पार्थ चटर्जी को हटाने के बाद क्या ममता बनर्जी कुनबा सँभालने में जुट गई हैं?

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- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, कोलकाता से
पश्चिम बंगाल के स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) घोटाले में पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और उनकी करीबी महिला मित्र अर्पिता मुखर्जी के घर से 50 करोड़ से ज्यादा की नकदी बरामद होने की घटना से लगे जोरदार झटके के कारण शुरुआती कुछ दिनों तक किंकर्तव्यविमूढ़ स्थिति में होने के बाद उबरते हुए तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अब इस मामले से पार्टी और सरकार को हुए नुकसान की भरपाई की कवायद शुरू कर दी है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चार अगस्त को नीति आयोग की बैठक के सिलसिले में दिल्ली जाने का कार्यक्रम हैं. वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक की भी संभावना है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इसी वजह से दिल्ली जाने से पहले वे अपने तरकश के तमाम तीरों को सीधा कर लेने के प्रयास में हैं.
यही वजह है कि पहले ममता ने पार्थ को मंत्रिमंडल से हटाया और फिर उनको पार्टी के तमाम पदों से हटाते हुए प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया.
उसके बाद सांसद अभिषेक बनर्जी ने शिक्षा मंत्री के साथ एसएससी के पहली मेरिट लिस्ट में चुने गए उम्मीदवार जो लंबे अरसे से कोलकाता में धरने पर हैं, से मुलाकात की और उनको शीघ्र नियुक्ति का भरोसा दिया. अब उन आंदोलनकारी उम्मीदवारों की शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु के साथ इसी मुद्दे पर आठ अगस्त को बैठक होनी है.
इसके बाद ममता ने सोमवार को एक ओर तृणमूल कांग्रेस में बड़े पैमाने पर सांगठनिक फेरबदल करते हुए 35 में से 23 सांगठनिक जिलों के चेयरमैन और प्रेसिडेंट को बदल दिया. वहीं बुधवार को मंत्रिमंडल में फेरबदल के जरिए कम से कम पांच लोगों को संगठन में भेजने और कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का एलान किया.
तृणमूल में कामकाज की सहूलियत के लिए 35 सांगठनिक जिले हैं. इसके अलावा तमाम जिला संगठनों को पार्थ-अर्पिता कांड पर क्या बोलना है और क्या नहीं, का अलिखित दिशा-निर्देश भेज दिया गया है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को राज्य में सात नए जिलों के गठन का भी एलान किया. इसके बाद से ही विपक्षी दलों ने उन पर पार्थ की गिरफ्तारी से सरकार और पार्टी की छवि को हुए नुकसान की भरपाई की कवायद करने और इस घटना से लोगों का ध्यान बंटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.

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मुंह बंद रखने का निर्देश
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं, शीर्ष नेतृत्व की ओर से तमाम जिला समितियों को भेजे गए दिशा निर्देश में कहा गया है कि पार्थ-अर्पिता कांड पर मुंह खोलने की जरूरत नहीं है.
कोई इस मुद्दे पर सवाल भी करे तो चुप रहें या फिर उससे बचने का प्रयास करें. इस मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी शीर्ष नेतृत्व ही करेगा. साथ ही फिलहाल किसी तरह की सभा या रैली का आयोजन नहीं करने को भी कहा गया है.
हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता भी फिलहाल यह दावा करने की स्थिति में नहीं हैं कि यह रणनीति कितनी कारगर होगी,
पार्टी के एक अन्य नेता भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं, "पार्टी ने डैमेज कंट्रोल की कवायद कुछ देर से भले शुरू की, लेकिन अब वह इसे तेज कर रही है. पार्थ को पार्टी से निलंबित ज़रूर किया गया है. लेकिन साथ ही जोड़ा गया है कि जांच पूरी नहीं होने तक वे निलंबित रहेंगे. अब ऐसी जांच लंबे समय तक चलती है. इसलिए यह पार्टी से निकालने जैसी ही है."

