उद्धव ठाकरे बनाम एकनाथ शिंदे: दशहरा मेले के भाषण में किन मुद्दों पर एक-दूसरे को घेरेंगे

उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे

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    • Author, दीपाली जगताप
    • पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता

महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में पहली बार शिवसेना के नेता दो अलग-अलग दशहरा सभा कर रहे हैं. हमेशा की तरह शिवाजी पार्क में शिवसेना की दशहरा सभा होगी जिसे उद्धव ठाकरे संबोधित करेंगे. वहीं बाल ठाकरे की शिवसेना पर अपना दावा करने वाले शिंदे समूह की बैठक बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में होगी.

इसी साल 20 जून को शिवसेना के इतिहास में सबसे बड़ा विद्रोह हुआ. इसके बाद पिछले चार महीनों में तेज़ी से घटनाक्रम में बदलाव देखने को मिला. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार का पतन हुआ जबकि शिंदे गुट और बीजेपी ने मिलकर राज्य में सरकार का गठन किया. लेकिन इसके बाद सबसे बड़े सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिला है, वो सवाल यही है कि शिवसेना पर किसका दावा है?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पांच अक्टूबर को दशहरा मेले के भाषण के दौरान ठाकरे बनाम शिंदे तकरार की स्पष्ट तस्वीर का पता चलेगा. इसलिए राजनीतिक विश्लेषकों के साथ-साथ जनता में भी उत्सुकता है कि दोनों नेता अपने संबोधनों में क्या कुछ कहेंगे.

हर साल की तरह शिवाजी पार्क मैदान में शिवसेना का दशहरा समागम हो रहा है. शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने इसी शिवाजी पार्क में कई बैठकें की थीं और अपनी पार्टी का प्रचार किया था. इसी पार्क में शिवसेना ने कई बड़े बदलाव देखे और कई बाल ठाकरे ने यहां कई अहम सभाएं बुलाईं.

इतना ही नहीं, बाल ठाकरे का स्मारक स्थल भी इसी जगह है. इसलिए शिव सैनिकों का इस पार्क से भावनात्मक जुड़ाव है. इसको देखते हुए पार्टी के सबसे बड़े संकट के दौर में उद्धव ठाकरे, शिव सैनिकों के सवालों का कितना और क्या जवाब दे पाते हैं, यह महत्वपूर्ण हो गया है.

वहीं दूसरी तरफ़ शिंदे गुट ने दावा किया है कि असली शिवसेना हमारी है. अब केंद्रीय चुनाव आयोग को इस पर फ़ैसला लेना है. लेकिन एकनाथ शिंदे की कोशिश दशहरा मेले में अपने संबोधन से शिवसेना पर दावे को मज़बूत करने की होगी.

शिंदे समूह लगातार यह दावा करता आया है कि यह गुट ही बाल ठाकरे की वास्तविक विरासत को आगे बढ़ा रहा है. इस दावे को शिंदे कुछ और भरोसे से दोहराना चाहेंगे. पहले उन्होंने शिवाजी पार्क पर दशहरा मेला मनाने का दावा किया था.

एकनाथ

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किसकी कितनी तैयारी है

हालांकि शिवाजी पार्क पर दशहरा मेला मनाने का फ़ैसला उद्धव ठाकरे के पक्ष में हुआ. वहीं दूसरी ओर, शिंदे समूह ने दावा किया है कि उनके मेले में ढाई लाख शिव सैनिक जमा होंगे. उधर, शिवसेना की दशहरा सभा के लिए हर शाखा से चार बसें मुंबई आएंगी. मुंबई में ही कुल 227 शाखाएं हैं, इससे अनुमान है कि मेले में शामिल होने के लिए 908 बसें तो अकेले मुंबई से आएंगी.

शिवसेना के ठाकरे गुट को इस साल मुंबई से 50 हज़ार लोगों के मेले में जमा होने की उम्मीद है. दरअसल शिवसेना ने अपने 12 विभाग के प्रमुखों को दशहरा मेले को कामयाब बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है. मुंबई के अलावा ठाणे, पालघर, नवी मुंबई, रायगढ़, नासिक, औरंगाबाद और राज्य के दूसरे हिस्सों से भी शिव सैनिकों के मेले में पहुंचने की उम्मीद की जा रही है. शिवसेना सांसद राजन विचार को ठाणे, मीरा रोड, भायंदर और नवी मुंबई से शिव सैनिकों को जुटाने की ज़िम्मेदारी दी गई है.

एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद यह शिवसेना की पहली बैठक है, लिहाज़ा उम्मीद की जा रही है कि पश्चिम महाराष्ट्र, उत्तरी महाराष्ट्र और मराठावाड़ा से भी बड़ी संख्या में शिव सैनिक बस और ट्रेन से पहुंचेंगे.

यही स्थिति एकनाथ शिंदे समूह की भी है. यह गुट भी अपनी पूरी ताक़त प्रदर्शित करना चाहता है. ऐसी जानकारी भी मिली है कि शिंदे गुट की ओर से शिव सैनिकों को लाने के लिए ट्रेन बुक की गई है. गुट के हर विधायक को कुछ हज़ार लोगों को लाने के लिए कहा गया है.

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ''मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बीकेसी मैदान में भव्य दशहरा सभा का आयोजन किया गया है. इस सभा के लिए राज्य के कोने-कोने से लाखों शिव सैनिक बीकेसी मैदान में एकत्रित होंगे." दोनों समूहों ने सोशल मीडिया पर अपनी सभाओं का ख़ूब प्रचार किया है.

ठाकरे

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दशहरा सभा भाषणों में किन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है?

शिवसेना की दशहरा सभा में सिर्फ़ शिवसेना नेताओं को ही मंच पर बैठने की जगह दी जाएगी. सांसद अरविंद सावंत, युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे, विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे, मुंबई की पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर समेत कुछ नेता पहले भाषण देंगे. कुछ नए चेहरों को भी मौका दिए जाने की संभावना है. ख़बर है कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे करीब साढ़े सात बजे अपना भाषण शुरू करेंगे.

वहीं शिंदे समूह की दशहरा सभा शाम पांच बजे शुरू होगी और महत्वपूर्ण नेता पहले बोलेंगे और फिर एकनाथ शिंदे बोलेंगे. उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे अपने भाषणों में क्या कहेंगे, इस बारे में उत्सुकता सियासी गलियारों में भी है और जनता के बीच भी.

कुछ दिन पहले, 30 सितंबर को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दशहरा सभा को लेकर कहा था कि ''शिवसेना एक है. शिवसेना की दशहरा सभा केवल एक है और वो शिवाजी पार्क में होगी.''

राज्य की राजनीति पर नज़र रखने वालों की मानें तो उद्धव ठाकरे के भाषण में मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन बिंदु देखने को मिलेंगे-

1. शिंदे गुट को 'देशद्रोही' कहना - शिंदे गुट के विद्रोह के बाद शिवसेना ने लगातार कुछ मुद्दे उठाए. इन्हीं में से एक है शिंदे समूह को 'देशद्रोही' कहकर आलोचना करना. विद्रोह के बाद आदित्य ठाकरे राज्य भर में शिवसंवाद यात्रा पर निकले. आदित्य ठाकरे ने विभिन्न ज़िलों में शिवसैनिकों से बातचीत करते हुए शिंदे गुट के नेताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें देशद्रोही बताया है. शिवसेना अक्सर शिंदे समूह पर उद्धव ठाकरे और शिवसेना को धोखा देने का आरोप लगाती रही है. इसलिए जानकारों का कहना है कि ठाकरे के भाषण में 'पार्टी के प्रति वफ़ादारी और विश्वासघात' की बात शामिल होगी.

2. '50 खोके, ओके-ओके'- शिंदे गुट के विद्रोह को शिवसेना की ओर से लगातार '50 खोके, ओके-ओके' कहा जाता रहा है. राजनीतिक विश्लेषक अभय देशपांडे का कहना है, "इस नारे से विपक्ष कहीं ना कहीं यह छवि बनाने में सफल रहा है कि शिंदे गुट का विद्रोह पैसे की राजनीति का खेल था." इसलिए उम्मीद की जा रही है कि शिवसेना की दशहरा सभा में यह भी एक मुख्य मुद्दा होगा.

3. गुजरात के लिए परियोजना- तीसरा मुद्दा यह है कि फ़ॉक्सकॉन-वेदांता की सेमीकंडक्टर निर्माण परियोजना को महाराष्ट्र के बजाय गुजरात राज्य को सौंपा गया है. पूर्व उद्योग मंत्री सुभाष देसाई और पूर्व पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिंदे सरकार की आलोचना की थी.

