बिलावल भुट्टो ने जब कहा था-"...हर पाकिस्तानी में कहीं न कहीं भारत बसता है"

बिलावल भुट्टो ज़रदारी

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इमेज कैप्शन, 2012 में पहली बार भारत आए बिलावल अजमेर शरीफ़ की दरगाह गए थे

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने मंत्री पद की शपथ ले ली है. बीबीसी उर्दू सेवा के मुताबिक बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री होंगे. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने उन्हें शपथ दिलाई. इस मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ भी मौजूद थे.

33 वर्षीय बिलावल भुट्टो की मां बेनज़ीर भुट्टो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं, जबकि उनके पिता आसिफ़ अली ज़रदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति रह चुके हैं.

बिलावल भुट्टो 2018 में पहली बार पाकिस्तान के सांसद चुने गए थे. मगर वो सरकार में मंत्री का पद पहली बार संभाल रहे हैं.

जब बिलावलपहली बार भारत आए

बिलावल 10 साल पहले पहली बार भारत आए थे. 8 अप्रैल 2012 को दिल्ली में क़दम रखते हुए उन्होंने कहा था- "अस्सलाम वालेकुम, भारत आपके यहाँ शांति हो."

वे तब अपने पिता आसिफ़ अली ज़रदारी के साथ भारत आए थे जो उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे. उस दौरे में भारत में जितनी दिलचस्पी आसिफ़ अली ज़रदारी को लेकर दिखाई गई थी उतनी ही दिलचस्पी लोगों ने बिलावल में दिखाई थी.

अपनी माँ को याद करते हुए उस वक्त बिलावल ने ट्विटर पर लिखा था, "मेरी माँ ने एक बार कहा था कि हर पाकिस्तानी में कहीं न कहीं भारत बसता है और हर भारतीय के दिल में छोटा सा पाकिस्तान बसता है."

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उस समय बिलावल भुट्टो की उम्र 23 साल थी. काले रंग के पठानी सूट में बिलावल भुट्टो अपने पिता के साथ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जियारत करने के लिए पहुंचे थे. आसिफ़ अली ज़रदारी के अजमेर पहुंचने से दो घंटे पहले दरगाह को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था.

अजमेर शरीफ की अपनी यात्रा पर बिलावल भुट्टो ने लिखा था कि वहां जाना काफी शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक अनुभव था.

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अपनी एक दिन की यात्रा पर बिलावल भुट्टो ने अपने पिता के साथ राहुल गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ दोपहर का भोजन किया था. जिसे लेकर उन्होंने कहा था, ''खाना बहुत अच्छा था, एक दूसरे से बहुत कुछ सीखा जा सकता है.''

पीटीआई के मुताबिक पाकिस्तानी दल को एक से एक लजीज व्यंजन परोसे गए थे जिसमें जैतूनी मुर्ग सीख, गोश्त बड़ा कबाब, भिंडी कुरजुरी और फिरनी शामिल थी.

भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्तों पर भी 23 साल के बिलावल भुट्टो ने टिप्पणी की थी. बिलावल ने लिखा था, ''ये शर्म की बात है कि दोनों देशों में बड़ी संख्या में लोग ग़रीबी में रहते हैं और हम इतना पैसा परमाणु हथियारों पर खर्च करते हैं ताकि एक दूसरे को तबाह कर सकें. इस पैसे को स्वास्थ्य सेवा में लगाना चाहिए ताकि हम एक दूसरे के घाव भर सकें, व्यापार में लगाना चाहिए."

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कैसे बने विदेश मंत्री

पाकिस्तान में मुस्लिम लीग (नवाज) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को कभी प्रतिद्वंद्वी माना जाता है लेकिन अब ये दोनों पार्टियां गठबंधन की सरकार में हैं. इस सरकार में पाकिस्तान में मुस्लिम लीग (नवाज) के अध्यक्ष मियां शहबाज़ शरीफ़ प्रधानमंत्री हैं.

पाकिस्तान में इमरान ख़ान की सरकार गिरने के बाद 12 अप्रैल को शहबाज़ शरीफ़ ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके बाद उन्होंने 38 मंत्रियों को शपथ दिलाई लेकिन उसमें पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो नहीं थे.

