जम्मू-कश्मीर में जी-20 समिट पर क्या है विवाद, सऊदी अरब और तुर्की क्या करेंगे?

जी-20

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, रजनीश कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के संगठन जी-20 का 2023 का शिखर सम्मेलन जम्मू और कश्मीर में करने की तैयारी है. इसके लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने 23 जून को एक पाँच सदस्यीय समिति का गठन किया था.

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के वापस लिए जाने के बाद से ये वहाँ होनेवाला पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होगा.

मोदी सरकार ने पाँच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया था.

जी-20 दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों का संगठन है. इन 20 देशों की वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी 80 फ़ीसदी है.

केंद्र सरकार ने पिछले साल सितंबर में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को जी-20 के लिए भारत की ओर से शेरपा या प्रतिनिधि घोषित किया था.

जम्मू-कश्मीर में जी-20 सम्मेलन को लेकर आपत्तियाँ

एक दिसंबर, 2022 से 30 नवंबर, 2023 तक जी-20 की अध्यक्षता भारत के पास है और इसी वजह से अगले साल भारत को जी-20 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करनी है.

23 जून को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की ओर से जी-20 के लिए एक कमिटी बनाने का आदेश जारी किया गया था. प्रदेश के हाउसिंग और शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव को इस कमिटी का चेयरमैन बनाया गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह कमिटी चार जून को विदेश मंत्रालय की ओर से मिले निर्देश के आधार पर बनाई गई थी.

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी आदेश में कहा गया था, ''इस कमिटी के गठन की मंज़ूरी दी जाती है. केंद्र शासित प्रदेश में जी-20 समिट के आयोजन को लेकर यह कमिटी समन्वय का काम करेगी.'' इस आदेश पर जम्मू-कश्मीर के जनरल ऐडमिनिस्ट्रेटिव डिपार्टमेंट के प्रधान सचिव मनोज कुमार द्विवेदी का हस्ताक्षर है.

कई लोगों ने जम्मू-कश्मीर में जी-20 समिट करने की पहल का स्वागत किया है और इसे रणनीतिक क़दम बताया. लेकिन अब इसे लेकर विवाद हो गया है. सबसे पहले इस पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई.

मोदी

इमेज स्रोत, Getty Images

पाकिस्तान के बाद चीन की आपत्ति

पाकिस्तान ने 26 जून को भारत की इस पहल को ख़ारिज करते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर अंतराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य विवादित इलाक़ा है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ़्तिख़ार ने कहा," पिछले सात दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह अधूरा एजेंडा है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय जम्मू-कश्मीर के विवादित क्षेत्र होने के बावजूद इस समिट के लिए तैयार नहीं हो सकता.''

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित का कहना है कि भारत ने बहुत ही चालाकी से जी-20 की योजना बनाई है और पाकिस्तान को बहुत ही सावधानी से इस पर आगे बढ़ना होगा.

अब्दुल बासित ने एक वीडियो ब्लॉग में कहा है, ''चीन, सऊदी अरब, तुर्की और इंडोनेशिया को पाकिस्तान इस समिट में शामिल नहीं होने के लिए कहे. लेकिन इन देशों को अभी ही जम्मू-कश्मीर में आयोजन पर आपत्ति जतानी होगी नहीं तो फिर देर हो जाएगी. भारत इसमें खाड़ी के कई देशों को अतिथि के तौर पर बुलाना चाहता है. यूएई के बारे में तो सबको पता है. पिछले महीने ही यूएई के राष्ट्रपति ख़ुद पीएम मोदी के स्वागत में एयरपोर्ट पर खड़े थे. अगर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में इसे होने से नहीं रोक पाता है तो बड़ा झटका होगा.''

पाकिस्तान के बयान के बाद चीन से भी जम्मू-कश्मीर में जी-20 समिट के आयोजन को लेकर सवाल पूछा गया.