उद्धव ठाकरे

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आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया था कि शिंदे सरकार की लापरवाही के कारण एक बड़ा प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के हाथों से चला गया और इस वजह से रोज़गार के अवसर भी छिन गए. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शिवसेना की दशहरा सभा शिंदे गुट को निशाना बनाएगी क्योंकि यह परियोजना गुजरात में जा रही है.

शिवसेना नेता किशोरी पेडनेकर ने कहा, "उद्धव ठाकरे कभी भी भाषा का स्तर पर नहीं गिराते हैं, दूसरे नेताओं को इसके बारे में पता होना चाहिए. हम किसी के चरित्र पर हमला नहीं करते हैं. हम वैचारिक स्तर पर बात करते हैं."

वहीं वरिष्ठ पत्रकार संदीप प्रधान कहते हैं, "शिंदे समूह ने धोखा दिया, महाराष्ट्र में, गुजरात में, निवेश कैसे हो रहा है, 50 पेटी का आरोप उद्धव ठाकरे के भाषण में मुख्य मुद्दे होंगे. कुछ दिन पहले गोरेगांव में उद्धव ठाकरे की बैठक हुई थी. वह पूर्वाभ्यास जैसा था, उद्धव ठाकरे के भाषण में ये सभी बिंदु थे. वह इन बिंदुओं पर और अधिक आक्रामक तरीके से अपनी बात रखेंगे."

एकनाथ शिंद के भाषण में क्या होगा?

शिंदे समूह की यह पहली दशहरा सभा है. जानकारों का कहना है कि एकनाथ शिंदे के भाषण में हिंदुत्ववाद और बाल ठाकरे मुख्य मुद्दे होंगे.

इस बात का ज़िक्र खुद एकनाथ शिंदे ने दशहरा सभा की जानकारी देते हुए किया है. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "बालासाहेब के विचारों को किसने तोड़ा? उनके विचारों को किसने धोखा दिया? सत्ता के लिए किसने समझौता किया? क्या मुझे यह कहने की ज़रूरत है. हम बालासाहेब के विचारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं. इसलिए, राज्य में हर तत्व और हजारों राज्य के लोग हमारे रुख़ का समर्थन करते हैं. मैं सही समय पर सब कुछ कहूंगा."

शिंदे

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महाविकास अघाड़ी गठबंधन पर सवाल

एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन का है. इस पर शिंदे समूह पहले भी टिप्पणी कर चुका है. शिंदे समूह के विधायकों ने बगावत के बाद भी इसका ज़िक्र किया था. तब विधायक संजय शिरसाट ने अपने एक पत्र में कहा था, ''कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन के चलते हम बग़ावत कर रहे हैं. एनसीपी को गठबंधन से सबसे ज़्यादा फ़ायदा हो रहा है और शिवसेना के विधायकों को फ़ंड नहीं मिल रहा है और नेतृत्व इसका समाधान नहीं कर रहा है.''

इस पृष्ठभूमि को देखते हुए एकनाथ शिंदे पुनः महाविकास अघाड़ी की आलोचना कर सकते हैं और इस अवसर पर उद्धव ठाकरे को निशाना बना सकते हैं.

शिंदे सरकार के 100 दिन

शिंदे-फडणवीस सरकार 7 अक्टूबर को सत्ता में अपने 100 दिन पूरे कर रही है. इसलिए एकनाथ शिंदे के भाषण में सरकार का कार्य और भविष्य का दृष्टिकोण भी बताया जा सकता है.

वरिष्ठ पत्रकार संदीप प्रधान के मुताबिक़, एकनाथ शिंदे अपने भाषण में यह बताने की कोशिश कर सकते हैं कि कैसे शिवसेना अपनी मूल विचारधारा से भटक गई थी. वो कहते हैं, "वो अपने भाषण में यह कह सकते हैं कि उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व के साथ समझौता किया और सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन किया और इस दौरान शिवसेना बालासाहेब के विचारों को आगे बढ़ाने के बदले भटक गई. वो यह भी बताने की कोशिश करेंगे कि बीजेपी के साथ गठबंधन क्यों ज़रूरी था."

यह साफ़ है कि दशहरा मेला एक तरह से एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच मुकाबला हो गया है. हालांकि शिवसेना पर दावे की लड़ाई कोर्ट के बाद चुनाव आयोग के पास पहुंच गई है, लेकिन यह दशहरा सभा आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और जनता के बीच अपनी छवि बनाने के लिहाज से दोनों नेताओं के लिए महत्वपूर्ण है.

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