पंजाब: अब इस मसले पर फिर से टकराए सिद्धू और चन्नी

चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू

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पंजाब में केबल टीवी सेवा की नई दरें तय होने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के ख़िलाफ़ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है.

चरणजीत सिंह चन्नी ने सोमवार को केबल टीवी कनेक्शन की मासिक दरें 100 रुपये तय करने की घोषणा की थी. यानी लोगों से टीवी के लिए इससे ज़्यादा शुल्क नहीं लिया जा सकता है.

उन्होंने अटम नगर में पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए केबल माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ लड़ाई की घोषणा की.

उन्होंने कहा कि केबल माफ़िया ज़्यादा शुल्क लगाकर लोगों का शोषण करते आए हैं जो आगे स्वीकार नहीं किया जाएगा. लोगों को केबल टीवी के लिए 100 रुपये महीने से अधिक देने की ज़रूरत नहीं है. जो इन दरों के मुताबिक] केबल सेवा उपलब्ध नहीं कराएंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

चरणजीत सिंह चन्नी ने इस दौरान बादल परिवार पर भी निशाना साधा और कहा कि पंजाब में परिवहन और केबल टीवी कारोबार पर बादल परिवार का राज है.

लेकिन, इस मामले बादल परिवार से पहले नवजोत सिंह सिद्धू का बयान आया है. उन्होंने ट्विटर पर कई ट्वीट करके केबल टीवी नेटवर्क फास्टवे के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई ना करने को लेकर अपनी सरकार पर सवाल उठाया है.

फास्टवे केबल टीवी नेटवर्क के क्षेत्र में एक बड़ी कंपनी है जो पंजाब में केबल टीवी सेवा देती है.

नवजोत सिंह सिद्धू

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सिद्धू ने क्या कहा?

सिद्धू ने ट्वीट किया, "पांच साल पहले, मैंने मल्टी सिस्टम ऑपरेटर- फास्टवे के एकाधिकार को ख़त्म करने, हज़ार करोड़ रुपये के टैक्स की वसूली, स्थानीय ऑपरेटरों को सशक्त बनाने के लिए और लोगों को सस्ती केबल सेवा देने के लिए नीति सामने रखी थी. फास्टवे के ख़िलाफ़ ज़रूरी कार्रवाई के बिना पंजाब में केबल संकट का समाधान निकालना गलत है."

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उन्होंने आगे ट्वीट किया, "2017 में मैंने फास्टवे से चोरी किए गए राज्य करों की वसूली के लिए उसके द्वारा छिपाए गए कंप्यूटर और डेटा को अपने नियंत्रण में लेकर काम करने के लिए एक नये क़ानून का प्रस्ताव दिया था. यह केबल ऑपरेटरों को इसके एकाधिकार से आज़ाद कर देता और राज्य के खजाने को भर देता!!"

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सिद्धू ने भी केबल शुल्क को लेकर बादल परिवार को निशाने पर लिया. उन्होंने ट्वीट किया, "फास्टवे ने पास सरकार को दी गई जानकारी के मुक़ाबले तीन से चार गुना टीवी कनेक्शंस हैं. बादलों ने उसके एकाधिकार की सुरक्षा के लिए क़ानून बनाए. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मेरे उस प्रस्ताव को रोक दिया जिससे फास्टवे का एकाधिकार ख़त्म हो जाता, राज्य के पास प्रति कनेक्शन राजस्व आता और टीवी केबल की कीमतें लोगों के लिए आधी हो जातीं."

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नवजोत सिंह सिद्धू पहले भी फास्टवे पर केबल बाज़ार में एकाधिकार बनाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं. उन्होंने फास्टवे को राजनीतिक संरक्षण मिलने की भी बात कही है. वह उस पर केबल की मनमानी कीमत वसूलने, कनेक्शन की सही जानकारी ना देने और कर चोरी के आरोप लगाते रहे हैं.

हालांकि, जब उनकी ही सरकार ने केबल टीवी के शुल्क की सीमा तय कर दी तब भी उन्होंने इस कदम को नाकाफ़ी बताया है. फास्टवे पर कार्रवाई के बिना उन्होंने किसी भी उपाय से समस्या का समाधान ना मिलने की बात कही है.

चरणजीत सिंह चन्नी

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चन्नी सरकार पर सिद्धू के हमले

सिद्धू ने एक बार अपनी सरकार पर सवाल उठाया है. वह पिछले कुछ समय से लगातार चन्नी सरकार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोल रहे हैं.

चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब के डीजीपी और एडवोकेट जनरल को उनके पद से हटाने की मांग की थी. उन्होंने इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

लेकिन, बाद में उनके इस्तीफ़ा को नामंज़ूर करते हुए पंजाब के डीजीपी और एडवोकेट जनरल को उनके पद से हटा दिया गया.

उन्होंने ये तक कहा था कि चरणजीत सिंह चन्नी ने डीजीपी और एडवोकेट जनरल (एजी) के तौर ऐसे लोगों की नियुक्ति की है जिन्होंने पंजाब के लोगों को धोखा दिया है. उन्होंने डीजीपी इक़बाल सिंह सहोता पर बेदअबी मामले में सुखबीर सिंह बादल को बचाने का आरोप लगाया था.

वहीं, एजी एपीएस देओल ने पंजाब सरकार के ख़िलाफ़ पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी के हक में केस लड़ा था और उन्हें ज़मानत भी दिलाई थी जो पंजाब सरकार के लिए बड़ा झटका था.

डीजीपी का नाम लिए बगै़र सिद्धू का कहना था कि ऐसे लोगों को ख़ास पदों पर लगाया गया है जिन्होंने बादलों (पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनका परिवार) को क्लीन चिट दी थी.

हालाँकि, पंजाब पुलिस ने इस आरोप को ख़ारिज किया कि सहोता ने ऐसा कुछ किया था.

मामला गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का है जो पंजाब में बहुत बड़ा मुद्दा है और लोगों की भावनाओं से जुड़ा है.

वहीं, इसी महीने सिद्धू ने सरकार पर खाली पड़े पदों को भरने को लेकर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि जो लोग 26 लाख नौकरी की बात कर रहे हैं उनसे पूछो कि जो एक लाख पद अब भी खाले पड़े हैं उन्हें क्यों नहीं भरा? आपके पास पैसा है तो सबसे पहले वो एक लाख पद भरें.

उन्होंने लोगों से अपील की कि वो लॉलीपॉप देखकर वोट न डालें बल्कि वोट सोच समझ कर डालें. उन्हें किसी पद की ज़रूरत नहीं. हर कुर्बानी के लिए तैयार हैं. उन्होंने चन्नी सरकार की घोषणाओं के बाद पंजाब की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए थे.

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