सेंट्रल विस्टा: मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट का निर्माण कोरोना महामारी के दौर में 'आवश्यक सेवा' कैसे?

सेंट्रल विस्टा

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    • Author, राघवेंद्र राव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पिछले कुछ दिनों से देश की राजधानी में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोगों के दम तोड़ने की भयावह ख़बरों के बीच नई दिल्ली का चेहरा बदलने वाली महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा परियोजना का काम जारी है.

दिल्ली के दिल में 20 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की लागत से पूरी होने वाली इस सरकारी परियोजना को 'आवश्यक सेवा' घोषित किया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि दिल्ली में लॉकडाउन होने के बावजूद इस परियोजना पर मज़दूर काम करते रहें.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत एक नए संसद भवन और नए केंद्रीय सचिवालय के साथ राजपथ के पूरे इलाके का री-डेवलपमेंट होना है. दिल्ली में 19 अप्रैल से लगे लॉकडाउन के बावजूद सेंट्रल विस्टा का काम जारी रखा गया और इसके लिए दिल्ली पुलिस ने अनुमति भी दी.

बीबीसी ने दिल्ली पुलिस से इस विषय पर बात करने की कोशिश की और यह जानना चाहा की इस परियोजना पर चल रहा कार्य 'आवश्यक सेवा' के दायरे में कैसे आ सकता है?

इस सवाल का जवाब पाने के लिए बीबीसी ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी और शहरी विकास सचिव को ईमेल के ज़रिए सवाल भेजे थे लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला है, जवाब मिलने पर यह रिपोर्ट अपडेट कर दी जाएगी.

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पुलिस और लोकनिर्माण विभाग का पक्ष

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) के आदेश के अनुसार ऑन-साइट निर्माण गतिविधियों की अनुमति है. तो इसमें हम कुछ कर नहीं सकते क्योंकि डीडीएमए का आदेश इसकी अनुमति देता है. बाहर से अगर मज़दूर आएंगे तो उसकी इजाज़त नहीं है."

जब उनसे यह पूछा गया कि अगर मज़दूर ऑन-साइट ही रहेंगे तो पुलिस से मज़दूरों को लाने-ले जाने की अनुमति क्यों मांगी गई, तो अधिकारी ने कहा, "हमारी समझ के अनुसार मज़दूर साइट पर ही रहेंगे और सामान आएगा-जाएगा."

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक पीएस चौहान सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं.

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बीबीसी ने उनसे पूछा कि इस परियोजना के काम को आवश्यक सेवा कैसे माना जा सकता है. उन्होंने कहा, "जहाँ साइट पर मज़दूर उपलब्ध हैं, वहां काम जारी रखने की अनुमति है. एक सीमित संख्या में जो मज़दूर साइट पर उपलब्ध हैं, वो काम कर रहे हैं. वो तो काम कर ही सकते हैं क्योंकि निर्माण कार्यों की अनुमति है अगर वो साइट पर काम कर रहे हैं. जो दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी गई है वह कंक्रीट जैसी निर्माण सामग्री लाने के लिए है."

जब उनसे पूछा गया कि "ऑन-साइट" कितने मज़दूर रहकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि इसका ब्यौरा उनके पास नहीं है और वे इस विषय पर बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं.

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आवश्यक सेवा या वैनिटी प्रोजेक्ट?

बीबीसी ने जाने-माने आर्किटेक्ट नारायण मूर्ति से बात की जो सेंट्रल विस्टा परियोजना का शुरुआत से ही विरोध करते आ रहे हैं.

मूर्ति कहते हैं, "क्यों इसे आवश्यक सेवाओं में शामिल किया गया था, इसका उत्तर केवल वही दे सकते हैं जिन्होंने इसकी अनुमति दी. इस परियोजना के बारे में इतना आवश्यक ऐसा कुछ भी नहीं है. इस समय कई और चीज़ें हैं जो ज़्यादा ज़रूरी हैं."

मूर्ति कहते हैं, "आज महामारी के दौरान सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस पर काम जारी रहे. इस पर काम करने के लिए सैकड़ों मज़दूरों को भीड़-भाड़ वाली बसों में लाया जा रहा है. यह परियोजना उसी जनविरोधी तरीके से चल रही है जिस तरीके से इसकी शुरुआत हुई थी."

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इन आलोचनाओं का जवाब केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी कई बार दे चुके हैं, उन्होंने इस साल के शुरू में समाचार एजेंसी एएनआई से कहा था, "नई इमारत भारत की आकांक्षाओं को दर्शाएगी, मौजूदा इमारत 93 साल पुरानी है जिसका निर्माण भारत की निर्वाचित सरकार ने नहीं किया था, इसका निर्माण औपनिवेश काल में हुआ था."

वास्तुकार, शहरी योजनाकार और संरक्षण सलाहकार एजी कृष्णा मेनन वर्तमान में इनटैक के दिल्ली चैप्टर के संयोजक हैं. वे कहते हैं कि "यह परियोजना शुरू से ही ग़ैर-ज़रूरी थी".

