'सेल्फ़ी विद तिरंगा', कांग्रेस की 'डूबती नैया' को राष्ट्रवाद का सहारा - प्रेस रिव्यू

राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी

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कांग्रेस ने पार्टी के भीतर नेतृत्व संकट और लगातार गिरते मनोबल के बीच अब अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश फूँकने के लिए 'राष्ट्रवाद' का सहारा लिया है.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस ने इस साल अपने स्थापना दिवस को नए रंग-ढंग से मनाने की योजना बनाई है, जिसके केंद्र में राष्ट्रवाद को रखा गया है.

आगामी 28 दिसंबर को कांग्रेस का 136वाँ स्थापना दिवस है और एआईसीसी ने राज्य और ज़िला ईकाइयों से कहा है कि वो इस मौके पर 'रचनात्मक अभियानों' के बारे में सोचें.

इसके तहत जिन अभियानों की योजना बनाई गई है उनमें से एक है-तिरंगा यात्रा. बीजेपी भी कई मौकों पर तिरंगा यात्रा जैसे अभियान करती रही है.

इतना ही नहीं, कांग्रेस इस बार 'सेल्फ़ी विद तिरंगा' नाम से एक ऑनलाइन कैंपेन भी चलाने जा रही है.

पार्टी ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा है कि वो सोशल मीडिया पर 'सेल्फ़ी विद तिरंगा' से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करें.

संगीत सोम

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भड़काऊ भाषण के अभियुक्त बीजेपी नेताओं का केस वापस लेने की अर्ज़ी

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल 2013 मुज़फ़्फ़रनगर में आयोजित महापंचाय में भड़काऊ भाषण के अभियुक्त बीजेपी नेताओं के पर चल रहे मामलों को वापस लेने की पहल की है.

इनमें भारतीय जनता पार्टी के तीन नेता भी शामिल हैं. इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

भड़काऊ भाषण देने के मामले में मुज़फ़्फ़रनगर के सिखेड़ा पुलिस स्टेशन में बीजेपी नेता संगीत सोम, सुरेश राणा, कपिल देव और हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची के ख़िलाफ़ मामला दर्ज है.

बीजेपी के इन नेताओं पर निषेधाज्ञा के उल्लंघन, सरकारी अधिकारियों से बहस करने और लोगों को भड़काने के आरोप हैं.

मुज़फ़्फ़रनगर में सरकारी वकील राजीव शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस मामले को वापस लेने की अपील अदालत में दायर की गई है और मामला अभी भी लंबित है.

सात सितंबर, 2013 को जाट समुदाय ने नगला मंदौड़ गाँव के इंटर कॉलेज में एक महापंचायत बुलाई थी. महापंचायत कवाल गाँव में 27 अगस्त, 2013 को हुई दो युवकों की हत्या के सम्बन्ध में आगे की योजना तय करने के लिए बुलाई गई थी.

बीजेपी नेताओं और साध्वी प्राची पर इस महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे और महापंचायत ख़त्म होने के बाद इलाके में संप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी.

जल्लीकट्टू

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तमिलनाडु सरकार ने दी जल्लीकट्टू की इजाज़त

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के अनुसार तमिलनाडु सरकार ने जनवरी महीने में पोंगल त्योहार के दौरान पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू के आयोजन की अनुमति दे दी है.

हालाँकि कोरोना वायरस महामारी के मामलों को देखते हुए जल्लीकट्टू के दौरान कई नए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा.

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जल्लीकट्टू के दौरान 300 से ज़्यादा लोगों को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं होगी और वेन्यू तक पहुँचने के लिए सभी दर्शकों को थर्मल स्क्रीनिंग से गुजरना होगा.

इसके अलावा बैलों का पीछा करने वाले सभी लोगों को सरकार द्वारा प्रमाणित किसी लैब से कोरोना निगेटिव होने की रिपोर्ट देनी होगी.

सभी दर्शकों के लिए मास्क पहनना और फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना ज़रूरी होगा.

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