बीजेपी विधायक बोले, ‘समझाने गए थे पर दिल्ली पुलिस ने केस कर दिया कि हमने जिहादी मारे’: प्रेस रिव्यू

नंद किशोर गुर्जर

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उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने बीते रविवार दिल्ली में आयोजित विराट हिंदू सभा में 'संकेत दिए हैं कि वह 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में शामिल' थे.

अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, विराट हिंदू सभा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें नंद किशोर गुर्जर ये 'स्वीकार करते दिख रहे हैं कि वे 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में शामिल' थे.

अख़बार के मुताबिक़, इस वीडियो में गुर्जर कहते दिख रहे हैं - "हम लोग किसी को छेड़ते नहीं है लेकिन हमारी बहन बेटी को अगर कोई छेड़े तो हम छोड़ते भी नहीं. दिल्ली के अंदर सीएए को लेकर दंगा हुआ. तब ये जेहादी हिंदुओं को मारना शुरू किए. आप लोग थे… अपने घर में घुसा दिए. हमारे ऊपर आरोप लगा दिया कि हम 2.5 लाख लोगों को लेकर दिल्ली में घुसे."

"हम तो समझाने के लिए गए थे लेकिन हम पर पुलिस ने केस दर्ज कर दिया कि हमने जेहादियों को मारने का काम किया. हम जिहादियो को मारेंगे. हमेशा मारेंगे."

हालांकि, द इंडियन एक्सप्रेस ने जब उनसे इस पर सवाल किया तो उन्होंने दावा किया कि वह लोनी और गाजियाबाद में हिंसा के बारे में बोल रहे थे.

दिल्ली पुलिस ने इस सभा में दिए गए बयानों के मामले में केस दर्ज कर लिया है.

इस सभा में बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा से लेकर जगत गुरू योगेश्वर समेत कई नेताओं ने आपत्तिजनक बयान दिए थे.

दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन

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दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी के मंत्री सत्येंद्र जैन के ख़िलाफ़ बेनामी संपत्ति लेनदेन का मामला बंद कर दिया है.

आयकर विभाग ने साल 2017 में जैन के ख़िलाफ़ बेनामी कंपनियों से ज़मीन की ख़रीद-फरोख़्त के मामले में बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम 2016 के तहत जांच शुरू की थी.

साल 2017 में ही जैन ने इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को जैन समेत अन्य मामलों पर सुनवाई करते हुए उनकी दलील स्वीकार कर ली है.

अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा की पीठ ने जैन समेत उन तमाम याचिकाओं को स्वीकार किया जिनमें संशोधित बेनामी संपत्ति कानून के तहत कार्रवाई किए जाने को चुनौती दी गयी थी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने इन याचिकाओं को बीती 23 अगस्त को आए सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के आधार पर स्वीकार किया जिसमें सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि संशोधित कानून को भूतकाल में लागू नहीं किया जा सकता.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसके बाद ट्वीट करते हुए लिखा है - 'सत्येंद्र जैन के ख़िलाफ़ कोर्ट ने मामला ख़ारिज किया. इन्होंने एक ईमानदार आदमी को ज़बरदस्ती इतने महीनों से जेल में डाला हुआ है. ये लोग अगर अपना समय फ़र्ज़ी केस करने की बजाय राष्ट्र निर्माण के कामों में लगायें तो कितना अच्छा हो!'

सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने मांगी सांसदों - विधायकों के ख़िलाफ़ लंबित मामलों की लिस्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी उच्च न्यायालयों से कहा है कि वे सांसदों और विधायकों के ख़िलाफ़ पांच साल से अधिक समय से लंबित आपराधिक मामलों और उनके शीघ्र निपटारे के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दें.

हिंदी अख़बार अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने अपने 10 अगस्त 2021 के आदेश को भी संशोधित किया है, जिसमें उसने कहा था कि सांसदों और विधायकों के ख़िलाफ़ मामलों की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारियों को कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना नहीं बदला जाना चाहिए.

पीठ ने न्याय मित्र वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया की दलील पर गौर करते हुए कहा है कि पदोन्नति या स्थानातंरण के चलते कई न्यायिक अधिकारियों द्वारा विशेष अदालत के प्रभार से मुक्त होने के लिए आवेदन दायर किए जा रहे हैं. पीठ ने 10 अगस्त 2021 के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ऐसे न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश देने के लिए स्वतंत्र होंगे.

पीठ ने कहा कि सभी हाईकोर्ट एक हलफ़नामा दाखिल करें जिसमें सांसदों और विधायकों के ख़िलाफ़ पांच साल से अधिक समय से लंबित आपराधिक मामलों की संख्या और उनके त्वरित निपटारे के लिए उठाए गए कदमों का ज़िक्र हो. हलफ़नामे चार हफ़्तों में दायर किए जाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने ये बात वकील अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कही जिसमें आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने पर नेताओं के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी.

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