सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बारे में अब तक क्या-क्या पता है?

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पंजाब के मशहूर सिंगर और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस वारदात को पंजाब के मानसा में जवाहरके गांव में अंजाम दिया गया था. हत्या के एक दिन पहले ही पंजाब सरकार ने चार सौ से अधिक लोगों को दी गई सुरक्षा को या तो वापस ले लिया था या कम कर दिया था. इनमें एक नाम सिद्धू मूसेवाला का भी था.
इस मामले में 20 जून को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने बताया था कि मूसेवाला पर सबसे पहले मनप्रीत मन्नू नाम के एक व्यक्ति ने गोली चलाई थी, जिसके बाद पांच और शूटरों ने मूसेवाला पर गोलियां चलाई थीं.
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में कितने शूटरों की हुई है पहचान?
20 जून को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के एचजीएस धालीवाल ने बताया था कि सिद्धू मूसेवाला की हत्या में दो मॉड्यूल शामिल थे जिनका सीधा संपर्क कनाडा में बसे गैंगस्टर गोल्डी बरार से था. पुलिस का कहना था कि इस मामले में उन्होंने 6 शूटरों की पहचान की थी. 20 जून को पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से दो मुख्य शूटर हैं. इन शूटरों से 8 ग्रेनेड, 9 इलेक्ट्रिक डिटोनेटर, 3 पिस्तौल (50 गोलियां) और एक असॉल्ट राइफ़ल बरामद किए गए.
सिद्धू मूसेवाला की कैसे हुई थी हत्या?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक़, हत्या में दो मॉड्यूल शामिल थे. पहला मॉड्यूल बोलेरो गाड़ी में था जिसका नेतृत्व प्रियव्रत फौजी कर रहा था. गाड़ी में ड्राइवर और मनप्रीत के अलावा अंकित सिरसा और दीपक मुंडे इनके साथ थे.
दूसरा मॉड्यूल कोरोला गाड़ी में सवार था जिसमें मनप्रीत मन्नू ट्राइवर के क़रीब बैठा था.
पंजाब पुलिस ने बताया था कि सिद्धू मूसेवाला के घर से निकलने के बाद संदीप नाम के एक व्यक्ति ने हमलावरों को इसकी ख़बर दी. उस समय उनके साथ दो मित्र थे लेकिन कोई सिक्योरिटी नहीं थी.
उन्होंने गाड़ी का पीछा किया. आगे बढ़ने पर कोरोला ने सिद्धू की गाड़ी को ओवरटेक किया और फिर मनप्रीत मन्नू ने एके 47 से उनपर गोलियां चलाईं. ये गोलियां सिद्धू को लगीं.
इसके बाद कोरोला में सवार दोनों लोग उतरे, तब तक पीछे से आती बोलेरो उनके नज़दीक आ गई थी. बोलेरो से भी चारों शूटर उतरे और छह लोगों ने सिद्धू की गाड़ी पर हमला किया.

