यूक्रेन में तीन भारतीयों को ब्लैकलिस्ट करने का क्या है मामला - प्रेस रिव्यू

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यूक्रेन में तीन भारतीयों को ब्लैकलिस्ट किया गया है जिस पर फिलहाल भारतीय विदेश मंत्रालय कुछ भी कहने से बच रहा है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की ख़बर के मुताबिक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की नेशनल सिक्योरिटी एंड डिफेंस काउंसिल के एक सेंटर ने भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़री बोर्ड (एनएसएसबी) के अध्यक्ष पीएस राघवन पर रूसी प्रोपेगैंडा फैलाने का आरोप लगाया है. उन्हें सेंटर ने ऐसे ही दूसरे लोगों की सूची में शामिल किया है.
सूत्रों के मुताबिक पीएस राघवन को इस सूची में रखना गलती भी हो सकती है. लेकिन, यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस सूची को सही ठहराया है. उन्होंने इस सूची में शामिल लोगों को ''रूसी प्रभाव के बेशर्त एजेंट्स'' कहा है और उनके ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 14 जुलाई को सामने आई यूक्रेन की सरकार की इस सूची पर कुछ कहने से इनकार कर दिया है. तीन भारतीयों में पीएस राघवन, अमेरिका में रह रहे लेखक सैम पित्रोदा और वरिष्ठ पत्रकार सईद नक़वी शामिल हैं.
भारत सरकार ने पीएस राघवन को हाल ही में फिर से नियुक्त किया है और एनएसएसबी के प्रमुख के तौर पर ये उनका तीसरा कार्यकाल है. रूस में भारत के राजदूत रह चुके राघवन कहते हैं कि ये आरोप इतने घटिया हैं कि इन पर टिप्पणी भी नहीं की जा सकती.

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'राष्ट्रपत्नी' विवाद से पहले मुर्मू को राष्ट्रपति कहने पर इन्होंने जताई थी आपत्ति
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 'राष्ट्रपत्नी' कहने से हुए हंगामे से पहले भी राष्ट्रपति नाम को लेकर संसद में विवाद हो चुका है.
ये विवाद तब हुआ जब संगरूर से सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने द्रौपदी मुर्मू के लिए राष्ट्रपति शब्द इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई थी.
उन्होंने संसद में कहा था कि द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति नहीं कहा जाना चाहिए. जिस पर कई वरिष्ठ सदस्यों ने आपत्ति जताई थी और उनके बयान को रिकॉर्ड से बाहर रखने की मांग की थी.
शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता सिमरनजीत मान ने अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, उन्हें वाकई लगता है कि ''एक महिला प्रेज़िडेंट को राष्ट्रपति कहना गलत है क्योंकि ये उनका अपमान है.''
द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद 26 जुलाई को संसद में फैमिली कोर्ट (संशोधन) विधेयक, 2002 पर बहस हो रही थी तब क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू के जवाब के बाद सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि मंत्री ने द्रौपदी मुर्मू के लिए राष्ट्रपति शब्द का इस्तेमाल किया है.
उन्होंने जानना चाहा कि कैसे एक महिला को राष्ट्रपति कहा जा सकता है? हालांकि, कई सांसदों के विरोध के बाद उनकी आपत्ति संसद की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दी गई.
बीजू जनता दल के वरिष्ठ नेता भर्तृहरि महताब ने कहा कि मान की टिप्पणी बहुत अपमानजनक थी.
बाद में बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि प्रेज़िडेंट के लिए किस शब्द का इस्तेमाल किया जाए वो संविधान सभा की बहसों में तय हो चुका है, 'हम इस पर अलग से बात कर सकते हैं. लेकिन, रिकॉर्ड से हटाया जाए.'
लेकिन, मान का कहना है, ''ये कैसे अपमानजनक था? मेरा ये कहना था कि एक महिला प्रेज़िडेंट के लिए राष्ट्रपति शब्द इस्तेमाल करना जेंडर के हिसाब से सही नहीं है. उन्हें प्रेज़िडेंट कहना सही है. आप हिंदुस्तानी में उन्हें सदर कह सकते हैं. अगर आप दक्षिणपंथी तरीक़े से देखें तो राष्ट्रकर्ता नाम दिया जा सकता है.''

एम्स की नियुक्तियों में एससी-एसटी से भेदभाव
एक संसदीय पैनल ने पाया है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की परीक्षाओं और नियुक्तियों में अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव होता है. जातिगत पूर्वाग्रह के कारण कई एससी-एसटी एमबीबीएस छात्र परीक्षाओं में बार-बार असफल होते हैं.
बीजेपी नेता किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी की अध्यक्षता वाली अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति ने एक रिपोर्ट में एम्स, नई दिल्ली में फैकल्टी भर्तियों के दौरान दलित और आदिवासी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है.
अंग्रेज़ी अख़बार द टेलिग्राफ़ के मुताबिक ये रिपोर्ट राज्यसभा में गुरुवार को प्रस्तुत की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, "समिति को यह समझना था कि एससी और एसटी समुदाय के एमबीबीएस छात्रों को कई प्रयासों के बावजूद परीक्षा के पहले, दूसरे और/ या तीसरे चरण में एमबीबीएस कोर्स में कई बार असफल किया जाता है."
''अक्सर यह देखा गया है कि इन छात्रों ने थ्योरी परीक्षाओं में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन प्रैक्टिकल परीक्षाओं में असफल हो गए. यह साफ़ तौर पर एससी/ एसटी छात्रों के प्रति पूर्वाग्रह को दिखाता है."
30 सदस्यीय इस समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भविष्य में ऐसा होने से रोकने के लिए सख़्त कदम उठाने की सिफारिश की है. साथ ही कहा है कि एम्स के छात्रों को परीक्षा के लिए एक कोड दिया जाए ना कि उनके नाम का इस्तेमाल हो.

चित्रकूट एनकाउंटर मामले में 14 पुलिसकर्मियों पर एफ़आईआर
चित्रकूट एनकाउंटर मामले में उत्तर प्रदेश के 14 पुलिसकर्मियों पर हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया गया है.
अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि एक पूर्व पुलिस अधीक्षक समेत 13 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कथित फर्ज़ी एनकाउंटर में एक गैंगस्टर की हत्या को लेकर एफ़आईआर दर्ज की गई है.
गैंगस्टर बालचंद्र यादव को गौरी गैंग का सदस्य बताया जाता है. यूपी पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने मध्य प्रदेश में सतना से अदालत से लौटते हुए बालचंद्र यादव का अपहरण किया था.
बालचंद्र यादव की पत्नी का आरोप है कि उन्हें अपहरण की शाम को ही एक फर्ज़ी एनकाउंटर में मार दिया गया. पत्नी ने कोर्ट से जांच की मांग की थी.
पत्नी ने दावा किया, ''उन्हें सीने पर गोली मारी गई थी लेकिन उनकी कमीज़ पर कोई छेद या खून के निशान नहीं थे जिससे पता चलता है कि उन्हें पुलिस कस्टडी में मारा गया है और बाद में शव को कपड़े पहनाए गए हैं.''
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