नए संसद भवन में राष्ट्रीय प्रतीक पर क्या है विवाद?

नया संसद भवन

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बीबीसी हिंदी
  • सोमवार 11 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने नए संसद भवन में स्थापित राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया
  • 605 मीटर ऊंची इस विशालकाय मूर्ति में शेरों हावभाव पर सोशल मीडिया में छिड़ा विवाद
  • कुछ लोग शेरों को दयालु और राजसी होने के बजाय गुस्से से भरा बता रहे हैं.
  • सरकार समर्थक आलोचकों को अज्ञानी बता रहे हैं.
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सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में बन रहे नए संसद भवन की छत पर, भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया था.

चार एशियाटिक शेरों को एक वृत्ताकार डिस्क पर दिखाने वाला भारत का राष्ट्रीय प्रतीक, मौर्य सम्राट अशोक के भारत भर में मिले स्तंभो के ऊपर टिका हुआ होता है.

ईसा पूर्व 250 में सम्राट अशोक देश भर में इन स्तंभों को स्थापित करवाया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह इसके अनावरण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था.

तब पहली बार 6.5 मीटर ऊंची, इस 9,500 किलोग्राम की मूर्ति के बारे में पता चला था. ये विशालकाय मूर्ति नई दिल्ली में बन रहे नए संसद भवन के ठीक बीचोंबीच स्थापित की गई है.

लेकिन ज़ोर-शोर से किया गया राष्ट्रीय प्रतीक का ये अनावरण, अब एक विवाद का हिस्सा बनता जा रहा है.

आलोचकों का कहना है कि नए संसद भवन में लगने वाले राष्ट्रीय प्रतीक के शेर, अपने वास्तविक ऐतिहासिक 'लुक' की तुलना में 'क्रूर' दिख रहे हैं.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा है कि मौर्य सम्राट अशोक के शासन में बना चार शेरों वाला ये प्रतीक देश की राजधानी में उपनिवेशवाद की समाप्ति के युग के बाद का 'मील का पत्थर' साबित होगा.

भारत के विभिन्न हिस्सों में मिले मौर्यकालीन स्तंभो के ऊपर टिका ये प्रतीक सबसे भव्य रूप में वाराणसी के पास सारनाथ में देखने को मिलता है. इसे अब सारनाथ के संग्रहालय में देखा जा सकता है.

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सोशल मीडिया पर उठे सवाल

लेकिन नए संसद भवन पर लगे करीब साढ़े नौ टन के राष्ट्रीय प्रतीक के शेरों के हावभाव पर सोशल मीडिया पर कुछ लोग सवाल उठ रहे हैं.

लोगों ने कहा कि जिस रूप में शेरों को दिखाया गया है वो अशोक स्तंभ पर लगने वाले वास्तविक शेरों से बिल्कुल भिन्न है.

सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि वास्तविक शेर, 'दयालु और राजसी वैभव' वाले लगते हैं लेकिन नए संसद भवन पर लगे राष्ट्रीय प्रतीक के शेर 'गरजते-दहाड़ते' से नज़र आ रहे हैं.

राजधानी दिल्ली में बन रहा नया संसद भवन, अरबों के ख़र्च से बन रहे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है. योजना अंग्रेज़ों के बनाए सरकारी दफ़्तरों के आधुनिकीकरण करने की है.

वीडियो कैप्शन, इस प्रॉजेक्ट के तहत आज़ादी से पहले की कई इमारतों के पुनर्निमाण की तैयारी है.

सोमवार को कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के नेता सीताराम येचुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनावरण पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि ये कार्यपालिका और विधायिका के बीच शक्ति के विभाजन के विरुद्ध है. क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी कार्यपालिका के प्रमुख हैं लेकिन संसद भवन विधायिका का प्रतीक हैं.

सीताराम येचुरी ने अनावरण के समय प्रधानमंत्री द्वारा पूजा पर भी प्रश्न उठाए हैं. विपक्षी दलों ने ये भी कहा है कि उन्हें मूर्ति के अनावरण के लिए नहीं बुलाया गया था.

इसके अलावा एआईएमआईएम के नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी सीताराम येचुरी की तर्ज पर प्रधानमंत्री द्वारा अनावरण किए जाने का विरोध किया था.

लेकिन कुछ लोगों के प्रधानमंत्री द्वारा किए गए अनावरण की ख़ूब तारीफ़ की है.

वरिष्ठ पत्रकार मिनहाज़ मर्चेंट ने भी ट्वीट कर कहा है कि जिसने भी इन शेरों को गु़स्से में दिखाया है उसे दोबारा डिज़ाइन स्कूल में पढ़ने जाना चाहिए.

लेकिन एक अन्य पत्रकार कंचन गुप्ता ने मूर्ति की आलोचना करने वालों को अज्ञानी बताया है.

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उन्होंने ट्वीट किया, " जो नई संसद के ऊपर स्थापित किए गए राष्ट्रीय प्रतीक की आलोचना कर रहे हैं वो अज्ञानी हैं. जो इस बारे में रिपोर्ट लिख रहे हैं या इसे आगे फैला रहे हैं वो नासमझ हैं.

लेकिन कई राजनीतिक पार्टियों ने भी अनावरण में शेरों के हावभाव पर प्रश्न उठाए हैं. राष्ट्रीय जनता दल ने ट्वीट कर कहा है, "मूल कृति के चेहरे पर सौम्यता का भाव तथा अमृत काल में बनी मूल कृति की नक़ल के चेहरे पर इंसान, पुरखों और देश का सबकुछ निगल जाने की आदमखोर प्रवृति का भाव मौजूद है."

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क्या है सैंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट

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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत एक नए संसद भवन और नए केंद्रीय सचिवालय के साथ राजपथ के पूरे इलाके का री-डेवलपमेंट होना है.

ऐसी उम्मीद थी कि इस वर्ष आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर नया संसद भवन बनकर तैयार हो जाएगा. लेकिन अब अधिकारियों ने कहा है कि ये अब अक्तूबर तक ही तैयार हो पाएगा.

विपक्ष दल इस प्रोजेक्ट पर हो रहे ख़र्च पर सवाल उठाते रहे हैं. ये मामला भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी पहुँचा था पर अदालत ने इसे हरी झंडी दे दी थी.

दिल्ली के पावर कॉरिडोर में होगा, इसके एक छोर पर राष्ट्रपति भवन होगा, तो दूसरे छोर पर सुप्रीम कोर्ट. पीएम के घर के बग़ल में ही संसद भवन होगा.

सरकारी दस्तावेज़ों के मुताबिक़ 15 एकड़ में फैले इस परिसर में 10 चार मंज़िला इमारतें होंगी. ये परिसर राष्ट्रपति भवन और साउथ ब्लाक के बीच होगा, जहां पीएम और रक्षा मंत्रालय के दफ़्तर हैं.

1940 में अंग्रेज़ो द्वारा बनाए गए बैरकों को भी तोड़ दिया जाएगा. इनमें हालत तक केंद्र सरकार के दफ़्तर चलते थे.

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