मध्य प्रदेश की जेल में मुसलमान युवकों की दाढ़ी काटे जाने का मामला क्या है जिस पर भड़क गए असदुद्दीन ओवैसी?

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के राजगढ़ ज़िले की जेल में कथित तौर पर पांच मुस्लिम युवकों की दाढ़ी को जबरन काटने के मामले में जांच के आदेश दिए हैं.
राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भोपाल से कांग्रेस के विधायक आरिफ़ मसूद के साथ उनसे मिलने गए. उन्होंने पीड़ितों और राजगढ़ के मुस्लिम समाज को जांच का आश्वासन दिया है.
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बयान जारी कर इस घटना को 'हिरासत में प्रताड़ना' बताया.
उनका कहना था कि मुस्लिम युवकों के साथ जो कुछ हुआ वो संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है.
ओवैसी के अनुसार, पीड़ितों के ख़िलाफ़ 'सीआरपीसी' की धारा 151 लगाई गयी थी जिसकी ज़मानत थाने के स्तर पर ही हो जानी चाहिए थी. मगर ऐसा नहीं हुआ.
उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि "मध्य प्रदेश में मुसलमानों की आबादी सात फ़ीसद है. वहां 14% अंडर ट्रायल लोग मुसलमान हैं, वहीं जेल में बंद लोगों में 56 प्रतिशत मुसलमान हैं. ये साफ़ ज़ाहिर हो रहा है कि मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार मुसलमानों के साथ ख़ुल कर भेदभाव कर रही है.''
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ओवैसी ने अपने बयान में आगे कहा, "क्या भारत सरकार सभी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों से हट जाएगी और खुले तौर पर घोषणा करेगी कि वो धर्मनिरपेक्षता, बहुलवाद और विविधता में विश्वास नहीं करती है?"
हालांकि जेल जाने के अगले ही दिन पाँचों युवकों को रिहा भी कर दिया गया था जिसके बाद घटना के ख़िलाफ़ राजगढ़ के मुस्लिम समाज के लोग ज़िला अधिकारी हर्ष दीक्षित से भी मिलने गए और उन्हें ज्ञापन भी सौंपा.

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क्या है आरोप
मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि ज़िले के कलक्टर ने भी जांच करवाने का आश्वासन दिया है.
राजगढ़ के जीरापुर के रहने वाले कलीम ने बीबीसी से बातचीत के क्रम में आरोप लगाया कि जब उन्हें चार अन्य युवकों के साथ जेल ले जाया गया था तो उस वक़्त वहां मौजूद जेलर ने उनके ख़िलाफ़ 'पाकिस्तानी' और 'आतंकवादी' जैसे शब्दों का प्रयोग किया.
इन पांच युवकों में दो युवक यानी कलीम और तालिब की लंबी दाढ़ी थी जबकि बाक़ी के तीन की छोटी दाढ़ी थी. इन्ही पाँचों में से एक वहीद का कहना था कि जब उन्हें जेल ले जाया गया तब वहां पहुँचते ही उन्हें 'मुर्गा' बनाकर उनके साथ मारपीट भी की गयी.
बीबीसी से उन्होंने कहा, "हमें रात में जेल ले जाया गया था. अगली सुबह जेल में बाल और दाढ़ी काटने के लिए बुलाया गया. हमने कहा कि हमारा मुंडन कर दीजिए मगर दाढ़ी मत काटिए. मगर किसी ने हमारी गुहार नहीं सुनी. तब हमसे ये कहा गया कि जेल का नियम है कि एक इंच से ज़्यादा दाढ़ी नहीं रखी जा सकती है और वो ज़बर्दस्ती हमारी दाढ़ी को छोटा करने लगे."
कलीम और वहीद का आरोप है कि जब जेल के नाई ने दाढ़ी छोटी कर दी तो जेलर ने पूरी तरह से शेव करने के आदेश दिए और ज़बर्दस्ती सबकी दाढ़ी को साफ़ कर दिया गया.

