5जी स्पेक्ट्रम नीलामी: इंटरनेट के नए दौर की शुरुआत, लेकिन बदलाव में लगेगा समय

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    • Author, शुभम किशोर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में 5जी नेटवर्क के स्पेक्ट्रम की नीलामी 26 जुलाई से शुरू हो जाएगी. देश की चार कंपनियां इसकी नीलामी में हिस्सा लेंगी. रेस में सबसे आगे रिलांयस जियो नज़र आ रही है. कंपनी ने दूरसंचार विभाग के पास 14,000 करोड़ रुपये जमा किए हैं.

भारती एयरटेल ने 5500 करोड़ रूपये और अडानी ने 100 करोड़ रुपये जमा किए हैं. वोडाफोन आइडिया ने 2200 करोड़ रुपए जमा किए हैं. हालांकि अडानी समूह से साफ़ किया है कि वो टेलिकॉम के बिज़नेस में नहीं उतरना चाहते और 5जी का इस्तेमाल अपने बिज़नेस में कामकाज बेहतर करने के लिए करेंगे. लेकिन इस ऑक्शन के क्या मायने हैं और इसके बाद क्या आपके रोज़मर्रा के कामों पर कोई असर पड़ेगा?

स्पेक्ट्रम की नीलामी का क्या अर्थ है?

इसे समझाते हुए आईआईटी रोपड़ के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर सुदिप्त मिश्रा कहते हैं, "पहले हम रेडियो का इस्तेमाल करते थे. इनमें एएम, मीडियम वेव और एफएम होता था. उसमें लिखा होता था कि हम कितने मेगाहर्ट्स या किलोहर्ट्स पर जा सकते हैं. यानी हम अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर अलग अलग चीज़ों को सुन सकते हैं."

इसी तरह 2जी, 3जी, 4जी और 5जी के लिए अलग अलग फ्रीक्वेंसी होती हैं. स्पेक्ट्रम फ्रिक्वेंसी की एक रेंज है जिसका इस्तेमाल मोबाइल कम्यूनीकेशन के लिए किया जाता है.

किसी भी नेटवर्क को अलग-अलग स्पेक्ट्रम बैंड में बांटा जाता है. 5जी नेटवर्क के साथ भी ऐसा ही है. इसे लो, हाई और मिड बैंड में बांटा गया है.

इस बार सरकार 72 गीगाहर्ट्स के स्पेक्ट्रम की नीलामी करेगी, इनमें लो स्पेक्ट्रम (600 मेगा हर्ट्स, 700 मेगा हर्ट्स, 800 मेगा हर्ट्स, 900 मेगा हर्ट्स, 1800 मेगा हर्ट्स, 2100 मेगा हर्ट्स, 2300 मेगा हर्ट्स), मिड (3300 मेगा हर्ट्स) और हाई (26 गीगा हर्ट्ज़) के स्पेट्रम शामिल है.

जून में सरकार की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया था, "ये उम्मीद की जा सकता है कि मिड और हाई बैंड स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल टेलीकॉम कंपनियां 5जी टेक्नॉलॉजी पर आधारित सर्विसेज़ देंगी. इसकी स्पीड 4जी से 10 गुणा अधिक हो सकती है."

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आपको क्या फ़ायदा होगा?

5जी, जैसा की नाम से पता चलता है, ये मोबाइल नेटवर्क का पांचवां जेनरेशन है. ये बेहतर फ्रीक्वेंसी पर काम करेंगे, इसलिए अपलोड और डाउनलोड स्पीड बढ़ने की उम्मीद है.

सुदिप्त कहते हैं, "3जी से 4जी में आप देख सकते हैं कि डेटा रेट बहुत अच्छा हो गया. ऑपरेटर के लिए लागत में कमी आई जिससे डेटा सस्ता हो गया और वो अब कई दूसरी सर्विस भी दे रहे हैं. 5जी से भी कई और सर्विसेज़ जैसे मैपिंग एप्लीकेशन अच्छे हो जाएंगे."

भारत में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने वाले अक्सर कॉस ड्रॉप होने से लेकर स्लो इंटरनेट जैसी शिकायत करते हैं. तो क्या 5जी के आने से ये शिकायतें दूर हो जाएंगी? जानकार मानते हैं कि अभी इस पर पर जवाब देना मुश्किल है.

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दुनिया के जिन मुल्कों में 5G लॉन्च किया जा रहा है वहां ये देखा गया है कि 5G मोबाइल नेटवर्क का इंफ्रास्ट्रक्चर अलग है. 4G (एलटीई) और 3G नेटवर्क से अलग उच्च बैंडविड्थ और कम विलंबता वाली नई रेडियो तकनीक और एक अलग नेटवर्क की ज़रुरत पड़ेगी.

