क्या भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबार के बंद दरवाज़े फिर खुलेंगे

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    • Author, शुमाइला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान में भयावह बाढ़ के दौरान राहत और बचाव का काम जारी है. लेकिन देश के लगभग एक तिहाई हिस्से निगल चुकी बाढ़ की वजह से खेती की जमीन का बड़ा हिस्सा डूब चुका है. इससे देश में अनाज,सब्ज़ियां, फल और दूसरे खाद्य पदार्थों की किल्लत हो सकती है.

शायद यही वजह है पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने भारत से सब्ज़ियों और खाने-पीने की दूसरी चीज़ों के आयात पर लगे प्रतिबंध ख़त्म करने का संकेत दिया है.

दरअसल भारत सरकार की ओर से 2019 में जम्मू-कश्मीर में लागू संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया की थी. उस वक्त पाकिस्तान सरकार ने भारत का दर्जा घटा कर इससे अपने कारोबारी रिश्ते बंद कर दिए थे.

लेकिन अब जब देश में बाढ़ की वजह से बड़े पैमाने पर फसलों को बर्बादी हुई है और सब्ज़ियों जैसी रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों के दाम आसमान छू रहे हैं तो सरकार भारत से खाने-पीने की चीजें आयात करने पर विचार कर सकती है.

इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने सवालों के जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने वाणिज्य और वित्त सचिवों से भारत से खाने-पीने की चीज़ें मंगाने के प्रस्ताव पर विचार किया है. अगले कुछ दिनों में वो इस पर प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करेंगे. लेकिन आयात शुरू करने से पहले कैबिनेट की मंज़ूरी लेनी होगी.

मिफ्ताह इस्माइल ने कहा,'' हम ड्यूटी फ्री आयात की इजाज़त देंगे ताकि यह प्रक्रिया आसान हो सके. हम भारत से लैंड बॉर्डर के ज़रिये आयात की अनुमति देने पर विचार करेंगे क्योंकि लगता नहीं है कि पाकिस्तान में कीमतें कम होंगीं. ''

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कारोबार बंद और शुरू करने का इतिहास

पाकिस्तान में खाने-पीने की चीज़ों के मौजूदा संकट ने मानवीयता के फ्रेमवर्क में भारत के साथ इसके रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने का मौका मुहैया कराया है.

लेकिन देखना ये है कि कैबिनेट इन चीज़ों के आयात की योजना को मंज़ूरी देती है या नहीं या फिर भारत इस पर कैसी प्रतिक्रिया करता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है कि इस तरह के किस प्रस्ताव पर विचार हो रहा है.

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ फहद हुमायूं का मानना है कि पाकिस्तान में भारत से कारोबार बंद करने और फिर यू टर्न का इतिहास रहा है. क्योंकि आपसी कारोबार पर पाबंदी आर्थिक नहीं राजनीतिक कारणों से लगाए जाते रहे हैं.

उनका तर्क वाजिब लगता है क्योंकि पिछले कुछ वक्त के घटनाक्रमों को देखें तो यह साफ़ हो जाएगा.

इमरान खान को हटाए जाने के बाद जैसी ही नई सरकार सत्ता में आई वैसे ही भारत से कारोबार शुरू होने की अफवाहें उड़ने लगी. इसकी दो वजहें थीं. दरअसल दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग में नए ट्रेड ऑफिसर की नियुक्ति की गई थी.

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में महंगाई चरम पर

इसके बाद नए विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत के साथ कारोबार बहाल करने की पैरवी की. उनका कहना था कि पड़ोसियों से अलग-थलग रहना पाकिस्तान के हित में नहीं हैं.

लेकिन सरकार के ऐसे बयानों के बाद इमरान खान ने इस पर हमला शुरू कर दिया. इससे घबरा कर सरकार ने ये कहना शुरू किया कि ट्रे़ड ऑफिसर की नियुक्त रूटीन मामला है.

वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान दे कर दोतरफा कारोबार की संभावनाओं को खारिज कर दिया और कहा कि पाकिस्तान की पुरानी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है.