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इस मामले के सम्बन्ध में राजगढ़ की ज़िला जेल के जेलर एन एस राणा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "किसी की भी दाढ़ी जबरन नहीं काटी गई है."
उनका कहना था कि उनकी जेल में नियम के अनुसार, जो भी कै़दी लाये जाते हैं उनके बालों और दाढ़ी को छोटा किया जाता है.
राणा ये भी कहते हैं कि उनकी जेल में जो जिस धर्म का अनुयायी है वो अपनी धार्मिक भावनाओं के अनुसार दाढ़ी रख सकता है.

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'जेल के नियमों के अनुसार कार्रवाई'
अपने कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए राणा कहते हैं, "हमारी जेल का जो प्रावधान है उसके हिसाब से इन युवकों की दाढ़ी छंटवाई गई होगी. लेकिन उनकी दाढ़ी कैसे कटी? मुझे इसकी जानकारी नहीं है. दाढ़ी और बाल मेरी निगरानी में तो नहीं कटे. यहाँ हवलदार प्रहरी रहते हैं. किसी के साथ जबर्दस्ती नहीं की गई."
राजगढ़ के ज़िला अधिकारी ने भी पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण पर उन्होंने जेल के निरीक्षक से वहां लगे सीसीटीवी कैमरे से वीडियो मंगवाए हैं.
अतिरिक्त ज़िला अधिकारी यानी 'एडीएम' कमल चंद नागर के अनुसार, जेलर ने इस संबंध में उन्हें बताया है कि जेल में जिसने दाढ़ी काटी है और जिनकी दाढ़ी काटी गयी है, वो एक ही धर्म से हैं. नागर कहते हैं दाढ़ी काटने वाले का नाम सत्तार ख़ान है और जेलर ने उन्हें बताया है कि 'शिकायतकर्ता कलीम ख़ान ने स्वेच्छा से दाढ़ी कटवाई है."

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हालांकि कलीम का आरोप है कि वो धार्मिक कारणों से 8 या 10 सालों से दाढ़ी रख रहे हैं.
जीरापुर के मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध लोगों, जैसे शहर काज़ी और स्थानीय दरगाह के नाज़िम ने सरकार को घटना के ख़िलाफ़ प्रतिवेदन देते समय अधिकारियों से कहा कि पाँचों युवकों पर 'सीआरपीसी' की धारा 151 'सिर्फ़ समाज की एक युवती को बचाने' की वजह से लगाई गयी है. इन लोगों का यह भी दावा है कि जिन युवकों की दाढ़ी काटी गई है, वे सभी पांच वक़्त के नमाज़ी हैं.
राजगढ़ के शहर काज़ी नाज़िम अली ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि घटना की जानकारी लेने ख़ुद पुलिस उप महानिरीक्षक आए और आश्वासन भी दिया कि मामले में दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी. लेकिन उन्होंने कहा कि ये जांच पूरी होने के बाद होगा.

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पांच युवकों पर क्या था मामला
राजगढ़ के शहर काज़ी नाज़िम अली कहते हैं, "पाँचों युवकों की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और उन पर जो मामला दर्ज किया गया वो एक लड़की को बचाने के दौरान किया गया जबकि पुलिस को उनके काम की सराहना करनी चाहिए थी."
वे कहते हैं, "इन पाँचों ने कोई शौक़िया तौर पर दाढ़ी नहीं रखी थी. पूरी तरह से धार्मिक नियमों का पालन करते हुए कई सालों से दाढ़ी रख रहे थे. राजगढ़ में हमेशा से समुदायों में सौहार्द रहा है. इस घटना से हम नहीं चाहते कि कोई इसका फ़ायदा उठाकर माहौल ख़राब करने की कोशिश करे. इसलिए हम ज़िला अधिकारी से मिलने गए थे और राज्य के गृह मंत्री से भी पीड़ित युवकों की मुलाक़ात हुई है."
दरअसल इन युवकों का दावा है कि मोहल्ले की एक लड़की के छेड़छाड़ की शिकायत करने के दौरान थाना जाने पर उन लोगों को हिरासत में लिया गया.
इस बारे में राजगढ़ थाने के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला संवदेनशील लग रहा था और दोनों पक्ष बार-बार हंगामा कर रहे थे, इसलिए दोनों तरफ़ के पांच-पांच लोगों पर धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई थी.
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की धारा 151 के तहत पुलिस के पास संदेह के आधार पर गिरफ़्तार करने का प्रावधान है.
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