मुसलमानों में सबसे ज़्यादा घटी प्रजनन दर फिर भी औसत से अधिक- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, AFP
देश के सभी समुदायों के महिलाओं की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) में पिछले कुछ सालों में कमी दर्ज की गई है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के पांचवें चरण की रिपोर्ट से यह बात पता चली है.
टीएफआर का मतलब यह होता है कि कोई महिला अपने प्रजनन काल में कितने बच्चे पैदा कर रही है. माना जाता है कि यदि यह आंकड़ा 2.1 या इससे कम हो जाए तो देश की आबादी कुछ वक़्त बाद बढ़नी बंद हो जाएगी.
अंग्रेज़ी दैनिक टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पहले पन्ने पर छपी ख़बर के अनुसार, मुसलमानों को छोड़कर सभी समुदायों का टीएफआर अब देश के मौजूदा टीएफआर औसत 2 से कम है. केवल मुसलमान समुदाय का ही टीएफआर 2.36 है.
सर्वे के मुताबिक अगर 1992-93 के एनएफएचएस-1 से तुलना करें तो मुसलमानों में प्रजनन दर में सबसे तेज़ गिरावट आई है जो कि 46.5 फ़ीसदी है.
इस ख़बर में हालांकि ये भी बताया गया है कि 2015-16 में हुए पिछले सर्वे यानी एनएफएचएस-4 की तुलना में इस बार के सर्वे (2019-21) में मुसलमान समुदाय के टीएफआर में बौद्ध समुदाय के बाद दूसरी तेज़ गिरावट हुई है.
मुसलमानों के लिए पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 2.62 था. इस तरह इसमें 0.26 की कमी दर्ज हुई है. वहीं बौद्धों के मामले में यह आंकड़ा 1.74 से घटकर 1.39 रह गया है.
वहीं दो धार्मिक समुदायों सिख और जैन की कुल प्रजनन दर घटने के बजाय बढ़ी है. सिख समुदाय का टीएफआर अब 1.58 से बढ़कर 1.61 हो गया, वहीं जैन समुदाय के बीच यह आंकड़ा 1.2 से बढ़कर 1.6 हो गया है.
ख़बर के अनुसार, हिंदू समुदाय का टीएफआर अब 2.13 से घटकर 1.94 रह गया है. ईसाई समुदाय की कुल प्रजनन दर 1.99 से घटकर 1.88 हो गई है.
इससे पहले एनएफएचएस-5 के आंकड़ों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को गुजरात के वडोदरा में जारी किया था. उससे पता चला कि देश का टीएफआर पिछले सर्वे के 2.7 से घटकर 2 रह गया है.
ये भी बताया गया कि अब देश में केवल 5 राज्यों की प्रजनन दर 2.1 से अधिक है. इनमें बिहार (2.98), मेघालय (2.91), उत्तर प्रदेश (2.35), झारखंड (2.26) और मणिपुर (2.17) शामिल हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
शाओमी इंडिया ने ईडी पर कंपनी केअधिकारियों को धमकाने का लगायाआरोप
चीन की स्मार्टफोन निर्माता शाओमी की भारतीय इकाई शाओमी इंडिया ने भारतीय जांच एजेंसी 'प्रवर्तन निदेशालय' यानी ईडी पर पूछताछ के दौरान उनके टॉप अधिकारियों को हिंसक बर्ताव की धमकी देने का आरोप लगाया है.
बिज़नेस अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर इस ख़बर को जगह दी है.
शाओमी इंडिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाख़िल करके ये आरोप लगाया है. हालांकि शनिवार को ईडी ने एक बयान जारी कर उन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए 'ग़लत और आधारहीन' क़रार दिया है.
अख़बार के अनुसार, कंपनी ने अपनी याचिका में कहा कि उनके दो अधिकारियों पूर्व इंडिया एमडी मनु कुमार जैन सहित मुख्य वित्त अधिकारी समीर बीएस राव और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है.
उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें गिरफ़्तार करने, करियर को बर्बाद करने, आपराधिक मुक़दमे लादने और मारपीट करने की धमकियां ईडी के अधिकारियों ने दी है.
मालूम हो कि शाओमी इंडिया के ख़िलाफ़ ईडी, विदेशी मुद्रा प्रबंधन क़ानून यानी फेमा के उल्लंघन के आरोपों की जांच कर रही है. उसे लेकर हाल में कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ की गई थी.

इमेज स्रोत, Getty Images
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर पीएम मोदी की बैठक
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक हुई.
इस बैठक में उन्होंने स्कूली बच्चों को पढ़ाने में टेक्नोलॉजी का अधिक इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी है. प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों माध्यमों को मिलाकर 'हाइब्रिड लर्निंग' की दिशा में बढ़ने का सुझाव दिया है.
हिंदुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने पर छपी ख़बर के अनुसार, इस बैठक में विभिन्न कक्षाओं के लिए पाठ्यपुस्तक तैयार करने के पहले नया 'नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क' तैयार करने की योजना से प्रधानमंत्री को अवगत कराया गया. पीएम मोदी को बताया गया कि इसके लिए नेशनल स्टीयरिंग कमेटी के दिशानिर्देश में यह काम चल रहा है.
इस बैठक में प्रधानमंत्री ने आंगनबाड़ी और स्कूलों के डेटाबेस का एकीकरण करने पर ज़ोर दिया. उन्होंने पढ़ाई के साथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बच्चों के नियमित हेल्थ चेकअप कराने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्कूल छोड़ चुके बच्चों को ख़ास प्रयास करके फिर से स्कूल लेकर आने का निर्देश भी दिया है.
मालूम हो कि देश की नई शिक्षा नीति जुलाई 2020 से लागू हुई है.

इमेज स्रोत, AFP / GETTY IMAGES
यूक्रेन पर सुरक्षा परिषद में पहली बार सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित,
यूक्रेन में शांति बहाली को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पहली बार सभी 15 सदस्यों ने 'संयुक्त प्रयास' करने से संबंधित प्रस्ताव पारित किया है.
सुरक्षा परिषद ने यूक्रेन में 'शांति और सुरक्षा बनाए रखने पर अपनी गंभीर चिंता' व्यक्त की है. साथ ही संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रयासों का समर्थन भी किया है.
अंग्रेज़ी दैनिक बिज़नेस लाइन में छपी ख़बर के अनुसार, रूस ने पहली बार अपना वीटो न लगाते हुए इस घोषणा का समर्थन किया. ऐसे में सुरक्षा परिषद का ताज़ा बयान आम सहमति से तैयार हुआ. वैसे इसे नॉर्वे और मेक्सिको ने मिलकर तैयार किया था.
प्रस्ताव में कहा गया, "सुरक्षा परिषद याद दिलाना चाहती है कि इसके सभी सदस्यों ने यूएन चार्टर के तहत अपने अंतरराष्ट्रीय झगड़े शांतिपूर्ण तरीक़े से हल करने का ज़िम्मेदारी ली है. सुरक्षा परिषद शांतिपूर्ण हल खोजने की दिशा में यूएन महासचिव के प्रयासों का मजबूती से समर्थन करती है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














