जगदीप धनखड़ होंगे नए उपराष्ट्रपति, मार्गरेट अल्वा-राहुल गांधी ने दी बधाई

जगदीप धनखड़ भारत के 14वें उपराष्ट्रपति होंगे. शनिवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने मार्गरेट अल्वा को हराया.

शनिवार को हुए चुनाव में कुल 725 वोट पड़े. इनमें से जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले. वहीं विपक्ष की उम्मीदार मार्गरेट अल्वा को 182 वोट मिले.

15 वोट अमान्य घोषित किए गए. इसके साथ ही जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति चुनाव का विजेता घोषित कर दिया गया.

देश के नए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 11 तारीख़ को शपथ लेंगे. मौजूदा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को ख़त्म हो रहा है.

भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है. भारत के उपराष्ट्रपति राज्य सभा के सभापति भी होते हैं.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदीप धनखड़ को अपने बधाई संदेश में कहा कि सार्वजनिक जीवन के उनके अनुभव का देश को फायदा मिलेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जगदीप धनखड़ से मुलाक़ात कर उनको बधाई दी है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी जगदीप धनखड़ को 16वें उपराष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी है.

विपक्षी की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने जगदीप धनखड़ को चुनाव जीतने पर बधाई दी है. इस दौरान उन्होंने विपक्ष के नेता और उन सभी दलों के सांसदों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने उनके लिए वोट डाले.

उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे धनखड़

जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनने के बाद जितनी सुर्ख़ियां बटोरीं उतनी तो शायद उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में नहीं बटोरी थी.

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के तौर पर शुरुआती दिनों में धनखड़ के रिश्ते मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ ठीक-ठाक रहे लेकिन कुछ दिनों बाद ही दोनों नेता सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे.

ममता बनर्जी ने तो कई बार सार्वजनिक तौर पर धनखड़ को राज्यपाल पद से हटाने की मांग भी की.

राज्यपाल के तौर पर शपथ लेने के बाद से ही उनका राज्य सरकार और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ विभिन्न मुद्दों पर टकराव का जो सिलसिला शुरू हुआ, वो हाल में महुआ मोइत्रा के 'काली विवाद' तक जारी रहा.

यही कारण है कि एनडीए ने जब 16 जुलाई 2022 को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम का एलान किया गया तो राजनीतिक हलकों में किसी को ज़्यादा हैरत नहीं हुई.

कौन हैं जगदीप धनखड़?

राजस्थान ज़िले के झुंझुनू ज़िले के किठाना गाँव में 18 मई, 1951 को जन्मे जगदीप धनखड़ ने बंगाल के राज्यपाल का कार्यभार 30 जुलाई, 2019 को संभाला था.

धनखड़ की शुरुआती पढ़ाई (कक्षा एक से पाँच तक) गाँव के ही सरकारी स्कूल में हुई. उसके बाद, उन्होंने स्कॉलरशिप हासिल करके चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में दाख़िला लिया.

धनखड़ ने जयपुर के प्रतिष्ठित महाराजा कॉलेज से बीएससी (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की. उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से ही क़ानून (एलएलबी) की पढ़ाई की. पढ़ाई में वे हमेशा अव्वल रहे.

धनखड़ ने वर्ष 1979 में राजस्थान बार काउंसिल की सदस्यता ली. 27 मार्च, 1990 को वे सीनियर एडवोकेट बने. उसी समय से धनखड़ सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस करते रहे. वे 1987 में राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी चुने गए.

धनखड़ का राजनीतिक करियर वर्ष 1989 से शुरू हुआ. उस वर्ष वे भाजपा के समर्थन से जनता दल के टिकट पर झुंझुनू से लोकसभा चुनाव लड़े और जीत कर पहली बार संसद पहुंचे. वे केंद्र में मंत्री भी रहे.

जनता दल के विभाजन के बाद वो पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के खेमे में चले गए. लेकिन जनता दल से टिकट न मिलने पर बाद में वो कांग्रेस में चले गए. उन्होंने अजमेर से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार गए.

उसके बाद वर्ष 2003 में वे बीजेपी में शामिल हो गए. वर्ष 1993 से 1998 के बीच वे अजमेर की किशनगढ़ विधानसभा से विधानसभा के सदस्य रहे. लोकसभा और विधानसभा के अपने कार्यकाल के दौरान वे कई अहम समितियों के सदस्य रहे.

वहीं उनकी पुत्री कामना, जयपुर के एमजीडी स्कूल और अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद अमेरिका से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.

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