गोवा कांग्रेस में फूट के लिए क्या बीजेपी ज़िम्मेदार है?

सोनिया गांधी

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    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

महाराष्ट्र के बाद गोवा में एक नया राजनीतिक संकट खड़ा होता दिख रहा है. कांग्रेस जहां एक ओर अपने चार-पांच विधायकों के पार्टी छोड़ने की बात कर रही है. वहीं, दूसरी ओर संबंधित विधायक कांग्रेस में ही रहने की बात कर रहे हैं.

कांग्रेस ने इस राजनीतिक संकट के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराते हुए अपने दो विधायकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का एलान किया है.

कांग्रेस नेता दिनेश गुंड्डू राव ने कहा है कि "बीजेपी चाहती थी कि हमारे कम से कम 8 विधायक पार्टी छोड़ दें. इसके लिए हमारे विधायकों को बहुत सारा पैसा देने की पेशकश की गई. मैं उस धनराशि के बारे में सुनकर दंग रह गया जो बीजेपी दल-बदलने के लिए दे रही थी."

इसके बाद कांग्रेस ने गोवा विधानसभा में अपने नेता प्रतिपक्ष माइकल लोबो को उनके पद से हटा दिया है.

गोवा कांग्रेस शाखा के अध्यक्ष अमित पाटकर ने इस मामले में स्पीकर को पत्र भी सौंप दिया है. हालांकि, ये विधायक सोमवार सुबह शुरू हुए गोवा विधानसभा के मॉनसून सत्र में हिस्सा लेने के लिए असेंबली पहुंचे और उन सीटों पर बैठे जहां कांग्रेस विधायक बैठते हैं.

कांग्रेस की ओर से विधानसभा स्पीकर को दिया गया पत्र

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गोवा कांग्रेस में क्या हो रहा है

ये पहला मौका नहीं है जब गोवा में कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ली हो.

इससे पहले साल 2019 में पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद कांग्रेस के दस विधायकों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ली थी.

दिलचस्प बात ये है कि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. कांग्रेस के पास 17 विधायक थे और बीजेपी के पास 13 विधायक थे.

बीजेपी इसके बाद भी सरकार बनाने में सफल रही और चार सालों में कांग्रेस के विधायकों की संख्या 17 से घटकर चार रह गई.

इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 11 सीटों पर जीत हासिल हुई. और इस चुनाव के मात्र चार महीने बाद कांग्रेस के सामने एक बार फिर विधायक खोने का संकट मंडरा रहा है.

सोनिया गांधी

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कांग्रेस की इस हालत के लिए कौन ज़िम्मेदार

ऐसे में सवाल उठता है कि गोवा में कांग्रेस की इस राजनीतिक हालत की वजह क्या है?

गोवा में कांग्रेस और बीजेपी की राजनीति को समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार मुरारी शेटे इस हालत के लिए कांग्रेस नेतृत्व को ज़िम्मेदार मानते हैं.

वे कहते हैं, "हालिया विधानसभा चुनाव के नतीज़े आने के बाद से कांग्रेस विधायक दिगंबर कामत पार्टी में नज़रअंदाज़ किए जाने की वजह से नाख़ुश थे. पार्टी ने माइकल लोबो को नेता प्रतिपक्ष बना दिया था. इसके बाद सरकार ने लोबो के व्यापारिक संस्थानों पर कथित रूप से नियमों के उल्लंघन के मामले में कार्रवाई की."

"कामत को सीडब्ल्यूसी बैठक में ले जाया गया. लेकिन वे खुद की अनदेखी किए जाने से नाराज़ हैं. कांग्रेस के विधायकों में पहले से ही असंतोष की भावनाएं थीं. और ऐसे में विधायकों ने सोचा कि विपक्ष में रहने से बेहतर था कि सत्तारूढ़ दल में रहा जाए."

लेकिन सवाल ये उठता है कि कांग्रेस विधायकों के बीजेपी में जाने की ख़बरों के बाद उनके खंडन की वजह क्या है?

माइकल लोबो

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कांग्रेस में भविष्य का प्रश्न

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद आचार्य मानते हैं कि दोनों पक्षों में स्थिति बहुद पेचीदगी भरी हो गई है.

