हाईवोल्टेज ड्रामा के बाद देर रात अपने घर पहुंचे बीजेपी नेता तेजिंदर बग्गा- प्रेस रिव्यू

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अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले दिल्ली बीजेपी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा गिरफ़्तारी के बाद आख़िकार देर रात अपने घर पहुंच गए. घर पहुंचने पर बड़ी संख्या में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया है.
इससे पहले बग्गा की गिरफ़्तारी को लेकर शुक्रवार दिन भर पंजाब पुलिस के साथ हरियाणा और दिल्ली पुलिस का हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा. अंत में दिल्ली पुलिस ने उन्हें पंजाब पुलिस के क़ब्ज़े से छुड़ाकर देर रात अदालत में पेश करके उन्हें घर छोड़ने का आदेश हासिल किया.
अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, दिन भर चली गहमागहमी के बाद बग्गा को रात साढ़े 12 बजे गुरुग्राम में द्वारिका कोर्ट की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट स्वयंसिद्धा त्रिपाठी के सामने पेश किया गया.
अदालत में उनकी मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई और बताया गया कि उन्हें पीठ और हाथ में चोट लगी है. वहां बग्गा ने मजिस्ट्रेट से घर जाने देने की मांग की. उसके बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें घर तक सुरक्षित पहुंचाने का आदेश दिया.
बग्गा के वकील के अनुसार, मजिस्ट्रेट ने जनकपुरी थाना इंचार्ज को बग्गा को सुरक्षा देने का आदेश दिया है.
उधर बग्गा के घर पहुंचने के बाद देर रात दिल्ली बीजेपी के प्रमुख आदेश कुमार गुप्त ने एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, "लोकतंत्र एवं सच्चाई की जीत हुई, तेजिंदर बग्गा की घर वापसी हुई."
वहीं छूटने के बाद तेजिंदर बग्गा ने अपनी गिरफ़्तारी को ग़ैर-क़ानूनी बताते हुए दावा कि किसी भी स्थानीय पुलिस को इस बारे में बताया नहीं गया था.
बग्गा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अगर अरविंद केजरीवाल की मर्ज़ी होगी तो उनके ख़िलाफ़ सौ और एफ़आईआर दर्ज हो सकती हैं.
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श्रीलंका में एक महीने में दूसरी बार लगा आपातकाल
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार को एक बार फिर से देश में आपातकाल लगाने का एलान किया. पिछले एक महीने में ये दूसरी बार है जब देश में आपातकाल लगाना पड़ा है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने इस ख़बर को अपने पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार के अनुसार, जनता का बढ़ता विरोध और ट्रेड यूनियन के आंदोलन को देखते हुए यह फ़ैसला लेना पड़ा है.
देश में अभूतपूर्व आर्थिक संकट के विरोध में इससे पहले गुरुवार को सैकड़ों युवा संसद के साथ राष्ट्रपति कार्यालय और प्रधानमंत्री आवास के बाहर जमा हो गए थे. लोग मांग कर रहे हैं कि राजपक्षे इस्तीफ़ा दें.
ग़ौरतलब है कि 1 अप्रैल को राष्ट्रपति राजपक्षे ने देश की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के तेज़ होने के बाद आपातकाल लगाने का एलान किया था. उसकी वजह ये थी कि देश में भोजन, ईंधन और दवाइयों सहित ज़रूरी सामानों की देश में किल्लत हो गई थी. आसमान छूती क़ीमतों के चलते जनता को ये चीज़ें ख़रीदने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था.
हालांकि संसद में आपातकाल को लेकर मतदान होने की संभावना को देखते हुए सरकार को इसे केवल पांच दिनों में रद्द करने को मजबूर होना पड़ा.

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देश में बाल विवाह हुआ कम पर कई राज्यों ने बढ़ाई चिंता
देश में बाल विवाह के आंकड़ों में कमी दर्ज हुई है, लेकिन त्रिपुरा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, मणिपुर और असम में इसके आंकड़े बढ़ते पाए गए हैं. ये बात राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के पांचवे चरण की रिपोर्ट से पता चली है.
इसे शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुजरात के वडोदरा में जारी किया. यह सर्वे 2019 से 2021 के बीच किया गया था.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, त्रिपुरा में बाल विवाह के आंकड़ों में सबसे ज़्यादा वृद्धि हुई है. पिछले सर्वे के अनुसार, वहां महिलाओं के बीच बाल विवाह का प्रतिशत 33.1 फ़ीसदी था, जो अब 40.1 हो गया है. वहीं लड़कों के मामले में यह 16.2 से बढ़कर 20.4 फ़ीसदी हो गया है.
हालांकि पूरे देश में महिलाओं के बीच बाल विवाह का आंकड़ा 26.8 फ़ीसदी से घटकर 23.3 फ़ीसदी हो गया है. वहीं लड़कों के मामले में यह आंकड़ा 20.3 फ़ीसदी से घटकर 17.7 फ़ीसदी रह गया है.
अहम बात यह भी पता चली है भारत की कुल प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) अब 2.2 से घटकर 2.0 हो गई है.
इसका मतलब यह हुआ कि देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए उठाए गए क़दम अब सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं. पिछले सर्वे यानी एनएफएचएस के चौथे चरण के अनुसार देश की प्रजनन दर 2.7 थी.
अब देश में केवल 5 राज्यों की प्रजनन दर 2.1 से अधिक है. इनमें बिहार (2.98), मेघालय (2.91), उत्तर प्रदेश (2.35), झारखंड (2.26) और मणिपुर (2.17) शामिल हैं.

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यूक्रेन मसले पर UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने नीदरलैंड के राजनयिक को आड़े हाथों लिया
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने ब्रिटेन में नीदरलैंड के राजदूत कारेल वैन ओस्टरोमो को जमकर आड़े हाथों लिया. रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई में भारतीय रुख़ की नीदरलैंड के राजनयिक द्वारा आलोचना करने के बाद तिरुमूर्ति ने यह क़दम उठाया.
डेक्कन क्रॉनिकल की ख़बर के अनुसार, नीदरलैंड के राजनयिक ओस्टरोमो रूस की निंदा वाले प्रस्ताव पर मतदान में उपस्थित न रहने को लेकर भारत पर सवाल उठाए थे.
तिरुमूर्ति ने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर शुक्रवार को ओस्टरोमो के कमेंट का जवाब देते हुए लिखा, "कृपया इसके लिए हमें ज़िम्मेदार न ठहराएं राजदूत महोदय. हमें मालूम है कि क्या करना है."
भारत फ़िलहाल 15 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है. लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच की ताज़ा लड़ाई में भारत रूस की खुलकर आलोचना करने से बचता रहा है.
हालांकि यूरोप के बड़े देशों सहित अमेरिका भी इस मसले पर भारत से बातचीत करता रहा है. इसके बावजूद इस मामले में भारत के रुख़ में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
भारत के नए विदेश मंत्री विनय मोहन क्वात्रा ने हाल में कहा कि यूक्रेन के मसले पर भारत का रुख़ 'सिद्धांतों और हितों' के बीच का संतुलन है.
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