30 जून को मेक्सिको के एमएसटीवी ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजिआन की दैनिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सवाल पूछा था कि भारत 2023 में जी-20 समिट विवादित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर में कराने की योजना बना रहा है. भारत की इस योजना का पाकिस्तान ने विरोध किया है. चीन की इस पर क्या राय है?

इस सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''हमने इस हालिया प्रगति को नोट किया है. जम्मू-कश्मीर पर चीन का रुख़ स्पष्ट है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. कश्मीर का मुद्दा अतीत से ही विवादित है और इसका समाधान यूएन चार्टर, यूएन सिक्यॉरिटी काउंसिल के प्रस्ताव के साथ द्विपक्षीय समझौते के ज़रिए होना चाहिए. दोनों पक्षों को कुछ भी एकतरफ़ा करने से बचना चाहिए, जिससे स्थिति जटिल होती हो. संवाद के ज़रिए इसका समाधान खोजना चाहिए. यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए ज़रूरी है.''

चीन ने कहा, ''जी-20 अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय सहयोग के लिए अहम मंच है. हम सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से अपील करते हैं कि विश्व अर्थव्यवस्था को संकट से निकालने पर ध्यान केंद्रित करें और इस समिट का राजनीतिकरण ना करें. हमें वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सकारात्मक पहल करनी चाहिए.''

जी-20

इमेज स्रोत, Getty Images

चीन क्या शामिल नहीं होगा?

चीन के इस जवाब पर भारत की समाचार एजेंसी पीटीआई ने सवाल किया कि क्या चीन कश्मीर में जी-20 समिट में शामिल होगा? अगर कश्मीर का विवादित होना कोई मुद्दा है तो क्यों चीन इस इलाक़े से चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर ले जा रहा है?

इस पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''आपने दो मुद्दों का यहाँ उल्लेख किया है जबकि दोनों अपनी प्रकृति में बिल्कुल अलग हैं. चीन पाकिस्तान में कुछ परियोजनाओं को इसलिए शुरू किया है ताकि वहाँ के लोगों के जीवन स्तर और आजीविका में सुधार हो सके. ये परियोजनाएं पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में हैं. परियोजना से जुड़ी चीनी कंपनियां पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आजीविका की समस्या सुलझाने में मदद कर रही हैं. इससे कश्मीर पर चीन के रुख़ में कोई बदलाव नहीं आएगा.''

पीटीआई ने फिर पूछा कि क्या चीन कश्मीर में जी-20 की बैठक में शामिल होगा? इस पर चाओ लिजिआन ने कहा, ''मैंने पहले ही चीन का रुख़ स्पष्ट कर दिया. हमलोग इसे देखेंगे कि इस बैठक में शामिल होंगे या नहीं.''

भारत ने जब जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किया था तो चीन ने भी आपत्ति जताई थी और कहा था कि यथास्थिति से छेड़छाड़ उसे मंज़ूर नहीं है.

चीनी विदेश मंत्रालय

इमेज स्रोत, www.fmprc.gov

इमेज कैप्शन, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान

कहा जा रहा है कि भारत ने जम्मू-कश्मीर में जी-20 के आयोजन की पहल तो कर ली है लेकिन इसका आयोजन इतना आसान नहीं है.

चीन के अलावा तुर्की और सऊदी अरब से विरोध की होने की बात कही जा रही है.

पाकिस्तान की न्यूज़ वेबसाइट एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, पाकिस्तान की आपत्ति के बाद चीन, तुर्की और सऊदी अरब को भी जम्मू-कश्मीर में जी-20 सम्मेलन के आयोजन पर एतराज है. इसके अलावा पाकिस्तान अमेरिका, ब्रिटेन और जी-20 के अन्य देशों से भी इसे लेकर बात करेगा.

पाकिस्तान का मानना है कि अगर जम्मू-कश्मीर में जी-20 समिट का आयोजन होता है कि तो इससे संदेश जाएगा कि अंतरारष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर को लेकर भारत का रुख़ स्वीकार्य है और यहाँ सब कुछ सामान्य है.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

क्या मोदी सरकार पीछे हटेगी?

