मनीष सिसोदिया पर सीबीआई ने अपनी एफ़आईआर में क्या-क्या लिखा और क्या है दिल्ली की नई शराब नीति

इमेज स्रोत, Vipin Kumar/Hindustan Times via Getty Images
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई की टीम ने शुक्रवार को नई आबकारी नीति में कथित भ्रष्टाचार के मामले को लेकर छापेमारी की. सीबीआई ने इसी मामले में 21 और ठिकानों पर भी छापेमारी की है.
मनीष सिसोदिया और सीएम अरविंद केजरीवाल ने आरोपों को झूठा बताया है. वहीं बीजेपी नेताओं ने कहा है कि इस मामले से केजरीवाल सरकार का भ्रष्टाचार सामने आया है.
मनीष सिसोदिया का कहना है कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया जा रहा है. वहीं, सीबीआई ने एफ़आईआर में उन पर लाइसेंस धारकों को ग़लत तरीक़े से फ़ायदा पहुंचाने के लिए नई आबकारी नीति के निर्माण और उसे लागू करने में अनियमितताएं बरतने का आरोप लगाया है.
साथ ही उन पर आबकारी नीति में गैर-क़ानूनी ढंग से बदलाव करने का आरोप भी है. एफ़आईआर में लाइसेंस धारकों से सरकारी कर्मचारियों को पैसे मिलने का भी ज़िक्र किया गया है.
क्या कहती है सीबीआई की एफ़आईआर-
सीबीआई ने इस मामले में 17 अगस्त, 2022 को एफ़आईआर दर्ज की थी जिसमें सबसे पहला अभियुक्त मनीष सिसोदिया को बनाया गया है और कहा गया है कि बिचौलियों ने ग़लत तरीक़ों से फ़ायदा पहुंचाने में मदद की है. बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र के. मोहंती ने बताया है कि सीबीआई की एफ़आईआर में और क्या-क्या कहा गया है-
- सीबीआई ने मनीष सिसोदिया और अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 477-ए (अनुचित लाभ लेने के लिए अकाउंट्स के साथ फ़र्ज़ीवाड़ा) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कुछ प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है.
- मनीष सिसोदिया और तत्कालीन आबकारी आयुक्त ए गोपी कृष्णा और अन्य लोगों ने लाइसेंस धारकों को अनुचित तरीक़े से फायदा पहुंचाने के लिए सक्षम प्राधिकरण से मंज़ूरी लिए बिना आबकारी नीति, 2021-2022 से जुड़े फ़ैसले लिए थे.
- आरोप है कि आबकारी नीति में गैर-क़ानूनी तरीक़े से बदलाव हुए. वहीं, लाइसेंस फ़ीस और बिना अनुमति के लाइसेंस विस्तार में लाइसेंस धारकों को अनुचित फ़ायदे पहुंचाने के लिए नियमों का पालन नहीं किया गया.
- सूत्र के हवाले से लिखा गया है कि कुछ लाइसेंस धारक सरकारी कर्मचारियों तक पैसे पहुंचाने के लिए रिटेल विक्रेताओं को क्रेडिट नोट जारी कर रहे हैं.
- एफ़आईआर में बताया गया है कि बड्डी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे सिसोदिया के करीबी सहयोगी हैं. वो लाइसेंस धारकों से इकट्ठा किए गए पैसे अभिुयक्त सरकारी कर्मचारियों तक पहुंचाते थे.
- एक कंपनी महादेव लिकर को लाइसेंस जारी किया गया था. सनी मारवाह इसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हैं. सनी मारवाह शराब कारोबारी पोंटी चड्डा (जिनकी साल 2012 में हत्या हुई थी) के परिवार की कंपनियों में निदेशक भी हैं. मारवाह अभियुक्त सरकारी कर्मचारियों के संपर्क में थे और उन्हें नियमित तौर पर पैसे पहुंचा रहे थे.

इमेज स्रोत, ANi
- दिल्ली की मंत्रिपरिषद ने पहले उप मुख्यमंत्री को पूरी नीति में ज़रूरत होने पर छोटे-मोटे कुछ बदलाव करने का अधिकार दिया था. लेकिन, तत्कालीन उप-राज्यपाल की सलाह पर 21 मई, 2021 को मंत्रिपरिषद ने ये फ़ैसला वापस ले लिया था. इसके बावजूद आबकारी विभाग ने उप मुख्यमंत्री की अनुमति से विचाराधीन फ़ैसले लिए और लागू भी किए यानी नीति में बदलाव किए गए.
- सीबीआई ने एफ़आईआर में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रवीण राय के पत्र का भी ज़िक्र किया है जिसमें लिखा है कि प्राथमिक तौर पर ये लगता है कि इस मामले में आबकारी विभाग की कार्रवाई में नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया है. इससे सरकारी ख़ज़ाने को भी बड़ा नुक़सान हुआ है. इसलिए, ये मामला आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जा सकता है.
अगर मनीष सिसोदिया और अन्य अभियुक्त इस मामले में संबंधित अदालत में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें कम से कम छह महीने के कारावास की सज़ा हो सकती है.
दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली की आबकारी नीति को लागू करने में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच की सिफ़ारिश की थी.