वे कहते हैं, "कांग्रेस के अंदर ऐसे नेता हैं जो अब पार्टी में नहीं रहना चाहते हैं. क्योंकि उन्हें कांग्रेस में कोई भविष्य नज़र नहीं आता है. यही नेता बीजेपी से जुड़ना चाहते हैं. इसी वजह से ये हलचलें शुरू हुई थीं. लेकिन बीजेपी में दो गुट हैं. एक गुट चाहता है कि अगर कांग्रेस को तोड़ा जा सकता है, तो तोड़ना चाहिए, अगर दो तिहाई विधायक आ सकते हैं, तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए."

"वहीं, दूसरा गुट कहता है कि हमें और ज़्यादा विधायकों की ज़रूरत नहीं है और इससे ज़्यादा जटिलताएं आएंगी. ऐसे में बीजेपी के अंदर एक गुट है जो चाहता है कि ये कांग्रेस विधायक पार्टी में शामिल हों और एक गुट इन विधायकों के लिए अड़चनें पैदा कर रहा है."

कांग्रेस में भी दो गुट हैं जिसमें से एक कहता है कि दो तिहाई विधायकों को बीजेपी के साथ चले जाना चाहिए और दूसरा गुट कहता है कि उन्हें कांग्रेस के साथ रहना चाहिए क्योंकि अगर हम पार्टी छोड़ देंगे तो हम वापस चुनकर नहीं आ पाएंगे."

लेकिन सवाल उठता है कि वो राज्य जहां कांग्रेस सरकार बनाने के क़रीब पहुंच गई थी, वहां के विधायक पार्टी से इतने असंतुष्ट क्यों हैं?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी

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पार्टी नेताओं में असंतोष एक वजह?

गोवा के कांग्रेस नेताओं में असंतोष की बात एक अरसे से कही जा रही है, लेकिन सवाल ये है कि इस असंतोष की असली वजहें क्या हैं?

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद आचार्य मानते हैं कि कांग्रेस में सही समय पर फ़ैसले न लिए जाना नेताओं के असंतोष की बड़ी वजह है.

वे कहते हैं, "कांग्रेस नेताओं का असंतोष सिर्फ गोवा तक सीमित नहीं है. मुझे लगता है कि कांग्रेस में फ़ैसले लिए जाने की जो व्यवस्था है, वो केंद्र से लेकर राज्य तक पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है. वो न वक़्त पर फ़ैसले ले सकते हैं और न हीं समय रहते हस्तक्षेप कर सकते हैं."

"अगर किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर फ़ैसला लेना होता है, तब भी जवाब आने के लिए कभी-कभी हफ़्ते लग जाते हैं. मुझे लगता है कि मुख्य वजह यही है. क्योंकि न नेतृत्व है और न ही फ़ैसले लिए जाते हैं. और इन दोनों चीजों के अभाव में संगठन भी ध्वस्त हो चुका है. लोग पार्टी को वोट देना चाहते हैं लेकिन उस दिशा में फै़सले नहीं हो पाते."

दिगंबर कामत

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क्या बीजेपी ज़िम्मेदार है?

हालांकि, कांग्रेस इस उठा-पटक के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहरा रही है. लेकिन सवाल ये उठता है कि कांग्रेस के आरोपों में कितना दम है?

मुरारी शेटे कहते हैं, "इस समय बीजेपी सरकार काफ़ी स्थाई है. इस समय ऐसी कोई ज़रूरत नहीं है कि किसी अन्य पार्टी से विधायकों को लेकर आया जाए. लेकिन 2024 के आम चुनाव की नज़र से देखा जाए तो वे दक्षिण गोवा लोकसभा सीट जीतना चाहते हैं. गोवा में उत्तर और दक्षिण गोवा नामक दो लोकसभा सीटें हैं. उत्तरी गोवा लोकसभा सीट बीजेपी जीतती आ रही है. लेकिन दक्षिण गोवा में उनके लिए कुछ चुनौतियां हैं."

हालांकि, प्रमोद आचार्य मानते हैं कि "इस बार जो कुछ शुरू हुआ है, वो कांग्रेस के विधायकों का पार्टी के प्रति मोहभंग होने से शुरू हुआ है."

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