इसी तरह जब पिछले साल इमरान सरकार में भी भारत से दोतरफा कारोबार फिर शुरू करने पर विचार हो रहा था, उस वक्त इमरान सरकार के वाणिज्य सलाहकार रजाक दाऊद ने कहा था कि भारत से कारोबार शुरू करना वक्त की ज़रूरत है. इसे दोबारा शुरू करना चाहिए.

लेकिन विपक्ष के हमले के बाद इमरान सरकार ने यह पेशकश वापस ले ली.

फहद हुमायूं के मुताबिक पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते के आर्थिक फायदे पर कोई विवाद नहीं है.

जियो-इकोनॉमिक कनेक्टविटी की पैरोकारी लगभग सभी पाकिस्तानी सरकारों ने की है. पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति से जुड़े दस्तावेज़ों का भी ये केंद्रीय तत्व है.

हालांकि फहद हुमायूं का मानना है कि भारत से कारोबार शुरू करने का मामला हमेशा से एक राजनीतिक विवाद का विषय रहा है. अगर इसके पीछे कोई ऐसा मज़बूत राजनीतिक तर्क नहीं है जो सभी पक्षों को संतुष्ट कर सके तो यह विवाद बहुत ज़्यादा फैल जाता है.

कारोबारियों के भरोसे को झटका

उज़्मा शाहिद लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में पाकिस्तान-इंडिया ट्रेड डेस्क की पूर्व संयोजक हैं. लेकिन कश्मीर में 2019 में अनुच्छेद 370 हटते ही यह डेस्क भंग कर दी गई.

उज़्मा का कहना है कि इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक ही झटके में जिस तरह से कारोबार बंद किया गया उसने सैकड़ों कारोबारियों को धंधा चौपट कर दिया. हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी छिन गई. 2019 से पहले उज़्मा भारत से कपड़ों के आयात-निर्यात का कारोबार से जुड़ी थीं.

उन्होंने कहा, '' आपसी कारोबार ने दोनों देशों के लोगों को फायदा हो रहा था. दोनों ओर के लोगों के बीच रिश्ते थे. लोग एक दूसरे को सम्मान देते थे. उनके बीच दोस्ती थी. लेकिन एक ही कलम के एक झटके से यह ख़त्म हो गया. लोगों की कमाई ख़त्म हो गई. लोगों की ज़िंदगी भर की कमाई डूब गई. हम बरबाद हो गए. ''

उज़्मा ने कहा उन्हें खुद करोड़ों का नुकसान हुआ है. उन्होंने ये रकम अपने ऑर्डर के लिए भारतीय निर्यातकों को पहले ही दी थी. उनके साथ काम करने वाले भारतीय निर्यातकों को भी नुकसान हुआ. उन्होंने ऑर्डर तो ले लिया था कि इसे पूरा नहीं कर सके.

उज़्मा कहती हैं, '' कश्मीरियों के लिए लड़ते हुए उन्होंने हमारा नुकसान कर दिया है. अचानक लगी पाबंदी के वित्तीय और मानसिक त्रासदी से हम अभी तक उबर नहीं पाए हैं. ''

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इमेज कैप्शन, आपसी कारोबार बंद होने से भारत को भी नुकसान

क्या दोनों देशों के बीच सीमित मात्रा में ही सही कारोबार दोबारा शुरू हो पाएगा? इस सवाल पर उज़्मा ने संदेह ही जताया. उन्होंने कहा कि कारोबार से जुड़े लोगों का भरोसा टूट चुका है. अगर कारोबार दोबारा शुरू हुआ तो भी वे दूर ही रहेंगे.

वह कहती हैं, '' इस बात की गारंटी कौन लेगा कि एक झटके में कारोबार पर पाबंदी लगने से लोगों का जो हश्र हुआ वैसा दोबारा नहीं होगा. दोनों देशों के बीच की राजनीति इतनी जटिल है कि निवेशकों के भरोसे के लिए ज़रूरी स्थिरता की उम्मीद करना बेवकूफी होगी. ''

2019 से पहले पाकिस्तान और भारत के बीच ताज़े फलों, सब्ज़ियों, कपड़े, हैंडीक्राफ्ट, जिप्सम, मार्बल, नमक, मसालों, आर्टिफिशियल ज्वैलरी और ऐसे ही कुछ आइटमों का आयात-निर्यात होता था. ज़्यादातर ये कारोबार वाघा बॉर्डर के ज़रिये होता था. लेकिन अब यह जगह उजाड़ हो गई है.