इमेज स्रोत, Getty Images
क्या थी नई शराब नीति
नई शराब नीति 2020 में प्रस्तावित की गई थी जिसे नवंबर 2021 में लागू किया गया. इसके तहत दिल्ली को 32 ज़ोन में बांटा गया और हर ज़ोन में 27 दुकानें खुलनी थीं. इस नीति के तहत सिर्फ़ निजी दुकानों पर ही शराब बेची जा सकती थी. यानी सरकारी दुकानें पूरी तरह बंद कर दी गई थीं. हर नगर निगम वार्ड में 2-3 दुकानें खोली जानी थीं.
इसका मक़सद लिकर माफ़िया और काला बाज़ारी को ख़त्म करना और शराब की दुकानों का समान वितरण सुनिश्चित करना था.
इसके लिए दिल्ली सरकार ने लाइसेंस धारकों के लिए नियमों में कुछ ढील भी दी थी. जैसे उन्हें डिस्काउंट देने और सरकारी एमआरपी की बजाय अपनी कीमत खुद तय करने की अनुमति देना. इसके बाद विक्रेताओं ने डिस्काउंट दिए. लेकिन, विपक्ष के विरोध के बाद कुछ समय के लिए डिस्काउंट वापस भी ले लिए गए थे.

इमेज स्रोत, Getty Images
कैसे शुरू हुआ मामला
इस मामले की शुरुआत 8 जुलाई को हुई थी जब दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को एक रिपोर्ट सौंपी थी. इसमें मनीष सिसोदिया पर कमिशन और रिश्वत के लिए शराब विक्रेता लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ देने का आरोप लगाया गया था.
ये भी आरोप था कि इस कमिशन और रिश्वत का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में किया था.
उप-राज्यपाल के इस मामले में सीबीआई जांच की सिफ़ारिश करने के बाद एक अगस्त को मनीष सिसोदिया ने नई शराब नीति को वापस ले लिया. इसके बाद दिल्ली में सिर्फ़ सरकारी शराब की दुकानों को खोले जाने की अनुमति है.
सीबीआई के अलावा दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (आओडब्ल्यू) भी दिल्ली आबकारी विभाग में अलग से जांच कर रही है.

इमेज स्रोत, ANI
मुख्य सचिव की रिपोर्ट क्या कहती है
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि उप-राज्यपाल और मुख्यमंत्री को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक मनीष सिसोदिया ने बिना उप-राज्यपाल की मंज़ूरी के आबकारी नीति में बदलाव किए हैं. जैसे कि लाइसेंस फीस में 144.36 करोड़ की छूट दी गई. इसके लिए सीधे मनीष सिसोदिया ने आदेश दिए थे और कोरोना महामारी का कारण बताया गया था.
अधिकारियों के मुताबिक लागू हो चुकी नीति में किसी भी बदलाव को आबकारी विभाग को पहले कैबिनेट और फिर उप-राज्यपाल के पास अनुमति के लिए भेजना होता है. कैबिनेट और उप-राज्यपाल की अनुमित के बिना हुए कोई भी बदलाव गैर-क़ानूनी कहलाएंगे.
रिपोर्ट में ये भी आरोप लगाया गया है कि मनीष सिसोदिया ने विदेशी शराब की कीमतें पुनर्निर्धारित करके और प्रति बीयर 50 रुपये आयात शुल्क हटाकर लाइसेंस धारकों को अनुचित फायदा पहुंचाया था. इससे विदेशी शराब और बीयर सस्ती हो गई और सरकारी ख़ज़ाने को नुक़सान पहुंचा.

इमेज स्रोत, Mohd Zakir/Hindustan Times via Getty Images
आर्थिक अपराध शाखा की जांच में क्या मिला
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ईडब्ल्यूओ को जुलाई में 15 दिनों के दौरान आबकारी विभाग की बैठकों की वीडियो रिकॉर्डिंग मिली है.
ईडब्ल्यूओ ने आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त को कथित अवैध लाइसेंस वितरण को लेकर जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है. साथ ही नई नीति और निविदा से जुड़े कई दस्तावेज़ों की भी मांग की है.
साथ ही ईडब्ल्यूओ ने विभाग से शराब की दुकानों का लाइसेंस पाने वाले आवेदकों के आवेदन फॉर्म मांगे हैं. ये भी बताने के लिए कहा है कि एकाधिकार और कार्टेल बनने से रोकने के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन किया गया है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