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने तीन जुलाई को ट्वीट कर बताया कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में जी-20 समिट कराने से पीछे हट रही है.

अपने ट्वीट में स्वामी ने लिखा है, ''मोदी सरकार जी-20 समिट से पीछे हट गई है. पहले घोषणा की गई थी कि इसका आयोजन जम्मू-कश्मीर में किया जाएगा. इसके बाद चीन गुर्राया और पाकिस्तान भौंका. इसके बाद मोदी सरकार डर गई और अब जी-20 समिट दिल्ली में कराने का फ़ैसला किया है. शायद प्रगति मैदान. 54 इंच का सीना!!''

बीबीसी ने सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा कि क्या उन्हें सरकार की ओर से कोई जानकारी मिली है कि जम्मू-कश्मीर में जी-20 समिट नहीं होगा? इसके जवाब में स्वामी ने बीबीसी से कहा, ''मुझे कई ऐसी रिपोर्ट मिली है कि दिल्ली में ही समिट होगा. मैं कह सकता हूँ कि प्रगति मैदान में ही होगा.'' अगर ऐसा होता है तो क्या यह भारत के लिए झटका है? इस पर स्वामी ने कहा- "अभी मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा लेकिन इस बारे में सरकार को पहले ही सोचना चाहिए था."

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

सऊदी अरब समेत खाड़ी के कई देशों में भारत के राजदूत रहे तलमीज़ अहमद कहते हैं कि भारत को पूरा अधिकार है कि वह जी-20 समिट अपने किसी भी इलाक़े में कराए.

तलमीज़ अहमद ने कहा, ''जम्मू-कश्मीर जो भारत के हिस्से में है, उस पर कोई विवाद नहीं है. यह हमारा संप्रभु इलाक़ा है. विवाद तो पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर को लेकर है. मुझे नहीं लगता है कि सऊदी अरब और तुर्की को जम्मू-कश्मीर में जी-20 समिट के आयोजन से कोई दिक़्क़त होगी.''

तलमीज़ अहमद कहते हैं, ''पाकिस्तान तो जी-20 का सदस्य भी नहीं है. ऐसे में उसकी आपत्ति का कोई मतलब नहीं है. चीन ने ऐसा नहीं कहा है कि वह इस बैठक में शामिल नहीं होगा या बहिष्कार करेगा. अगर तुर्की और सऊदी को जगह को लेकर दिक़्क़त है तो वे राजनयिक स्तर पर बात कर लेंगे. शिमला समझौते में पाकिस्तान ने भी कश्मीर को द्विपक्षीय मामला माना था. ऐसे में इसमें विवाद कहाँ है.''

हालाँकि तुर्की राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कई मौक़ों पर कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया है. फ़रवरी 2020 में पाकिस्तानी संसद में संबोधन के दौरान अर्दोआन ने कहा था कि कश्मीर जितना अहम पाकिस्तान के लिए है, उतना ही तुर्की के लिए भी. तुर्की ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का भी विरोध किया था.

भारत के विदेश मंत्रालय ने अर्दोआन की टिप्पणी पर नाराज़गी जताते हुए कहा था कि तुर्की को भारत के आंतरिक मामलों में दख़ल नहीं देना चाहिए. वहीं सऊदी अरब ने कश्मीर का विशेष दर्ज ख़त्म करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. लेकिन ऐतिहासिक रूप से देखें तो सऊदी भी कश्मीर के मामले में पाकिस्तान से सहमत रहा है.

जी-20 क्या है?

जी-20 में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले 20 देश शामिल हैं. जी-20 के पास वैश्विक जीडीपी की 80 फ़ीसदी हिस्सेदारी है. 75 फ़ीसदी वैश्विक कारोबार पर नियंत्रण है और 60 फ़ीसदी वैश्विक आबादी है.

जी-20 देश हैं- अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, जर्मनी, फ़्रांस, इंडिया, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका.

जी-20 1999 में बना था और भारत तब से ही इसका सदस्य है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)