कयास ये लगाए जा रहे थे कि बिलावल भुट्टो को विदेश मंत्री बनाया जाएगा, लेकिन तब ऐसा नहीं हुआ.

जब कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली तो बिलावल भुट्टो राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में शामिल थे. उस समय विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी इसे साफ नहीं किया गया था. जानकारों का मानना था कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ विदेश मंत्रालय जैसे अहम मंत्रालय पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को नहीं देना चाहते.

बिना शपथ लिए बिलावल भुट्टो प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के भाई और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ़ से मिलने लंदन पहुँच गए थे.

शहबाज शरीफ

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ये नवाज़ शरीफ़ और उनकी टीम के साथ बिलावल भुट्टो ज़रदारी के नेतृत्व वाली पीपीपी टीम की लंबी बैठक थी. इस मुलाक़ात के बाद मीडिया से बात करते हुए मियां नवाज़ शरीफ़ और बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कई बार 'चार्टर ऑफ़ डेमोक्रेसी' का हवाला दिया था और कहा था कि वे इस इतिहास को एक बार फिर दोहराना चाहते हैं.

साल 2006 के दौरान भी बिलावल भुट्टो की मां बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ के बीच 'चार्टर ऑफ़ डेमोक्रेसी' के समझौते में दोनों पार्टियों ने कुछ संवैधानिक संशोधनों, राजनीतिक व्यवस्था में सैन्य हालात, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, जवाबदेही और आम चुनावों पर सहमति बनाई थी.

इस मुलाक़ात में बिलावल भुट्टो ज़रदारी कहा था, "नया नेतृत्व राष्ट्रपति और मियां साहब के मार्गदर्शन में देश के विकास के लिए काम करेगा."

मियां नवाज शरीफ से बिलावट भुट्टो की ये मुलाकात काफी अहम मानी जाती है. जानकारों का कहना है कि इस मुलाकात के बाद ही बिलावल भुट्टो का विदेश मंत्री बनना तय हुआ है.

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी की बहन बख़्तावर भुट्टो ने ट्वीट कर दावा कर दिया कि उनके भाई पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री पद की शपथ लेंगे.

बख़्तावर ज़रदारी ने ट्वीट कर कहा, "बिलावल भुट्टो ज़रदारी गठबंधन सरकार में आज पाकिस्तान के विदेश मंत्री के तौर पर शपथ लेंगे. हमें उनपर बहुत गर्व है. वे पहले ही संसद में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं और हमेशा अपने लोकतांत्रिक मूल्यों पर डटे रहे हैं. इस सफ़र की गवाह बनने के लिए उत्सुक हूँ."

शहबाज शरीफ

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कैसे बनी पाकिस्तान में गठबंधन सरकार

शहबाज़ शरीफ़ के प्रधानमंत्री बनने से पहले इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ अपने सहयोगी दलों के साथ पाकिस्तान में गठबंधन की सरकार चला रही थी.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली या संसद की वेबसाइट के मुताबिक़ इसमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के 155 सदस्य, एमक्यूएम के सात, बीएपी के पाँच, मुस्लिम लीग क्यू के पाँच सदस्य, जीडीए के तीन और अवामी मुस्लिम लीग के एक सदस्य गठबंधन सरकार का हिस्सा थे.

दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज) थी जिसके पास 84 सदस्य थे. इसके अलावा गठबंधन में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के 57 सदस्य, मुत्तहिदा मजलिस-ए-अमल के 15, बीएनपी के चार जबकि अवामी नेशनल पार्टी के एक सदस्य शामिल थे. इसके अलावा दो स्वतंत्र सांसद भी इस विपक्षी गठबंधन का हिस्सा थे.

इस वक्त तक इमरान खान के पास सरकार चलाने का बहुमत था लेकिन कुछ सदस्य इमरान सरकार से विपक्ष गठबंधन में चले गए. जब नेशनल असेंबली में इमरान खान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई तो 174 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और इमरान सरकार को गिरा दिया.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में प्रस्ताव पास कराने के लिए 172 वोटों की जरूरत थी जिसे विपक्षी गठबंधन ने आसानी से हासिल कर लिया था.

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