नवजोत सिंह सिद्धू के ख़िलाफ़ वो मामला जिसमें हुई थी उन्हें एक साल की सज़ा

सिद्धू

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तीन दशक पुराने रोड रेज के एक मामले में 10 महीने की सज़ा काट कर कांग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू शनिवार को पटियाला जेल से रिहा होकर बाहर आ गए.

जेल से निकलने के बाद सिद्धू ने पत्रकारों से कहा, "सरकारों में सत्य को सुनने की ताकत नहीं रही. एक ऐसा भय है कि वे सत्य की आवाज़ को सुनना नहीं चाहते थे. शायद यही वजह है कि सुबह पौने बारह बजे का समय देकर मुझे अब छोड़ा है ताकि सभी मीडिया कर्मी चले जाएं. जब भी तानाशाही इस देश में आई एक क्रांति आई और आज मैं कहना चाहता हूं कि उस क्रांति का नाम है राहुल गांधी."

बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू को एक साल की सज़ा सुनाई थी.

पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के सिद्धू को बरी करने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के अपने फ़ैसले में नवजोत सिंह सिद्धू को गैर-इरादतन हत्या के आरोपों से बरी करते हुए तीन साल की सज़ा को एक हज़ार रुपए के जुर्माने में बदल दिया था.

अदालत के फ़ैसले के बाद प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धू ने एक ट्वीट में कहा, "मैं अपने आप को क़ानून के समक्ष प्रस्तुत करूंगा.."

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क्या था ये मामला?

27 दिसंबर 1988 को पटियाला की एक पार्किंग में सिद्धू की 65 वर्षीय गुरनाम सिंह के साथ मारपीट हुई थी. बाद में गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी. सिद्धू पर ग़ैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ था.

निचली अदालत ने सिद्धू को बरी कर दिया था लेकिन बाद में उच्च न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराते हुए तीन साल की सज़ा सुनाई थी.

नवजोत सिंह सिद्धू

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इस मामले में सरकार की तरफ से मुकदमा लड़ने वाले लोक अभियोजक ने अदालत में दावा किया था कि घटना के दिन सिद्धू और उनके दोस्त रूपिंदर सिंह संधु पटियाला के शेरनवाला गेट के पास एक जिप्सी में जा रहे थे. वहीं पीड़ित गुरनाम सिंह दो अन्य लोगों के साथ मारूति कार में यात्रा कर रहे थे.

वाहन हटाने को लेकर नवजोत सिद्धू और उनके साथी का गुरनाम सिंह से विवाद हो गया था. इस दौरान गुरनाम सिंह गिर गए थे और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी.

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक घटना के बाद नवजोत सिंह सिद्धू और उनका दोस्त फरार हो गए थे. बाद में मृतक के परिजनों की शिकायत पर सिद्धू और उनके दोस्त के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया था.

क्या था हाई कोर्ट का फ़ैसला?

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निचली अदालत से बरी होने के बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा था जहां 2006 में सिद्धू और उनके दोस्त को तीन-तीन साल की सज़ा सुनाई गई थी. दोनों पर एक-एक लाख का जुर्माना भी लगाया गया था.

हाई कोर्ट के फ़ैसले को सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में ये दावा करते हुए चुनौती दी थी कि गुरनाम सिंह की मौत को लेकर डॉक्टरों की राय स्पष्ट नहीं थी.

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में सिद्धू को दोषमुक्त कर दिया था. दूसरे पक्ष ने इसके ख़िलाफ़ अपील दायर की थी. इसी अपील पर अब अदालत ने सिद्धू को दोषी क़रार दिया है और एक साल की सज़ा सुनाई गई है.

क्रिकेट से बनाई पहचान

सिद्धू के ख़िलाफ़ जब ये मामला दर्ज किया गया था, तब वो क्रिकेट में सक्रिय थे.

सिद्धू 1983 से लेकर 1999 तक भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे. उन्होंने 51 टेस्ट और 136 वनडे खेले हैं. 1987 में वो विश्व कप खेलने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का भी हिस्सा रहे थे.

सिद्धू ने 1996-97 में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ खेले गए एक टेस्ट मुक़ाबले में यादगार दोहरा शतक लगाया था.

सिद्धू

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सिद्धू ने अपना आख़िरी टेस्ट मैच 2-6 जनवरी 1999 को न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेला था. इस मैच में सिद्धू ने सिर्फ़ एक ही रन बनाया था.

सिद्धू ने 1999 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया. इसके बाद सिद्धू कमेंटेटर के रूप में सक्रिय रहे.

सिद्धू लंबे समय तक टॉक शो में जज रहे और अपने ख़ास अंदाज़ से उन्होंने अलग पहचान बनाई.

सिद्धू राजनीति में भी सक्रिय रहे. वे अमृतसर से सांसद रहे और पंजाब में कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे.

मौजूदा समय में वो पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं.

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