5G की रफ़्तार की क्षमता 10 जीबीपीएस तक है जो 4G की 100 एमबीपीएस स्पीड से 100 गुना तेज़ है.

सुदिप्त के मुताबिक, "अगर आप 4जी की बात करें, तो वो पूरी तरह से 4जी नहीं था. ये तकनीकी तौर पर 3.8 जी तक ही रह गया. इसलिए 5जी से उम्मीदें बहुत हैं, लेकिन वो इसपर कितना ख़रा उतर पाता है, ये देखना दिलचस्प होगा."

"लेकिन 5जी को सिर्फ़ डेटा स्पीड के हिसाब से नहीं देखना चाहिए. भविष्य में 'इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स' के लिए ये बहुत काम आएंगे."

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इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स क्या है

स्पीड 5जी का महज़ एक हिस्सा भर है, आने वाले समय में इसकी उपयोगिता कई क्षेत्रों में बढ़ेगी. मुमकिन है ये आपके रोज़मर्रा के काम आसान कर दे.

अभी इंटरनेट का इस्तेमाल हम ज़्यादातर मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर पर कर रहे हैं. लेकिन 5जी से कनेक्ट कर हम फ़्रिज, टीवी, माइक्रोवेव ओवन, वॉशिंग मशीन और एसी को भी तेज़ रफ़्तार इंटरनेट से जोड़ सकेगा, आप सभी चीज़ों को इंटरनेट से कनेक्ट कर ऑपरेट कर सकते हैं.

5जी की लैटेंसी बहुत कम होगी. लेटेंसी डिवाइस से सर्वर तक पहुंचने वाले आदेश का समय, यानी कि अगर हम किसी डिवाइस से किसी चीज़ को कोई काम करने के लिए सिग्नल भेजते हैं, तो वो बहुत जल्दी वहां पहुंचेगा, इससे कई काम आसान हो जाएंगे.

लेकिन इसके लिए एक बेहतर इन्फ्रास्ट्रकचर की ज़रूरत पड़ेगी और कंपनियों को इसे आप तक पहुंचाने में समय लगेगा. और ये कितने कारगर साबित होंगे वो भी कंपनियों के इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा.

भारत में इस तरह की सुविधाएं मिलने में अभी कुछ साल लग सकते हैं, लेकिन कंपनिया दावा कर रही हैं कि वो जल्दी ही 5जी लेकर आ जाएंगी. कुछ मोबाइल फ़ोन और 5जी के लिए कम्पैटिबल भी हो गए हैं.

तो अगर 5जी अगले एक साल में आता है, तो इससे तुरंत आपको क्या फ़ायदा होगा.

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प्रोफ़ेसर सुदिप्त कहते हैं, "अगर हम शहरों की बात करें, मान लीजिए मेरे पास 5जी फ़ोन आता है तो सर्विसेज़ और डेटा का इस्तेमाल मैं बेहतर कर पाऊंगा. ई-लर्निंग जैसी चीज़े बेहतर होंगी. आप सर्विसेज़ और जगहों को लोकेट करना चाहते हैं, वो आप आसानी से कर पाएंगे. अगर होम ऑटोमेशन से जुड़ी चीज़े घर में हैं, तो उनका इस्तेमाल हम बेहतर तरीके से कर सकेंगे."

"गांव की बात करें तो ई-गवर्नेंस और खेती से जुड़ी कई चीज़े बेहतर हो जाएंगी. टेक्नॉलॉजी के हिसाब से कई नई सर्विसेंज़ बनाने होंगे. उनके लिए जब तक ये सर्विसेज़ बनेगी नहीं तब तक बहुत फ़ायदा नहीं होगा."

हालांकि वो ये भी कहते हैं कि कुछ कंपनियों ने पिछले साल में कई नई तकनीक लेकर आईं हैं, और ये कहना कि 5जी के साथ काम करने वाले नए डिवाइस आने में बहुत ज़्यादा समय लगेगा, ये गलत होगा.

क्या आपका फ़ोन बिल कम होगा?

5जी की देश में कीमत क्या होगी, ये इस बात पर निर्भर कर सकती है कि स्पेक्ट्रम की नीलामी में कंपनियां कितने पैसे ख़र्च करती हैं. लेकिन भारत में टेलिकॉम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बहुत कम है. इसलिए हो सकता है कि जिस कंपनी का दबदबा है, वो अपनी कीमतें ज्यादा रखे.

लेकिन 5जी के आने के 4जी और 3जी सी सेवाएं ख़त्म नहीं होंगी, ये साथ साथ चलती रहेंगी.

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