वो कहते हैं, "दो साल पहले से हम लोग यह कह रहे हैं कि इस परियोजना को चलाने की ज़रूरत नहीं है. यह एक दिखावे का प्रोजेक्ट है. लोकतंत्र के नाम पर यह सब किया जा रहा है."

मेनन का मानना है कि यह परियोजना पहले से ही ग़लत थी अब महामारी के समय में तो यह और भी ग़लत हो गई है. वो कहते हैं, "इस समय यह बात हो रही है कि विदेशों से कितनी सहायता मिल रही है लेकिन जब देश के पास ख़ुद इतना पैसा था तो उस सहायता की क्या ज़रूरत थी?"

नई संसद

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वो कहते हैं, "यह शर्म की बात है कि इस परियोजना के काम को आवश्यक सेवाओं में गिना जा रहा है. लोग मर रहे हैं अस्पतालों में, ऑक्सीजन नहीं मिल रही. और एक वैनिटी प्रोजेक्ट को बनाने के लिए उसे आवश्यक सेवा कहा जा रहा है."

पर्यावरण और वन मंत्रालय की पूर्व सचिव मीना गुप्ता का भी कहना है कि इस परियोजना पर चल रहा काम ग़लत है.

वो कहती हैं, "यह एक आवश्यक सेवा बताई जा रही है. इसमें क्या ऐसा है जो आवश्यक है? कोविड के समय में आप विदेश से सहायता ले रहे हैं, तो इस परियोजना के लिए इतनी जल्दी क्यों है? विदेशों और देशों के लोग पैसा भेज रहे हैं और आप किसी ऐसी चीज़ पर अपना ख़र्च नहीं रोक पा रहे हैं, जो पूरी तरह ग़ैर-ज़रूरी है."

वीडियो कैप्शन, लॉकडाउन के एक साल बाद भी इनके ज़ख़्म हरे हैं

मीना गुप्ता पूछती हैं, "देश में किसी को भी टीके क्यों ख़रीदने की नौबत आए? सरकार को सेंट्रल विस्टा के विकास पर 20 हज़ार करोड़ से अधिक राशि क्यों खर्च करना चाहिए?"

मीना गुप्ता कहती हैं कि अगर यह महामारी के ख़त्म होने तक एक-दो साल के लिए स्थगित हो जाता है, तो यह धन लोगों के स्वास्थ्य में अधिक कारगर तरीके से उपयोग हो सकेगा. यह गलत प्राथमिकताओं का मामला है."

इन आलोचनाओं के बीच इसी सवाल पर फ़रवरी में शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने कहा था, "सेंट्रल विस्टा आधुनिक भारत का प्रतीक होगा. कुछ लोग इसका महत्व नहीं समझते हैं, कुछ लोग देश को विकास करते नहीं देख सकते."

क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट?

रायसीना हिल पर पुरानी इमारतों को सुधारने, आम सचिवालय भवनों को बेहतर बनाने, पुराने संसद भवन का नवीनीकरण करने और सांसदों की आवश्यकता अनुसार नई जगह बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सेंट्रल विस्टा परियोजना शुरू की है. इस परियोजना पर लगभग 20 हज़ार करोड़ रुपये के ख़र्च होने का अनुमान है.

सेंट्रल विस्टा का काम नवंबर 2021 तक, नए संसद भवन का काम मार्च 2022 तक और कॉमन केंद्रीय सचिवालय का काम मार्च 2024 तक पूरा किया जाना है.

वीडियो कैप्शन, इस प्रॉजेक्ट के तहत आज़ादी से पहले की कई इमारतों के पुनर्निमाण की तैयारी है.

केंद्र सरकार का यह कहना है कि रायसीना हिल पर और राजपथ से सटे भवनों की ज़रूरतें अब कई गुना बढ़ गई हैं और कई वर्ष पहले डिज़ाइन की गई ये इमारतें अब पर्याप्त स्थान, सुविधाएं और ज़रूरतें पूरी करने में सक्षम नहीं हैं. सरकार का यह भी कहना है कि अब सभी केंद्रीय सरकार कार्यालयों को समायोजित करने के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता है.

साथ ही, ये वजह भी दी गई है कि परिसीमन के कारण भविष्य में अधिक संख्या में सांसद हो सकते हैं और इसलिए उनके लिए अधिक स्थान की आवश्यकता होगी और चूँकि वर्तमान सांसदों के लिए संसद भवन में आवश्यक स्थान और सुविधाएं काफी अपर्याप्त हैं, इसलिए एक नए संसद भवन की ज़रूरत है.

केंद्र सरकार का ये भी कहना है कि बहुत सारे विदेशी लोग इस इलाके में आते हैं और इसे विश्वस्तरीय पर्यटक आकर्षण बिंदु बनाने के लिए इसकी सुंदरता बढ़ाना ज़रूरी है.

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