कारोबार दोनों के लिए फायदेमंद

अर्थशास्त्री हादिया माज़िद का कहना है कि आपसी कारोबार फिर शुरू करना एक राजनीतिक फैसला है . अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से देखें तो व्यापार हमेशा एक दूसरे को फायदा पहुंचाने वाला होता है. लेकिन अगर कारोबार शुरू होता है तो ये भारत और पाकिस्तान के साथ इस पूरे क्षेत्र के लिए फायदेमंद होगा.

अगर पाकिस्तान के नज़रिये से देखें तो भारत से खाने-पीने की चीजों का आयात इसके सप्लाई चेन को बरकरार रखने में मदद करेगा. इससे महंगाई घटेगी. हालात और ज़्यादा खराब हों इससे अच्छा है कि सरकार इस संकट को खत्म करने के बारे में सोचे और नीतिगत फैसले ले.

वह कहती हैं, '' आपसी क्षेत्रीय कारोबार से दो देशों के बीच अमन में इज़ाफा होता है. यह एक ऐसा माहौल बनाता है, जिससे सामाजिक, सांस्कृतिक संबंध बेहतर होता है और समृद्धि बढ़ती है . ''

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हादिया कहती हैं, '' अगर भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबार की राहें फिर खुलती हैं तो इससे इसकी लागतें घटेंगीं. दोनों ओर के लोग एक दूसरे के उत्पादन की प्रक्रिया बेहतर तरीके से समझ सकेंगे. उन्हें एक दूसरे की तकनीक से भी लाभ होगा. इससे समय बचेगा और कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आएगी. अगर कारोबार बढ़ा तो आपसी तनातनी भी कम होगी. ''

आपसी कारोबार आंकड़ों में

संयुक्त राष्ट्र कॉमट्रेड के आँकड़ों के अनुसार, बीते 2018 से पहले 15 सालों तक भारत का दुनिया भर से आयात 5.2 लाख करोड़ डॉलर का था, लेकिन पाकिस्तान से सिर्फ़ 5.5 अरब डॉलर का ही आयात था. यह देश के कुल आयात का सिर्फ़ 0.1% था. इसी समय में भारत से पाकिस्तान होने वाला निर्यात उसके कुल निर्यात का सिर्फ़ 0.7% था.

दोनों देशों के बीच व्यापार 2019 से बंद है, जब भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी दो घटनाएँ हुईं.

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मासिक आँकड़ों के अनुसार, भारत ने 2109 जनवरी में 3.23 करोड़ डॉलर का सामान आयात किया, जो फ़रवरी में 1.86 करोड़ डॉलर और मार्च में 28 लाख डॉलर हो गया.

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इसके बाद अगस्त 2019 में जब भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया, तो पाकिस्तान ने भारत से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया. जिसके कारण जुलाई और सितंबर में भारत से पाकिस्तान में होने वाले निर्यात में 90% की गिरावट हुई.

भारत ने जुलाई में 12.03 करोड़ डॉलर का सामान निर्यात किया था, जिसके बाद अगस्त में यह सिर्फ़ 5.23 करोड़ डॉलर और सितंबर में 1.24 करोड़ डॉलर था.

भारत ने अप्रैल 2019 में नियंत्रण रेखा पर जम्मू-कश्मीर से होने वाले व्यापार पर भी रोक लगा दी थी.

भारत का दावा है कि ऐसी ख़ुफ़िया रिपोर्टें थीं कि पाकिस्तान स्थित चरमपंथी गुट इसके ज़रिए अवैध हथियार, जाली नोट और नशीले पदार्थों की तस्करी कर सकते हैं.

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