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टीएमसी के मंत्रियों की परेशानी
पार्थ-अर्पिता कांड की घटना ने तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों के लिए परेशानी पैदा कर दी है.
एक मंत्री बताते हैं, "अपने इलाके में जाने पर चारों ओर सबकी जुबां पर इसी घटना का जिक्र सुनाई पड़ता है. लोगो ऐसी-ऐसी टिप्पणी करते हैं कि लगता है कानों में किसी ने पिघला हुआ शीशा उतार दिया हो."
वैसे, अब भी कुछ नेता मानते हैं कि पार्थ की गिरफ्तारी के बाद ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी. लेकिन शुरुआत में अदालत में दोषी साबित होने के बाद कार्रवाई के आधिकारिक बयान के बाद अचानक उनको सरकार से निकालने और पार्टी से निलंबित करने का आम लोगों में वैसा संदेश नहीं गया जैसा पहले दिन की कार्रवाई से पहुंचा.
राजनीतिक हलकों में सबकी निगाहें सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक पर टिकी थीं. कयास ला जा रहे थे कि ममता शायद तमाम मंत्रियों को इस्तीफा कर नए सिरे से मंत्रिमंडल का गठन करें. लेकिन तमाम पहलुओं पर विचार करने के बाद ऐसा करने की बजाय एक छोटा फेरबदल करने पर ही सहमति बनी.
बैठक के बाद ममता ने कहा, "बुधवार को छोटा फेरबदल किया जाएगा. करीब चार से पांच मंत्रियों का इस्तेमाल संगठन के काम के लिए किया जाएगा. हम कैबिनेट में पांच-छह नए चेहरे शामिल करेंगे. दो वरिष्ठ नेताओं सुब्रत मुखर्जी और साधन पांडे का निधन हो चुका है. पार्थ हिरासत में हैं. इनके काम कौन करेगा? किसी को तो करना होगा. कुछ मंत्रालय खाली हैं. यह संभव नहीं है कि मैं अकेले ही सब कुछ संभाल लूं. हमें यह साथ करना होगा."

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ममता ने राज्य में सात नए जिलों को बनाने का भी बात कही है. इससे राज्य में जिलों की संख्या बढ़कर 30 हो जाएगी.
जानकारों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी से तृणमूल कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए बाबुल सुप्रियो को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है.
तृणमूल सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा राज्य मंत्री परेश अधिकारी का सरकार से पत्ता साफ होना लगभग तय है. उनकी पुत्री अंकिता अधिकारी को हाईकोर्ट के निर्देश पर बर्खास्त किया जा चुका है और सीबीआई उनसे एसएससी घोटाले के बारे में पूछताछ की जा चुकी है. अदालत ने साफ कर दिया कि अंकिता को भी इसी घोटाले के तहत नौकरी मिली थी.
इससे पहले सोमवार को लंबे अरसे बाद संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए पार्टी की ओर से नए पदाधिकारियों की एक सूची जारी की गई. कुछ जिलों में नए पदाधिकारियों के नाम अभी तय नहीं हो सके हैं.
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की दलील है कि पार्थ कांड से इस फेरबदल का कोई संबंध नहीं है.
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं, "पार्टी के नए मुख्यालय में बीती पांच मई को हुई बैठक में ममता ने जून-जुलाई में सांगठनिक फेरबदल की बात कही थी. सरकार और संगठन में सामंजस्य बिठाने के लिए यह फेरबदल जरूरी था. सांगठनिक पदों से हटाए गए कुछ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है."

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नई नियुक्तियों का एलान
एसएससी घोटाले के ख़िलाफ़ दर्जनों उम्मीदवार बीते करीब पांच सौ दिनो से कोलकाता में धरने पर बैठे हैं.
शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने सोमवार को कहा, "सरकार कानूनी दायरे में रहते हुए उन सबकी नियुक्ति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी. सरकार इस साल एसएससी के जरिए 21 हजार पदों पर नियुक्तियां करेगी. दुर्गा पूजा से पहले यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी."

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तृणमूल कांग्रेस के नेता संगठन और सरकार में फेरबदल पर चाहे जो कहे, विपक्षी राजनीतिक दलों का कहना है कि ममता की यह कार्रवाई डैमेज कंट्रोल की कवायद है.
सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, "पार्थ कांड के झटके से उबरने के लिए ही सरकार अब फुर्ती से फैसले कर रही है. साथ ही 21 हजार नई नियुक्तियों को भी एलान किया गया है. लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होगा."
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार भी इसे लोगों का ध्यान पार्थ कांड की ओर से हटाने की रणनीति का हिस्सा मानते हैं.
राजनीतिक विश्लेषक भी लगभग यही बात कहते हैं.
राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर समीरन पाल कहते हैं, "यह तो शीशे की तरह साफ है. सरकार ने पहले चार-पांच दिनों तक तो पार्थ का समर्थन किया और अब अब लगातार तेजी से एक के बाद एक फैसले ले रही है. इस पूरी कवायद की कमान ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक के हाथों में हैं."
उनका कहना है कि इसका कितना दूरगामी असर होगा, यह अनुमान लगाना तो फिलहाल मुश्किल है. लेकिन जिस तेजी से कार्रवाई की जा रही है उससे साफ है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पार्थ कांड से दूरी बरतते हुए आम लोगों को यह संदेश देना चाहता है कि वह भ्रष्ट लोगों से कोई रिश्ता नहीं रखेगी.
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