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सिद्धू मूसेवाला कौन थे?
पंजाब के मानसा ज़िले के रहने वाले शुभदीप सिंह सिद्धू के सिद्धू मूसेवाला बनने का सफर काफी दिलचस्प रहा है. ग्रेजुएशन के बाद सिद्धू ने एक साल का डिप्लोमा कनाडा से किया था. साल 2016 में कनाडा से ही मूसेवाला ने अपने म्यूजिकल करियर की शुरुआत की थी.
इसके बाद से उन्होंने तीन एल्बम और 60 से ज़्यादा सिंगल गाने रिलीज़ किए. इन्हीं एल्बम और गाने के दमपर मूसेवाला पंजाब में तो पॉपुलर हुए ही, साथ ही यूके, कनाडा जैसे जगहों पर भी सिख समुदाय में खूब सराहे गए.
सिद्धू मूसेवाला की लोकप्रियता साल 2018 से तब से बढ़ी जब गन कल्चर से जुड़े उनके कई गाने सामने आए. सिद्धू मूसेवाला की मां चरणजीत कौर मूसा गांव की सरपंच हैं. सरपंच चुनाव के दौरान सिद्धू मूसेवाला ने अपनी मां के लिए जमकर प्रचार किया था.
सिद्धू मूसेवाला के कई गाने सुपरहिट हुए. तो YouTube पर High, Dhakka, Old School, Sanju जैसे गानों को लाखों बार देखा गया.
इन गीतों के माध्यम से बंदूक संस्कृति को कथित रूप से बढ़ावा देने के लिए मूसेवाला की आलोचना की गई और उन पर मुक़दमा चलाया गया. बतौर गायक सिक्का जमाने के बाद सिद्धू मूसेवाला ने फिल्मों में भी पैर जमा लिए.
मूसेवाला ने 'यस आई एम स्टूडेंट', 'तेरी मेरी जोड़ी', 'गुनाह', 'मूसा जट्ट' हैं और 'जट्टं दा मुंडा गौन लगा' जैसी फिल्मों में भी काम किया.
इस बीच लोकप्रियता के साथ ही साथ सिद्धू कई तरह के विवादों से भी घिरे रहे.
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धू मूसेवाला कांग्रेस में शामिल हो गए और उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर मनसा जिले से चुनाव लड़ा था.

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सिद्धू मूसेवाला की हत्या क्यों हुई?
सिद्धू मूसेवाला की हत्या क्यों हुई? ये कहना मुश्किल है लेकिन पुलिस ने आशंका जताई है कि ये गैंग्स के बीच आपसी रंजिश का मामला हो सकता है. हालांकि, मूसेवाला ने इस बात पर कड़ा विरोध जाहिर किया था. हत्या का मकसद क्या था इस बात पर पुलिस अभी चुप्पी साधे हुए है और कह रही है कि इस बात की जांच जारी है. पंजाब में गैंग्स के बीच की दुश्मनी देखी जाती रही है. और कुछ जानकारों का कहा है कि इसकी वजह से हिंसा के मामले सामने आते रहते हैं.
भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी जैसी दिक्कतों से भी इन गैंगस्टर्स को गांव और शहरों में अपना पैर पसारने का मौका मिला है.

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मूसेवाला हत्याकांड मामले में गोल्डी बरार और लॉरेंस बिश्नोई का नाम कैसे आया?
पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच से पता चला है कि इस हत्याकांड में शामिल सभी आरोपी दो मुख्य साजिशकर्ताओं के निर्देश पर काम कर रहे थे वो दो मुख्य साजिशकर्ता हैं- लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार.
लॉरेस बिश्नोई फिलहाल जेल में बंद हैं और आरोपों को ख़ारिज़ कर रहे हैं. तक़रीबन 30 साल के लॉरेंस बिश्नोई के ख़िलाफ़ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं जिनमें हत्या, लूटपाट शामिल हैं. ये मामले उसके ख़िलाफ़ पंजाब, दिल्ली और राजस्थान में दर्ज हैं.लॉरेंस बिश्नोई की चर्चा उस समय हुई जब गैंग के सदस्य को अभिनेता सलमान ख़ान को धमकी देने के मामले में गिरफ़्तार किया गया था.
बिश्नोई समुदाय काले हिरण चिंकारा को पवित्र समझता है. लॉरेंस गिरोह के सदस्य संपत नेहरा ने सलमान ख़ान को जान से मारने की धमकी दी थी क्योंकि सलमान काले हिरण के शिकार मामले में अभियुक्त हैं.
सतिंदर सिंह उर्फ़ गोल्डी बरार को लॉरेंस बिश्नोई का क़रीबी समझा जाता है. अभी कनाडा में रह रहे गोल्डी बरार को लेकर पुलिस का कहना है कि ऐसे सबूत मिले हैं कि हत्या में शामिल एक शूटर का सीधा संपर्क गोल्डी से था और अब गोल्डी बरार के प्रत्यर्पण की कोशिश चल रही है.
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