषण...मनीष सिसोदिया को भारत रत्न और अब अगला खुद के लिए नोबेल पुरस्कार...सही जा रहे हैं..."
बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच दिल्ली में कथित शराब घोटाले की वजह से तनातनी जारी है. ऐसे में आरोप - प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है.
लेकिन सवाल ये उठता है कि भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान किसी शख़्स को किस स्तर के योगदान के लिए मिलता है. और इस सम्मान को देने के लिए क्या नियम कायदे कानून हैं.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त, 1
क्या कहते हैं नियम

केंद्रीय गृह मंत्रालय के नियमों के मुताबिक़-
- ये सम्मान किसी भी क्षेत्र में असाधारण काम करने वाले शख़्स को दिया जा सकता है. हालांकि, असाधारण योगदान को परिभाषित करने के लिए कोई पैमाना नहीं है.
- भारत के प्रधानमंत्री इस सम्मान के लिए संबंधित व्यक्तियों के नाम भारत के राष्ट्रपति को भेजते हैं. इसके लिए औपचारिक रूप से सुझाव देने की भी ज़रूरत नहीं होती है.
- किसी भी एक साल में अधिकतम तीन लोगों को ये अवॉर्ड दिया जा सकता है. इस अवॉर्ड में किसी तरह की आर्थिक राशि देने का प्रावधान नहीं है.

अब तक ये सम्मान कुल 48 लोगों को मिल चुका है. इससे पहले साल 2019 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.
उनके साथ ही संगीतकार भूपेन हजारिका और नानाजी देशमुख को 2019 में मरणोपरांत ये सम्मान दिया गया था.
मोदी सरकार में सबसे पहले साल 2015 में अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय (मरणोपरांत) को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

इमेज स्रोत, Twitter/PIB_India
जब तेंदुलकर को अवॉर्ड देने पर मचा बवाल
लेकिन साल 2014 में सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न से सम्मानित करने की वजह से तत्कालीन यूपीए सरकार विवादों के घेरे में आ गयी थी.
विपक्षी दल बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी सचिन तेंदुलकर को ये प्रतिष्ठित सम्मान देने पर विरोध दर्ज कराया था.
बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में इस मामले में एक एफ़आईआर भी दर्ज कराई गई थी, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और खेल मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह का नाम शामिल किया गया था.
ऐतिहासिक रूप से ग़ैर-कांग्रेसी नेताओं को समय पर भारत रत्न न दिए जाने पर कांग्रेस विवादों के घेरे में आती रही है.
इस सम्मान को देने से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठते रहे हैं. एक सवाल ये है कि भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान को देने का फ़ैसला प्रधानमंत्री के विवेक पर कैसे लिया जा सकता है.
वरिष्ठ पत्रकार अदिति फडणीस मानती हैं 'ये बातें कहने में अच्छी लगती हैं कि फलां व्यक्ति को भारत रत्न दे दिया जाए, पद्म विभूषण दे दिया जाए लेकिन भारत रत्न जहां अब्दुल कलाम जैसे लोगों को मिला था, वहां मनीष सिसोदिया के लिए इस तरह की उपाधि मुझे ठीक नहीं लगती."
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त, 2
भारत रत्न सम्मान का अवमूल्यन?
सिर्फ़ प्रधानमंत्री की ओर से नाम सुझाने वाले नियम पर आपत्ति जताते हुए अदिति फडणीस ने कहा, "इसमें कोई शक नहीं है कि इस सम्मान को देने की प्रक्रिया में जितने ज़्यादा लोग शामिल हों, उतना ही अच्छा है. क्योंकि ये एक ख़ैरात नहीं है. और न ही ये किसी राजा का फरमान है कि मैंने फलां को भारत रत्न दिया. ये सामंतवादी तोहफ़े जैसा नहीं होना चाहिए. इसमें जितना ज़्यादा विचार-विमर्श हो, उतना अच्छा है. हमारे लोकतंत्र में कोई भी निर्णय अच्छी तरह से ठोक पीटकर लिया जाना चाहिए और एक आदमी के हाथ में नहीं होना चाहिए."
बता दें कि सचिन तेंदुलकर को सम्मान देने से पहले नियमों में बदलाव किया गया था. इससे पहले ये अवॉर्ड कला, साहित्य, विज्ञान और लोक सेवा में किए गए शानदार काम के लिए दिया जाता था.
इसके बाद ये अवॉर्ड किसी भी क्षेत्र में असाधारण काम करने वालों के लिए खोल दिया गया. यूपीए सरकार पर इस सम्मान का अवमूल्यन करने का आरोप भी लगाया गया था.
अदिति फडणीस बताती हैं, "कई बार राजनीतिक पचड़ों में फंसने की वजह से भारत की सबसे ऊंची उपाधि का अवमूल्यन होने का डर रहता है. ऐसे में हमें उस स्थिति पर पहुंचना ही नहीं चाहिए जहां भारत रत्न की उपाधि क्यों दी, किसे दी, और कैसे दी जैसे सवाल उठें."
ये भी पढ़ें -
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















