तेजिंदर बग्गा की गिरफ़्तारी में कैसे उलझीं पंजाब, हरियाणा और दिल्ली पुलिस- पूरा घटनाक्रम

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दिल्ली बीजेपी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की गिरफ़्तारी को लेकर तीन राज्यों की पुलिस उलझ गई है.
मामला हरियाणा और पंजाब हाई कोर्ट भी पहुंच गया है. अब हाईकोर्ट में इस पर शनिवार को सुनवाई होगी.
तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के ख़िलाफ़ मार्च में पंजाब के मोहाली में आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता की शिकायत पर मुक़दमा दर्ज किया गया था.
शुक्रवार का घटनाक्रम
- पंजाब पुलिस ने दिल्ली के जनकपुरी इलाक़े से शुक्रवार सुबह तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को गिरफ़्तार किया.
- पंजाब पुलिस अपने अभियुक्त को लेकर पंजाब जा रही थी जब रास्ता में कुरुक्षेत्र में हरयाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस को रोका
- पंजाब पुलिस दल और अभियुक्त को हरयाणा पुलिस पीपली थाने लेकर पहुंची.
- इसी बीच दिल्ली में तेजिंदर पाल बग्गा के पिता की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया और लुकआउट नोटिस जारी किया.
- दिल्ली पुलिस की टीम ने पंजाब पुलिस के अभियुक्त तेजिंदर पाल बग्गा को हरियाणा पुलिस की मदद से अपनी कस्डटी में लिया और वापस लेकर दिल्ली पहुंची.

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- इसी दौरान पंजाब पुलिस ने हरयाणा-पंजाब हाई कोर्ट में हेबस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की. पंजाब पुलिस ने अभियुक्त और अपने पुलिसकर्मियों को अवैध हिरासत में लिए जाने के आरोप लगाए.
- हाईकोर्ट ने शनिवार तक तक के लिए सुनवाई टाल दी
- दिल्ली पुलिस की तरफ से तर्क दिया गया कि पंजाब पुलिस की टीम पुलिस स्टेशन में अपनी मर्ज़ी से बैठी है.
- हाई कोर्ट ने बग्गा को हरियाणा में ही रखे जाने की पंजाब पुलिस की अपील खारिज कर दी.
- अब शनिवार को हाई कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई होगी
क्या कहना है पंजाब का?

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पंजाब सरकार के महाधिवक्ता अनमोल रतन सिद्धू ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा पंजाब पुलिस के अभियुक्त हैं जिन्हें अवैध तरीके से दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस की हिरासत से छुड़ा लिया है.
अनमोल रतन सिद्धू ने कहा, "अभियुक्त के ख़िलाफ़ एफ़आईआर रजिस्टर हुई है जिसे रद्द करने के लिए याचिका दायर की गई थी, उस पर कुछ नहीं हुआ है. कोई अग्रिम ज़मानत भी नहीं मिली है. पुलिस ने पांच बार उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन वो नहीं आए."
महाधिवक्ता ने कहा, "हमारी टीम उन्हें पकड़ने के लिए उनके घर गई थी और इसकी जानकारी हमारी टीम ने जनकपुरी थाने में जानकारी दी थी. हमारे वकील भी थाने में मौजूद रहे. लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस बारे में जानकारी को दर्ज नहीं की. सभी नियमों का पालन करते हुए हमने गिरफ़्तारी की है. इस पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी हुई है."
तेजिंदर पाल बग्गा के पिता ने मीडिया से बात करते हुए पंजाब पुलिस पर ज़्यादती का आरोप लगाया था. इसे खारिज करते हुए महाधिवक्ता ने कहा, "गिरफ़्तारी की वीडियोग्राफी हुई है. किसी तरह की कोई ज़्यादती नहीं हुई है. न्यायिक प्रक्रिया का पूरा पालन किया गया है."
हरियाणा और दिल्ली पुलिस पर सांठगांठ के तहत बग्गा को हिरासत से छुड़ाने का आरोप लगाते हुए महाधिवक्ता ने कहा, "हरियाणा पुलिस ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर हमारी टीम को फिल्मी तरीके से रोका. उन्होंने हमारे अभियुक्त को छुड़ाकर हमारी पुलिस को थाने में बिठाया. हमने उसे डिटेन किया था और हमें चौबीस घंटे के भीतर अदालत के समक्ष पेश करना था. हमारे पास हेबस कार्पस की याचिका दर्ज करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था.हमने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है."
महाधिवक्ता ने कहा, "दिल्ली पुलिस ने हमारी लीगल कस्टडी से अभियुक्त को छुड़ाया है और एक स्टंट की तरह इसे पब्लिक को दिखाया है. हम हाई कोर्ट से अपनी हिरासत वापस मांगने की अपील करेंगे."
दिल्ली पुलिस की तरफ से अदालत में क्या कहा गया?

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दिल्ली पुलिस की तरफ से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता सत्यपाल जैन ने अदालत के बाहर पत्रकारों को बताया, "आज सुबह साढ़े आठ बजे जनकपुरी थाने में एक एफ़आईआर दर्ज हुई. शिकायतकर्ता ने कहा कि कुछ लोग उनके घर आए, दरवाजा तोड़ने की कोशिश की और ज़बरदस्ती तेजिंदर बग्गा को उठाकर ले गए. इसके बाद पुलिस ने अपहरण की एक एफआईआर दर्ज की. द्वारका कोर्ट से दिल्ली पुलिस ने सर्च वारंट हासिल किया और सर्च वारंट हरियाणा पुलिस को भेजा. हरियाणा पुलिस ने इस सर्च वारंट को कुरुक्षेत्र में पीपली के पास एग्ज़ीक्यूट किया और दिल्ली पुलिस को तेजिंदर बग्गा को सौंपा. क़ानून के अनुसार उन्हें वारंट जारी करने वाली अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा."
सत्यपाल जैन ने कहा, "दिल्ली पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है और जो सर्च वारंट द्वारका कोर्ट ने जारी किया था उसे अदालत में पेश किया. पंजाब पुलिस के दो-तीन अधिकारी जनकपुरी थाने में बैठे हैं, अपनी मर्जी से बैठे हैं, हमने उन्हें वहाँ नहीं बिठाया है."
दूसरे राज्य में गिरफ़्तारी पर क्या कहता है क़ानून?
भारत की संघीय व्यवस्था के तहत क़ानून और व्यवस्था राज्य सरकार के अधीन होती है. राज्य सरकार पुलिस के ज़रिए क़ानून व्यवस्था क़ायम करती हैं.
यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है तो पुलिस उसे गिरफ़्तार करके अदालत के समक्ष पेश करती है. लेकिन यदि वो अभियुक्त दूसरे राज्य में मौजूद होता है तो पुलिस को गिरफ़्तारी के लिए स्थानीय पुलिस को जानकारी देनी होती है.
उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं, "सबसे पहले तो पुलिस को स्थानीय पुलिस को सूचित करना होता है और अगर वह अभियुक्त को बीस किलोमीटर से दूर ले जा रहे हैं तो स्थानीय मजिस्ट्रेट से ट्रांजिट रिमांड लेना अनिवार्य है. यदि पंजाब पुलिस ने ऐसा किया है पंजाब पुलिस बिलकुल साफ़ है."
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वहीं सत्यपाल जैन कहते हैं, "एक राज्य की पुलिस यदि दूसरे राज्य में किसी अभियुक्त को गिरफ्तार करने जाती है तो दूसरे राज्य की पुलिस को जानकारी देनी होती है, पुलिस को साथ भी लेना होता है, लेकिन पंजाब पुलिस ने ऐसा नहीं किया. दिल्ली पुलिस को किसी तरह शामिल नहीं किया गया. दिल्ली पुलिस को पता नहीं था कि किसने उन्हें हिरासत में लिया और क्यों लिया."
हालांकि पंजाब पुलिस ने दिल्ली पुलिस के आरोपों को खारिज करते हुए अदालत से कहा है कि पंजाब पुलिस ने दिल्ली पुलिस को जानकारी दी थी और उनके अधिकारी जनकपुरी थाने गए थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस जानकारी को स्वीकार ही नहीं किया.
"मुझे ऐसा लगता है कि पंजाब पुलिस की तरफ से कोई ना कोई चूक ज़रूर हुई होगी वरना जिस तरह से हरियाणा में पंजाब पुलिस को रोका गया, वैसा नहीं हुआ होता."
विक्रम सिंह कहते हैं, "पंजाब पुलिस को जनकपुरी थाने में जानकारी देनी चाहिए थी और जनरल डायरी में एंट्री करनी थी और उसकी नकल लेनी थी. यही सही तरीका और क़ानूनी प्रक्रिया है."
पुलिस के राजनीतिक इस्तेमाल के आरोप

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इसी बीच पुलिस के राजनीतिक इस्तेमाल का सवाल भी खड़ा हुआ है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि राज्य सरकारें राजनीतिक हितों के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही हैं.
तेजिंदर बग्गा की गिरफ़्तारी के प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए विक्रम सिंह कहते हैं, "पुलिस के पास हज़ार काम है, अभी पटियाला में धमाका हुआ था, उसमें कितनी गिरफ़्तारियां हुईं. जो असल काम है पुलिस का वह नहीं हो रहा है और तकनीकी और राजनतिक मुद्दों पर संसाधन खर्च किए जा रहे हैं. मुझे लगता है कि पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कि बहुत ग़लत है."
विक्रम सिंह कहते हैं, "किसी एक राज्य में ही ऐसा नहीं हो रहा है, जहां जिसकी सरकार है वो पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं."
वहीं पूर्व आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण कहते हैं, "जिस तरह की हरकतें हुई हैं ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है कि सभी राजनीतिक दल पुलिस के इस तरह से इस्तेमाल में शामिल हैं. असम में बीजेपी की सरकार की पुलिस गुजरात गई और जिग्नेश मेवाणी को गिरफ़्तार करके ले आई. गुजरात में भी बीजेपी की सरकार है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई. पंजाब में आप की सरकार जब से आई है तब से हरकतें कर रही है. पहले इन्होंने कुमार विश्वास के घर पुलिस को भेजा था, अब बग्गा को उठा लिया."
"पंजाब की पुलिस आई और बग्गा को उठाकर ले गई, इत्तेफाक से रास्ते में बीजेपी की सरकार वाला राज्य पड़ गया और पुलिस को रोक लिया गया. ये सब बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और कोई भी ऐसा करने से गुरेज नहीं कर रहा है."
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